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पूरा वीडियो : संविधान बाहरी व्यवस्था के लिए है, आतंरिक जागृति तो धर्म से ही आएगी || आचार्य प्रशांत (2020)
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Transcript
00:00भारत का सम्विधान एक बहुत सुन्दर फूल है
00:02लेकिन वो जिस पेड़ पर लगा है न वो धर्म का पेड़ है
00:06लेकिन बहुत सारे नोजवान वगेरा होते हैं
00:09उन्हें लगने लगता है कि ये फूल ऐसा यी आ गया कहीं से
00:12बिना पेड़ के ऑप फूल आ गया है
00:29तो वो सम्विधान ने उसारे प्रावधान रखेगा क्यों जो आप पाते हैं आज वहाँ पर इसी तरीके से समझिये कि
00:35अगर भारत की आबादी ही धार्मिक ना होती तो जितनी बातें सम्विधान में कही गई थी उनका पालन क्यों करती
00:44आप बना लो सम्विधान काला अच्�
00:58अब एक नहीं दिया अब मानित नहीं करा तिरसकार नहीं कर दिया कुछ संशोधन करें वह समय की मांग हैं
01:03लेकिन फिर भी जो सम्विधान की भावना है उसके साथ कभी दूरवकार नहीं करा इस देश ने
01:09करना चाहता ही नहीं है ये देश, क्यों नहीं करना चाहता, क्योंकि 70 साल पहले भी जब ये देश अशिक्षित
01:16था, घरीब था, हर तरीगे दे पिछड़ा हुआ था, तो भी धार्मिक था, तो सम्विधान भी बिना धर्म के नहीं
01:23चल सकता है।
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