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Transcript
00:00सुरसा है जिन्दगी, राक्षसी
00:04जिन्दगी महनत करवाती है उमीदें दिखा दिखा के
00:07महनत करो ये दे दूँगी, महनत करो वो दे दूँगी
00:11और जो देने का वादा जिन्दगी करती हो कभी दे नहीं सकती
00:15ऐसा नहीं कि जिन्दगी धुखा दे रही है
00:17जिन्दगी की आउकात नहीं है वो सब कुछ दे पाने की जो देने का वो वादा करती है
00:26आपको जिस भी वस्त व्यक्ति विशह विचार ने कभी भी जो वादा किया हो कभी पूरा किया है
00:37किया है
00:40दुनिया में कोई चीज ऐसी नहीं जिसकी आउकातों वादा निभाने की
00:48सुर्शा है जिन्दगी राक्षसी इससे बचने का एक ही तरीका है
00:56क्या दो कोई न कोई तो मुझे ली ले गई
00:59तो निश्काम कर्म मुझे ली ले बच तो मैं सकता ही नहीं
01:03अगर अपनी आहुती सही कर्म को नहीं दूँगा तो तो राक्षसी खाजाएगी मुझे को
01:14बचने वाला तो वैसे भी नहीं हो इससे अच्छा अपनी आहुती ही दे देता हूँ
01:19इसे निश्काम कर्म कहते हैं निश्काम कर्म खूब महनत मांगता है
01:24निश्काम कर्म नहीं भी करोगे
01:28सकाम कर्म भी करोगे
01:31तो भी जिन्दगी मेहनत तो करवाएगी ही
01:36बस जिन्दगी ऐसी मेहनत करवाती है
01:40जिसमें मेहनत भी करते हो
01:43और लात भी पाते हो
01:46आम ऐसा हो कि तुम्हें पूरा का पूरा लील ले
01:51नें तो सिंदे के लिले लेगी

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