Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021

📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें:
Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks
iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866

📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
पूरा वीडियो : ऊटपटाँग अध्यात्म का गुप्त राज़ || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी दिल्ली महोत्सव (2022)
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant
#आचार्यप्रशांत

Category

📚
Learning
Transcript
00:00Enlightenment जैसा कुछ होता भी है या नहीं होता, या फिर ये सब हमें बेचा आब जा रहा है, जिसमें
00:07हमारे दुख़ दर्द बेचैनिया सब दूर हो जाएंगे.
00:11इसी को Enlightenment कहते हो ला, वो जो सब को चाहिए और हमेशा से चाहिए.
00:15Enlightenment को ही मुक्टे ब ही कहते हो.
00:16दुनिया का जर्रा जर्रा दुनिया का हर विक्ति हर शक्स आपको एनलाइटेन्मेंट ही बेच रहा है लेकिन वो फेक एनलाइटेन्मेंट
00:25है आदमी की यही तलाश उसकी चेतना के पहले दिन से है आज से लाकों साल से पहले से कुछ
00:33नया मिल जाए कुछ ऐसा मिल जाए जो म�
00:38वर्तमान स्वरूप से मुक्त दिला दे, ले दे करके मांग सभी एक ही चीज की रहे हैं, मैं जैसा हूँ,
00:45वैसा न रहूँ, कुछ और हो जाओं, यही वो धीतरी मांग है, जो की अंतिम तोर पर एनलाइटन्मेंट की मांग
00:54के रूप में प्रकट होती है, सबको वही चाहिए,
00:57लेकिन जहां खोज रहे हो, वहां नहीं मिलेगा, यह विदानत का सदा का प्रश्न है, कौन मांग रहा है, आप
01:05मुक्ते इसलिए मांगते हो, क्योंकि आपको लगता है आप बंधन में हो, तो फिर हमें इन बंधनों की जाजपड़ताल करनी
01:13है, यह बंधन क्या चीज है, कौ
01:19आपको पूरा होने से रोक दे, जो आपको बढ़ने से और आगे उड़ने से रोक दे, उसको बंधन कहते हैं,
01:28मुक्ति की खोज नहीं करनी है, बंधनों का अनुसंधान करना है, बंधन क्या है मेरे, और बंधन बाहर नहीं है,
01:37भीतर है, बाहर होई न गड़बड़, इसलि�
01:44से मिलती है ना व्यापार से मिलती है ना गुरू से मिलती है किसी से नहीं मिलती है
01:49वो तो वही मिलेगी जहां बंधन हैं अपने बंधनों को पहचानो और जिंदगी समर्पित कर दो उनसे लड़ने को
01:57उनसे काटने को, जैसे जैसे तुम स्वयम से लड़ते जाओगे, अपने बंधनों से मुक्त होते जाओगे, वैसे वैसे पाओगे कि
02:08मुक्ति की तुम्हारी मांग भी घटती जा रही है, तुम सहज होते जा रहे हो, तुम्हें बहुत जादा ये लगता
02:14ही नहीं है कि मुझे म
Comments

Recommended