00:00देश में एक भी पढ़ी लिखी लड़की थी ही नहीं। ये कितनी ज्यादा खतरनाक बात है।
00:04विश्मी शताब दीतें चौथे पाच्वेद अशक तक भी भारत में कोई गल्स स्कूल ही नहीं था।
00:10और जो फीमेल लिटरसी थी वो लगभग शूने थी।
00:15और वही जो पहला स्कूल खोला जा रहा है तो पहला स्कूल खोलने में भी जिन लोगों के स्वार्थ थे
00:21महिलाओं को अनेजुकेटेड और डिसम्पावर्ड अशक्त रखने में उन्होंने जितना जादा विरोध हो सकता था करा रिजिस्टेंस दिया मारपीट की
00:33लड़ाई �
00:34जगड़े किये, कोट केसे करें, जो कुछ भी कर सकते थे, सब कुछ नोंने करा लेकिन आज की जो लड़की
00:40है वो बिल्कुल नहीं जानती है कि जो उसको फ्रीडम आज मिली हुई है उसके लिए उसको किसके प्रति ठैंक्फुल
00:47होना है तो आज महिलाओं को अगर वो आजा
01:03फिर उसके बाद जो तिवा फुले सावितरी बाई फुले आते हैं और हम कैसे बूल सकते हैं, डॉक्टर अमबेडकर, डॉक्टर
01:17अमबेडकर, इवी आर, पेरियार, यह वो लोग थे, जिनने कहा जाना चाहिए महिलाओं के सच्चे हित्याशी सच्चे मित्र, पर बहुत
01:31कम
01:31महिलाओं को पता है कि इन ही लोगों की बदावलत, आज वो शिक्षा, संपन्नता, नौकरी, करियर, समता, न्याय, इनके फिर
01:43वो फल भोग पा रही है
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