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Transcript
00:00प्रणा माचारे जी, हम शरीर में ही चेतना है, इसका क्या सब होता है?
00:05चलो भी एक नया प्रियोग करके देखते हैं, ठीक है?
00:09कहीं दर्द हो रहा है शरीर में?
00:12बैग
00:12पीठ में दर्द हो रहा है
00:15बाकी अंगों का खयाल क्यों नहीं आ रहा है?
00:17अगर तुम शरीर हो, तो तुम्हें शरीर के सारे अंग एक साथ अनुभव होने चाहिए न?
00:24तुम्हें सिर्फ पीठ का यह अनुभव क्यों हो रहा है?
00:28इसमें पीडा है
00:29बात ये निए कि पीठ में क्या है बात ये कि पीठ में कौन सी चीज़ जो अनुभव ले रही
00:34है ये मत बोलो पीठ में पीडा है
00:36मैं कहूँगा पीठ में चेतना है तुम्हारी चेतना जागर के पीठ में चिपक गई है इसलिए पीठ का अनुभव हो
00:43रहा है
00:43तो शरीर पहले आ रहा है चेतना पहले आ रही है
00:47चेतना ही तुम्हें शरीर का एसास करा रही है न
00:51एक से एक जवान लोग जिनका शरीर बिलकुल हटा कटा है
00:55हटा ही कटा नहीं है
00:58सांड जैसा सशक्त शरीर
01:01वो क्या कर लेते हैं कई बार
01:05आत्मत्या कर लेते हैं
01:07क्यों शरीर तो अच्छा था क्या बुरी हो गई थी तो तुम्हारा पहला संबंद किस से है फिर शरीर से
01:12की चेतना से अगर शरीर से तुम्हारा पहला संबंद होता तो शरीर इतना प्यारा है सुन्दर है आकरशक है बलिष्ट
01:20है क्यों कर यात्मत्या क्योंकि तुम्हारा पह
01:35पहले क्या हो चेतना या शरीर क्या हो चेतना यह सब सवाल रोज कुछने होते हैं
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