00:00इhou बाट कोमेंट्री हो रही थी सचिन तंदुलकर के दिनों की बात वो नबय का पूरा दश्यक ही तंदुलकर का
00:05ही था
00:06तो उसमें एक भारतिय कोमेंटेर और एक बाहर के मेरे कहले जेफ्री बॉइकोट थे शयुद तो जो भारतिय सज्जन थे
00:13कोमेंटरी बॉक्स में वो इस बात पर इतरा ही जा रहे थे अगाही जा रहे थे कि देखो हमारे पास
00:17कैसा सूर्मा है वाता और मैज जिता जाता है तो
00:33इसी बात पर खुश हो रहे थे कि देखो मेरा एक बंदा कितना महान है यह तो लज्जा की बात
00:37है कि तुम्हारा सिर्फ एक बंदा महान है है कि नहीं पर हमारी जो पूरी शिक्षा है आंतरिक प्रशिक्षन है
00:43वो हीरो वर्शिप का हो चुका है हम स्वैम में विश्वास न
00:51अगर कोई बदलाव आएगा तो ऐसे भी नहीं आएगा कोई इंस्टिउशन हो बदलाव ला सकते इंस्टिउशन भी नहीं लाएगा कोई
00:56एक इंसान है जो खड़ा होगा और वो सब बदल के दिखाएगा
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