Skip to playerSkip to main content
UPSC Reservation पर Supreme Court की बड़ी टिप्पणी, क्या IAS-IPS के बच्चों को भी मिलना चाहिए आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट की इस नई और बेहद गंभीर टिप्पणी ने देश के सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे 'आरक्षण व्यवस्था' पर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी है।

About the Story:
The Supreme Court of India, during a hearing led by Justice B.V. Nagarathna, has raised a significant question regarding the continuation of reservation benefits for the next generation of well-to-do families, such as children of IAS and IPS officers.

#SupremeCourtOnReservation #UPSCReservation #CreamyLayerDebate #IndianPolitics

~PR.514~HT.408~ED.276~GR.508~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:00देश में आरक्षन को लेकर बहस कोई नई बात तो नहीं है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग जरूर है
00:05इस बार सवाल सिर्फ आरक्षन पर नहीं बलकि क्रीमी लेर और उसकी अगली पीड़ी पर उठ रहा है
00:11सोचिये, अगर किसी परिवार ने आरक्षन का फाइदा लेकर अच्छी पढ़ाई की, फिर सरकारी नौकरी हासिल की
00:18आईस आईपियस जैसे बड़े पदो तक पहुँच गया, अच्छी कमाई हुआ, अच्छा घर हुआ, समाजिक पहचान मिली, सब कुछ मिल
00:26गया
00:26तो क्या उनके बच्चों को भी उसी तरह आरक्षन मिलना चाहिए, यही सवार अब सुप्रिम कोट में भी गूंज रहा
00:33है, और इसी वजह से देश में एक नई बहश शुरू हो गई है
00:37नमस्कार, मैं हुरिचा पराचर और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:41आज हम बात करेंगे सुप्रिम कोट की उस टिपनी की, जुसने आरक्षन में वस्था को लेकर लोगों को दो हिस्सों
00:47में बांट दिया है
00:48कोई कह रहा है कि सिस्टिम की समिक्षा होनी चाहिए, तो कोई कह रहा है कि सामाज़िक भेद भावाज भी
00:55खत्म नहीं हुआ है
00:56दरसल मामला करनाटा के एक उमिद्वार से जुड़ा हुआ है
00:59उमिद्वार ने OBC आरक्षन के तहद फाइदा मांगा था, लेकिन उसे क्रीमी लेयर में मानते हुए लाव नहीं दिया गया
01:06इसके बाद मामला सुप्रिम कोट पहुँचा
01:09सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरतना ने एक एहम सवाल उठाया
01:13उन्होंने कहा कि आरक्षन का मकसद उन लोगों को आगे बढ़ाना है जो सामाजिक और श्रेक्षिनिक रूप से पिछड़े हुए
01:20है
01:20लेकिन अगर कोई परिवार पहले ही आरक्षन का लाब लेकर समाज में मजबूत स्तिती बना चुका है
01:26तो क्या अगली पीड़ी को भी उसी तरह का आरक्षन मिलता रहना चाहिए
01:30जिस्टिस नागरतना ने उदारन देते हुए कहा
01:33अगर माता पिता दोनों आयस अधिकारी हैं अच्छी सैलरी पा रहे हैं समाज में सम्मान जनक जीवान जी रहे हैं
01:40तो उनके बच्चों को पिछड़ा मान कर आरक्षन देना क्या सही है बस यहीं से बहस और तेज हो गई
01:46अब यहाँ एक बात समझना जरूरी है क्रीमी लेयर आखिर होती क्या है
01:51OBC यानि अन्य पिछड़ा वर्ग को देश में 27 प्रतिशत आरक्षन मिलता है
01:56लेकिन सरकार ने ये भी तै किया है कि सुबर्ग के आर्थिक और समाजिक रूप से
02:00मजबूत परिवार लगतार इसका लाब न लेते रहें इसलिए क्रीमी लेयर का नियम लाया गया
02:05सरल भाशा में समझें तो अगर किसी OBC परिवार की आय तय सीमा से ज्यादा है
02:11क्या माता पिता बड़े सरकारी पदों पर हैं तो उनके बच्चों को OBC का आरक्षन का फाइदा नहीं मिलता
02:16विलहाल के इंदर सरकार के मुताबिक OBC क्रीमी लेयर की सीमा आठ लाक रुपय सलाना है
02:22हलाकि ये नियम SC-ST वर्ग पर लागू नहीं होता है
02:25और यही वजह है कि सुप्रिम कोर्ट की टिपणी के बाद कई लोग प्रिश्न पूठ रहे हैं
02:31क्या भविश्य में SC-ST में भी क्रीमी लेयर पर चर्चा हो सकती है
02:36तो अब ज़रे UPSC में मिलने वाले आरक्षन को भी समझ लेते हैं
02:39UPSC यानि की सिविल सेवा परिक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिश्चित परिक्षाओं में से एक है
02:46यही से IS, IPS, IFS जैसे अधिकारी चुने जाते हैं जो देश चलाते हैं
02:51उस परिक्षा में अलग-अलग वर्गों को आरक्षन दिया जाता है
02:54ST वर्ग को 25 परिशत आरक्षन मिलता है, तो ST वर्ग को 7.5 परिशत का आरक्षन मिलता है
03:01OBC नॉन क्रिमिलियर उमिद्वारों को 27 परिशत और EWS यानि की आर्थिक रूप से कमजोर सामाने वर्ग को 10 परिशत
03:09का आरक्षन दिया जाता है
03:10इसके अलवा दिव्यांग उमिद्वारों को 4 परिशत का शैतीज आरक्षन मिलता है, सिर्फ सीटों में ही नहीं
03:16उम्र सीमा और अटेम्ट्स में भी छूट दी जाती है
03:20जनरल कैटेगरी के उमिद्वार जहां 32 साल की उम्र तक 6 अटेम्ट दे सकते हैं
03:25वही ओवी से उमिद्वारों को 35 साल तक 9 अटेम्ट्स मिलते हैं
03:29स्सी स्टी उमिद्वारों को और ज्यादा छोट दी जाती है
03:32अब सवाल यह है कि क्या आरक्षन का अस्त्री फाइदा सबसे जरूरत मन लोगों तक पहुँच रहा है
03:38या फिर कुछ मजबूत परिवार बार बार इसका लाव ले रहे हैं
03:42आरक्षन के समर्थकों का कहना है
03:44कि सिर्फ पैसा आ जाने से समाजिक भेदभाव खत्म नहीं हो जाता है
03:48आज भी कई जिखे जाती के अधार पर भेदभाव होता है
03:52इसलिए आरक्षन की जरूरत अभी बनी हुई है
03:54दूसरी तरफ कई लोग कहते हैं कि अगर कोई परिवार
03:58पीडियों से सरकारी नौकरी और सुविधाओं का लाव ले रहा है
04:01तो नए और गरीब परिवार पीछे छूट जाते हैं
04:04यानि बहस अब सिर्फ आरक्षन बना मेरिट की नहीं रही बलकि आरक्षन का लाव किसे मिलना चाहिए
04:09इस सवाल पर आकर टिक गई है
04:11सुप्रियम कोट ने अभी कोई अंतिम फैसला तो नहीं दिया है
04:15लेकिन अदालत के टिपणी ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में क्रीमी लेवर और आरक्षन पर बड़ी
04:20कानूनी और राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है
04:23और शायद यही वजह है कि ये मामला सिर्फ अदालत की चार दिवारी तक समित नहीं रहा
04:29बलकि सोशल मीडिया, कॉलेज कैंपस, कोचिंग सेंटर और राजनीतिक मंचो तक पहुंट चुका है
04:36जिसके बाद एक सवाल और भी बड़ा बना हुआ है
04:39और इसका जवाब हम आपसे लेना चाहेंगे
04:41क्या अरक्षन ववस्था में बदलाओ होना चाहिए
04:43क्या क्रीमी लेयर के नियम और सख्त होने चाहिए
04:47या फिर सामाजिक समानता के लिए मौजूदा ववस्था ज़रूरी है
04:51आप अपनी राए हमें कॉमेंट करके ज़रूर बताएं
04:54इस खबर में इतना ही लेकिन देश दुनिया की बाकी खबरों के लिए
04:56देखते रहें One India है
Comments

Recommended