00:05एक क्लास 8 की टेक्सबुक ने सुप्रीम कोट को अपना ही ओर्डर वापसेयर पर मजबूर कर दिया
00:09पूरी कॉंट्रोवर्सी शुरू हुई फेबरियर दोहसार चपपिस में
00:12जब एंसी आर्टी की नई क्लास 8 सोशल साइंस बुक में एक नया चैप्टर आया
00:18जिस में सीधा जुडिशिल करॉप्शन, 4.7 क्रोर पेंडिंग केस और जड़ शॉर्टेज को स्कूल सूरूर्स के सामने रग दिया
00:24गया
00:25सुप्रीम कोट भड़क उठी
00:26CGI सुर्यकांथ ने इसे calculated move कहा
00:29कहा कि पूरे देश के हाई कोट जड़िस परटर्ब्ड है और एक जटके में बुक पर ब्लैंकेट बैन लगा दिया
00:35गया
00:36फिजिकल कॉपी सीज डिजिटल वर्जिन्स टेकन डाउन और NCRT डिरेक्टर को शोर कॉस नोटिस सब एक साथ
00:42फिर आया मार्च 11 का वो ओर्डर जिसने तीनो अकाडेमिक्स, मिशेल दिनीनो, सुपर्णा दिवाकर और अलोग प्रस्नकुमार की प्रोफेस्टल जिन्दगी
00:50प्राक्टिकली खतम करती
00:51कोट ने कहा ये लोग डिलेबरिटी जुरिश्ट्री को बदनाम कर रहे थे और गवर्मेंट प्लस हर इंस्ट्यूशन को हुकम दिया
00:57इन्हें किसी भी अकैडमिक काम से दूर रखो
01:00एक भी सुनवाई नहीं एक भी मौका नहीं अपनी बात रखने का लेकिन ये तीनों कोई रैडिकल अक्रिविस्स नहीं थे
01:06मिशेल दिनीनो एक पदमिश्ट्री अबॉर्ड याफ्ता स्कॉलर एंसी आर्टी सोशल साइंस करकिलम कमिटी के चेर परसे
01:13जिनकी दास को साल की जिंदगी, इंडियन हिस्ट्री और सिविलाइजेशन को समझने और समझाने में गई है
01:19सुपर्णा दिवाकर, एक सीनियर एड्यूकेशनलिस्ट है, इंडियन स्कूल अव ड्यूक्मेंट मैनेजमेंट की कोफाउंडर जो नैश्ट्री एड्यूकेशन पॉलिसी यानि NEP 2020
01:28की इंप्लिमेंटेशन टास्कोर्स का हिस्सा रही है
01:31और आलोग प्रस्न कुमार एक रिस्पेक्टेड लीगल रिसर्चर है, विदी सेंटर ओव लीगल पॉलिसी के कोफाउंडर जिनकी पूरी जिन्दगी, कॉंस्टिशनल
01:38लौ और पॉलिसी रिसर्च में लगी है
01:40ये लोग क्लास्रूम्स और कोर्ट्रूम्स की बीच की खाई को पटने की कोशिश करते हैं, यही उनका काम था, यही
01:46उनकी पहचान थी
01:47और एक दिन सब कुछ बदल गया, सोचो एक बार, एक दिन आप एक reputed academic है, अपना काम रिस्पेक्टेड
01:54है, आप institutions के साथ काम करते हैं, अगर दिन Supreme Court का order आता है, जिसमें आपका नाम है
02:01और practically पूरा professional network आपसे हाथ धो लेता है
02:04कोई university engage नहीं कर सकती, कोई government project नहीं, कोई भी नहीं, senior advocate श्याम देवान ने court को
02:11बताया कि इस order के वज़े से तीनों की professional reputation and academic work को serious नक्सान पहुचा, उन्होंने अपनी
02:17बात रखने की कोशिश की, कहा कि यह chapter किसी एक का नहीं था, यह एक collective process का हिस्सा
02:23था, एक committee का काम था जिसमे
02:25कई लोग शामिल थे, उन्होंने कहा कि हमने कभी judiciary को hurt करने की नियत नहीं रखी, court ने initially
02:31एक inch नहीं दी, मार्ट से लेकर आच तक यह तीनों practically professionally frozen थे, कोई नया काम नहीं, कोई
02:38नया project नहीं, एक अजीब सी limbo में जिंदगी, और इस पूरे वक्त में एक बड़ी irony यह थी, कि
02:45ज
02:45इस chapter ने ये सब शुरू किया, उसमें लिखा था, judicial corruption, pending cases, judge shortage, ये वो चीज़े हैं
02:52जो इंडिया की हर अदालत की report में मिलती है, जो bar associations discuss करती है, जो legal scholars open
02:59ली लिखते हैं, सवाल ये था कि क्या चीज़े class 8 के बच्चों को पढ़नी चाहिए थी या नहीं, और
03:05उस सवाल का जवा
03:06आप देने की जगा, एक powerful institution ने सीधा उन लोगों को crush करने की कोशिश की, जिन्होंने वो सवाल
03:12उठाया था, आज Friday May 22, को Supreme Court ने माना, disassociation का order वापस लिया गया, bench ने officially
03:20clarify किया, कि textbook content एक collective decision था, किसी एक की जिम्मेदारी नहीं, तीन academics को relief मिली, लेकिन
03:28एक catch अभी भी है,
03:30कोट ने साथ में ये भी कहा, कि central governments और state governments अपनी मर्जी से decide कर सकते हैं,
03:37कि इन्हें engage करना है या नहीं, मतलब complete rehabilitation नहीं हुई, दाग officially हटा, लेकिन shadow अभी भी है,
03:44कौन engage करेगा, उन्हें जब कोट का वो परहाना order लोगों के जहन में अभी भी ताजा है, तो ये
03:51सिरफ एक textbook की क
03:52कहानी नहीं थी, ये उस सवाल की कहानी थी, जब एक powerful institution, खुदी judge, jury और executioner बन जाए,
03:59तो एक आम आदमी चाहे, तो कितना भी पढ़ा लिखा हो, कहां जाए, तीन academics जिनकी जिनकी जिन्दगी, ideas और
04:05education के इर्द गिर्द बनी थी, उन्होंने एक chapter लिखा, एक collective chapter और उन्हें मह
04:22को जो नुकसान हुआ, वो कोई order वापस नहीं कर सकता, revise book आना बाकी है और असकी debate अभी
04:28भी open है, क्या school students को जुडेश्री के खबरों के बारे में पढ़ना चाहिए या नहीं, लेकिन शायद उससे
04:34भी बड़ा सवाल ये है कि क्या इस देश में सच लिखना क्या इतना महंगा
04:39होना चाहिए
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