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असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के खिलाफ कथित हेट स्पीच मामले में दायर याचिका पर आज Supreme Court of India ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट भी संवैधानिक अदालत है और नागरिक पहले वहीं न्याय की गुहार लगा सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने “forum shopping” की प्रवृत्ति पर भी टिप्पणी की।

इस वीडियो में Oneindia Hindi के संवाददाता Shivendra Gaur ने इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता Vishal Singh Chandel, Advocate, Supreme Court से विस्तार से समझा है —
• Article 32 बनाम Article 226 क्या है?
• सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई से इनकार क्यों किया?
• क्या यह हिमंत बिस्वा सरमा के लिए राहत है?
• आगे कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?

पूरा कानूनी विश्लेषण जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें।


The Supreme Court of India declined to entertain a plea seeking action against Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma in an alleged hate speech matter, asking petitioners to approach the jurisdictional High Court instead.

The Court emphasized the importance of Article 226 and observed that High Courts are constitutional courts fully empowered to ensure access to justice. It also cautioned against the growing trend of bypassing High Courts and directly invoking Article 32 before the Supreme Court.

In this detailed legal explainer on Oneindia Hindi, Shivendra Gaur speaks with Vishal Singh Chandel, Advocate, Supreme Court, to understand:

• Why did the Supreme Court refuse to entertain the plea?
• What is the difference between Article 32 and Article 226?
• Does this order amount to relief for Himanta Biswa Sarma?
• What happens next legally?


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Transcript
00:02कुछ दिनों पहले उसम के चीफ मिनिस्टर के अगेंस चार पेटीशन पड़ी थी चोलो जेल जाने के लिए तैयर रहूंगा
00:08क्या करूंगा इंडिविजुल पेटीशन पड़ी हुई थी हेट स्पीच के मामले में कुछ दिन पहले उन्हेंने ट्वीटर पर एक पोस्ट
00:25किया
00:26है अपना बातों में मैं हमेशा काईम रखूंगा बंगलाडेशी का घुस पेठ्यू का हम खिलाब है और खिलाप रहेगा भारत
00:34की खंड़ता को भारत की सांती को खतरा पहुचाने के लिए ऐसा बयान इमंद्विशु सर्मा के द्वारा दिया गया है
00:39डेस में दौर है रा�
00:55खड़ी हो भी सकती है और कोट के बयानों पर हम लोग ध्यान देते हैं तो ऐसे ही आसाम के
01:00मुखमंत्री हेमंद्विश सर्मा जो ठीक योगी की तरह हैं उनका कार बिदी है और वो बहुत ज़्यादा मुखर रहते हैं
01:09बंगला देशी घुस पैटियों के दिखास तोर से उस
01:24जाने के लिए सुप्रिम कोट के वरिष्ट अद्वक्ता विशाल सिंग जी हैं सिंग साब क्या आई आज का थी और
01:31शुरू करते हैं कुछ दिनों पहले असम के चीफ मिनिस्टर के आगें चार पेटीशन पड़ी थी एक CPIM के दवारा
01:38एक चार असमी जिस्टूडेंट के द�
01:53और उसमें जो पेटीशन दाखिल हुई है उसमें कहा गया है कि बंगाली मुसल्मानों को टारगेट करके मिया सब्द का
01:59उप्योग किया गया है तो उन्होंने अरजिंट मेंजनिंग को स्विकार किया और आज के लिए मैटर को रखा था लेकिन
02:07आज जो उन्होंने ब्रदर �
02:21आप अपने कंसर्ण हाई कोट में जाए अंडर आर्टिकल 226 यह आपको कॉंस्टिटूशनल कोट है और आपको राइट है कि
02:28आप वहां जाकर हेटी स्पीच को बोताईए कि यह कैसा हेटी स्पीच है और उस पर हाई कोट जज्मेंट देगा
02:33और हाई कोट को हम इस तरीके ज
02:55कोट में बना सकते हैं कि आपके सिनियर एडवक sled से बिलोंग करते हैं तो आप मैंटर को करवा दीजिए
03:02जहां जिसका जूरिक्स है वही
03:04यह मैटर सुना जाएगा और यह असम में आप हेट स्पीच का फाइल करिए वहां से अगर कोई डिसीजन आपके
03:09खिलाप आता है तो हम बैटे हैं और कोई भी पॉलिटिकल नेता इसको इस तरीके से ने ले सकता है
03:14कि सुप्रीम कोड में कोई भी पेटिसन दाखिल कर दिया और
03:34जो तरीका है कोड आने का वो क्या आपको हाई कोड जाना चाहिए असाम के और बहां पर जो तै
03:40होगा आपने बात यहां पर महत्पूर कहीं कि जो सुप्रीम कोड अलग नहीं है और यह कांसिटूशनल कोड है इसका
03:48दरह समझाई तो कि लोग समझ में आए बार जी देखिए
03:51सुप्रीम कोड और हाई कोड इसलिए कही जाते हैं कि सीटने बी अदिकार दिये गए उसको वो प्रोटेक्ट करते हैं
03:58और जितने भी लौ बने हुए हैं सब कॉई भी लौ अगेंस दे कानूशन है तो इन्वैलिड घोसित हो जाता
04:06है जिसके लिए हमने देखा भी यूजी स
04:20किया जा सकता है और अगर किसी एक state का मामला है तो state के high court में challenge किया
04:26जाता है
04:27और मैं सबसे बड़ी बात बता दूँ कि REIT के मामले में high court को जादे power है अंडर article
04:32226 Supreme Court से
04:35क्योंकि Supreme Court जो article 32 के अंदर right देता है वो सिर्फ fundamental right को protect करता है
04:41जब कि high court जो 226 के अंदर right देता है वो पूरे constitutional right को protect करता है
04:46तो आप जब देखेंगे इनके comparison को तो high court का judiction बड़ा है Supreme Court से इस मामले में
04:52और उसी बात को दोहराते हुए honorable chief justice of India ने कहा कि आपको अगर कोई बात concern लग
04:58रही है
04:58कोई hate speech है 1901 और 1902 का कोई violation है तो आप पहले concerned high court जाईए अगर वहां
05:05से आपको relief नहीं मिलेगा तो हम यहाँ पे बैटे हुए है
05:071901 और 1902 क्या है देखे 1901 freedom of speech and expression है 92 में दिया गया है कि इसके
05:14कुछ certain limitation है
05:1692A में जो दिया गया है उसी के तहट ये लोग आया थे कि public morality को गलत हुआ है
05:21भारत की अखंडता को भारत की सांती को खतरा पहुचाने के लिए
05:24ऐसा बयान इमंत मिश्व सर्मा के दोरा दिया गया है और उसी को चैलेंज करके उनकी उस बयान को उससे
05:29टेक करके यहां पर अंडर आर्टिकल 32 एक
05:32होती है और उस को सुनते हुए अपना फैसला सुनाया जबकि इसका तरीका यह होना चाहिए था कि हाई कोट
05:43में पहले फाइल होना चाहिए था क्योंकि जूरिडिक्शनल
06:04सब्सक्राइब कर रहा है जबकि इसका सही उप्योग होना चाहिए यह तो सवाल हो गया कोट का अब पता नहीं
06:11आप देना चाहें तो जबाब दीजिए मुझे नहीं पता तुकि लेकिन जो हिमंद्विश्वर्मा की स्पीच है जिसके बात आई है
06:19आपको क्या लगता है बत
06:32करना आ गया है तब से चीजे और बड़ी हो चुकी है और मैं इसमें अपने संसत को कहना चाहूंगा
06:37कि आइटी एक्ट में अमेंडमेंट की जरूरत है आज डीप एक के लिए हमारे पास कोई ऐसा कानून नहीं है
06:42कि हम किसी को लाइबल करते कुछ सर्टेन कानून है उसी में
07:04तो इसी लिए मैं कह रहा हूँ नजरिया की बात है और यहां नफरत के लिए किया गया अगर तब
07:12तो कुछ कोड़ देख सकता है त्वीटर पी उन्होंने एक वीडियो डाला था और पोस्ट किया था जिसमें उनका कार्टून
07:17था सामने कुछ
07:18मुसलमान के लोग थे उनके तरह बंदूग करके वो दिखाया गया था कि हम किसी भी अस्तर पर ऐसे छोड़ेंगे
07:24ने जबकि उनका यह कहना था कि यह जो वीडियो और फोटो डाला गया वो मेरे द्वारा नहीं डाला गया
07:28बाद में उनके ट्विटर हैंडल से डिलीट भी
07:44वैलिड हुआ था जिसमें यह कहा गया था कि 1971 के बाद जो भी मुसलिम आये हैं उनको भारत का
07:50भाग नहीं माना जा सकता उसके पहले जो आये हैं उनको भाग माना जाएगा तो इसी पर उन्होंने कहा था
07:55कि अभी भी सीए एनर्सी को पूरी सुद्रीडता के साथ लागू कर
08:13खिलाडी के लिए किल्के खिलाडी के लिए क्रिकार फिलाड कैया होता है उसकी प्रसंसा करना ठाह कि तारीख करना लेकिन
08:20भाग पर्मिया कि
08:22कहा गया है कि इसका वो तरक देंगे कोर्ट में कि हमने इसके लिए का हमने
08:27और जब तक जैसा वागेल साभ में बताया की कानून को और ज़्यादा इसका दारा
08:31और ज्यादा इस पर नहीं शोट करके और इसको टुप तब तक तमाम जो ये फार्ब़रांड नेता है
08:37ये बोलेंगे, अपना political agenda set करेंगे
08:40और उसके बाद court में बचने के रास्ते भी इसी कानून के बीच से उसे निकलेंगे
08:45और यही साथ हिमंत विस्वर्मा के साथ होगा, यही साथ होगा, यही साथ होगा, यही दूसरे नेताओं के साथ भी
08:53होता रहेगा
09:04क्या कानून पका नहीं, क्या हेट स्पीच, उनकी राजनीते के लिए बहुत आसान दास्ता है, रोठिया सेखने का आप बता
09:10सकते हैं
09:11फिलाल इस वीडियो में इतना ही, कैमरा पर साल रजाए प्रकास के साथ, शिबेंद गौर्व, वन इंडिया, सुप्रीम कोर, दिली
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