00:11शम्शान की राख, धुएं के गुबार और चारो तरफ पसरी से सखियों के बीच अगर नन्ही बच्ची अपने हाथ में
00:19चॉकलेट लिए उसे खोलने की जद्दु जहद कर रही है तो कलेचा मुख को आता है
00:24यह द्रिशों किसी फिल्म का नहीं बलकि लखनों के बैकवन धधाम का है जहां राजनीती के दिगच मुलायम सिंग यादव
00:31के चोटे बेटे प्रतीक यादव बंच्टत में विलीन हो रहे थे
00:34एक तरफ चिता के लपटें आसमान चू रही थी और दूसरी तरफ मासूमियत अपनी दुनिया में मगने थी
00:41जिसे ये तक नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है
00:46अपना यादव की नहीं बेटी प्रत्मा शम्शान के पूर्सी पर अपने बड़े पापा यानि की अखिलीश यादव के पास बैठी
00:53थी
00:53उसके चोटे-चोटे हाथ चॉकलेट की पैकेंग को फाड़ने की कोशिश कर रहे थी लेकिन वो नाकाम रही
00:59मृत्यू के इस भीशो और सुननाटे के बीट जब शब्द भी साथ छोड़ देते हैं तब एक ताओ और भतीजी
01:05के रिष्टे की उस भावुकता ने सब का ध्यान अपनी और खीच लिया
01:09अखिली शादव जिनके चहरे पर भाई को खोने का गम साफ चलक रहा था उन्होंने देखा कि उनकी भतीजी चॉकलेट
01:16खोल नहीं पा रही
01:17उन्होंने बिना कुछ कहे बच्ची की हाथ से चॉकलेट ली उसकी पैकिंग फाड़ी और वापस उसे थमा दी
01:23ये पल जितना सरल नजर आ रहा है उससे ज़्यादा गहरा और दर्दनाख था
01:28उस वक्त शम्शान के कड़वाहट और चॉकलेट की मिठास के बीच अंतर मिठ गया
01:33मासूम बच्ची ने शायद अपनी तुतलाती सी आवाज में बड़े पापा से पूछा भी होगा
01:38इतने सारी लोग यहां क्यों है आखिर ये किस तरह का प्रोग्राम है
01:43सवाल ने अखिलीश को जाहिर तोर पर निरुत्तर कर दिया
01:46वो नहीं कह सकते कि अब आपके पिता इस दुनिया में नहीं है
01:49वो सिर्फ अपनी भतीजी को निहारते हैं शायद यहीं सूच कर
01:53कि नन्ही जान को जिंदगी की सबसे बड़ी और कड़ी सचाई बताएं तो बताएं कैसे
01:59सिवल अस्पताल में हार्ट अटेक से हुई प्रतीकी अचानक मौत ने पूरे कुनबे को जब जोर कर रख दिया
02:05बैकुंट धाम पर जब ससुर अरविंद बिश्ट ने अपने दामाद को और अपने दामाद की चिता को मुखागनी दी
02:11तो वहां मौजूद हर शक्स की आँखें बराई वो मंजर बहुत हिदय विदारक था जब मुखागनी देने के बाद एक
02:17पिता समान ससुर अपने गमचे से आंसू पोछता है
02:20हाथ जोड कर अपने दामाद को अंतिम विदाई दे रहा है
02:24अखिलीश यादव, धरमेंद्र यादव, आदित्या यादव ने भारी मन से चिता पर लख़णिया रखी
02:29अपरणा यादव अपनी दोनों बेटियों के साथ पत्थर बनी खड़ी रही
02:33राजनीती के उठापटक से दूर उस दिन वैकॉंट धाम सिर्फ एक तूटे परिवार के विलाप का गवाह था
02:39जहां एक तरफ मौत का तांडव था और दूसरी तरफ एक ताउ अपनी भतीजी की चॉकलेट पूल कर
02:45उसे ये एहसास दिलाने की कोशिश कर रहा था बले ही उसका पिता चला गया लेकिन सुरक्षा का एक हाथ
02:52आज भी उसके पास है उसके साथ है
02:55सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने ना सिर्फ लोगों को रुलाया बलके अखिलीश यादफ के साफ दिल का भी
03:01परिचे दिया
03:02ये भी बताया कि रिष्टों की करमाहट हमेशा बनी रहनी चाहिए चाहे
03:07मदभेद कितने हो चाहे अफसर कोई भी हो बहरा अकिलीश को इस वीडियो को लेकर आपकी क्या राय है कॉमेंट
03:14बॉक्स आपके लिए है अपनी टिपपड़ी महां से रूर कीजेगा मेरा नाम है मुकुन आप पने रहे वन इंडिया के
03:19साथ शुक्रिया
03:22झालोटर। पैप्सिर्ण को य्झा नुक्या ट्रिप्सटेश लूटर। घूर तबूलाटर। फोनेश्ट को ज़िए भी होड़ी आपके लूने तब यूटनूटर। प्सुक्रियो चैनापनी
03:31आपके अपके लिए।
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