00:00शुक्र वैदिक जोतिश में प्रेम, सौन्दर्य और सम्रिध्धी के अधिपती, महर्शी भ्रिगु और अपसरा काव्या के पुत्र, दैत्यों के गुरू, वानी मधुर, ग्रिष्टी करुणा में, शुक्रदेवरस, कला, संगीत और वैवाहिक सुख के सम्वाहक,
00:17व्रिषब एवं तुला राशी के स्वामी, भरणी, पूर्वा फालगुनी और पूर्वा शाढ़ा नक्षत्रों के अधिपती, शुक्रवार, जल तत्व और उत्तर दिशा से गहरा जुडार, शुब शुक्र, प्रेम में स्थिर्ता, सौन्दर्य में आकर्षन, सम्रिध्धी
00:47क्रिपा, रिदय में मधूर्ता, जीवन में सामन जस्य, आत्मा में शांती लाती है.
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