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00:07अब वो सीदे मों किसी को जवाबी नहीं देती थी
00:10उनके पती और उनका बेटा तो काम करने घर से बाहर चले जाते थे
00:15और उनकी शायरी जहलनी पड़ती थी बहु रेणु को
00:18अब सास बोलती नहीं, अर्ज करती थी
00:24संदूक पर रखी संदूक, संदूक में रखे जुमके
00:28बहु जुमके निकाल के दे मेरे, कहा लगा रही है ठुमके
00:35मा जी, जुमके तो आपके निकाल दूँगी मैं
00:39लेकिन आपके दिमाग से ये शायरी का भूत कैसे निकलेगा
00:44छोटे लोग नहीं समझेंगे, शायरी है शौक बड़ा
00:49तू अपने काम से काम रख, मेरे काम में मत टांग अड़ा
00:55शौक अलग बात है, लेकिन हर चीज में अपना शौक डाल देने से
00:59जगह साई हो सकती ये सासुमा
01:01अरे मैं हूँ एक नंबर कलाकार, कोई ऐसी वैसी बला नहीं
01:07तुम घर के कामों में उल्ची, समझोगी मेरी कला नहीं
01:13ठीक है माजी, आप नहीं समझती तो कोई बात नहीं
01:17लाओ, मैं आपके जुमके ही निकाल कर दे देती हूँ
01:21बहु सास के जुमके निकाल कर देती है
01:24और वहाँ से चली जाती है
01:25शाम को बहु अपने पती से शिकायत करती है
01:28सुनिये जी, आप मा को कुछ समझाती क्यों नहीं
01:32अरे क्या समझाना है मा को
01:34अरे अपनी शारी थोड़ी कम करे न
01:37Oh, you have to say that?
01:40Oh, I don't know. But everyone has all of us has a smile.
01:45They say that people are getting sick.
01:48But Sheila is a man who is a man.
01:51Oh, it's a job of saying that.
01:54What kind of tension you have to say about people?
01:57Oh, I've said that.
01:59Wow! Wow!
02:01Look, you have said that someone's not saying that
02:04और तुम्हारे सामने कोई मा की बुरा ही नहीं करता, तो तुमको फर्क नहीं पढ़ रहा।
02:09अरे तुम खा मखा की बात का बतंगड बना रही हो, चलो चाय बना कर ले आओ मेरे लिए, साथ
02:15दियेंगे कोई धंकी बाते करेंगे।
02:17रेणों चाय बनाने लगती है, पहले वो अपने पती को चाय देती है, फिर सास को और आखिर में अपने
02:24ससुर को, लेकिन वो देखती है कि ससुर जी कुछ परिशान से हैं।
02:31क्या हुआ ससुर जी, कोई बात हो गई है क्या?
02:35और तेरी सास बात बात पर शायरी करती है, कल मैंने पूछा कि खाना खाया, तो तेरी सास ने क्या
02:43जवाब दिया पता है?
02:46अरगलती की और आरोपी ने कोडे खा लिये फटा फट, खाना तो नहीं परपकोडे खा लिये जटा जट
02:54अब बता, क्या जवाब दूँ इस बात का?
02:59वो तो सभी से शायरी में ही बात करी है, मुझे भी समझ में नहीं आता कि क्या करूं मैं?
03:04बेटा, उसको उसी की भाषा में जवाब देना पड़ेगा, मैं तो आम बातचीत में भी उसके सामने कुछ नहीं बोल
03:12पाता, शायरी में क्या बोलूँगा भला?
03:15ससुन ने जैसी ही कहा कि उसको उसी की भाषा में जवाब देना पड़ेगा, बहु को ये बात जजज गई,
03:23अगले ही दिन वो शायरी की कुछ किताबी लेकर आई, और शायरी की प्रैक्टिस करने लगी, ताकि सास को उनी
03:29की भाषा में जवाब दे सके, उसने दिन रात एक क
03:36देख रहे थी, तब ही रेण उसक के लिए बिर्यानी बना कर लाती है, लेकिन सास को बिर्यानी भाती नहीं,
03:43कवा करता काओं काओं चिडिया बोलती चीं चीं, इतना खराब बिर्यानी बनाई है कि मुझे निकले चीं चीं, बस, इसी
03:54मौके का तो बहु को इंतजार था, क्य
04:05आईए, जैसी भी बनी है बिर्यानी चिपचाप खाईए, ससुर्ची और रेणो के पती ने रेणो का जवाब सुनते ही, जोर
04:14से ताली बजाई, और सास ने जब रेणो का शायराना जवाब सुना, तो उनके गले में बिर्यानी अटक गई, बहु
04:22ने एक और शायरी का तीर �
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