00:01शिल्पे घर की काम स्वी फ्री होती तो बोर होती जिसके बाद उसे घर में ही दुकान खुलने की सुची
00:07अरे ये इतने सारे कपड़े अरे बहू क्या करेगी इनका
00:14मा जी मैं घर में बोर होती हूँ तो सुचा सामने की कमरे में कपड़ों की दुकान खुल लो
00:20घर का काम भी हो जाएगा और चार पैसों की कमाई भी
00:25अरे वाँ वाँ ये तो बहुत इच्छी बात है
00:28मैं भी तेरी मदद कर दिया करूंगी
00:32वाँ मा जी तब तो मज़ा आ जाएगा
00:34अब हम दोनों मिलकर खुब पैसे कमाया करेंगी
00:37अब क्या था सास बहु का काम चल पड़ा
00:41एक दिन
00:43अरो राटेश की माँ सुनती हो
00:47कहां चली गई भूख के मारे पेट में चुहे पूद रहे है
00:52अरे नंदिनी कहा हो भूख लग रही है
00:57पापा का है माँ
01:00पता नहीं बेटा पूख लग रही है आज तो किसे ने चाय भी नहीं पूछी
01:04तब ही सास बहु घर के अंदर धीर सारे सामान के साथ आती है
01:09और वो भी हस्ती हुई
01:12अरे मा बहु ये तो बड़ी अच्छी मार्केट दिखाई तुने
01:15बाही सुस्ता सामान था
01:18हाँ मा जी और ये सामान हम डबल पैसों में बेचेंगे
01:22मज़ा आजाएगा
01:24अरे बहु भूख लग रही है कुछ खाने को दे दे
01:28मा क्या बात है आज किसे ने पापा को चाय भी नहीं दी
01:33अरे बेटा अब 40 साल में तेरे पापा ने क्या चाय बनाना भी नहीं सिखा
01:38अरे बेटा रहने दे अब इस वहस को
01:41तुम लोगों ने वैसे बनाया क्या है
01:43बहु परिशान हो जाती है और सास को अकेले में लेकर जाती है
01:50माजी आज तो हम लोगों ने खाना ही नहीं बनाया
01:53अरे बेटा बाहर के छोले भटूरों से पेट इतना भर गया
01:57कि याद ही नहीं रहा कि घर में ये लोग भी है खाना खाने के लिए
02:00अब क्या किया जाए
02:03तभी घर में एक महिला आती है
02:05जी वो सुना है आप लोगों के यहाँ साड़ी बिक्ती है सरा दिखाएंगे क्या
02:12हाँ हाँ क्यों नहीं
02:13माजी आप इने साड़ी दिखाएए मैं तब तक पिता जी और इनके लिए खाने का इंतिजाम करती हूँ
02:19सास उस औरत को लेकर सामने वाले कमरे में चली जाती है जहां उन लोगोंने दुकान खुली थी
02:26वहीं बहु भी किचिन में चली जाती है
02:28अब इतनी जल्दी क्या बनाओं पापाजी तो खाने के लिए भी बैट गया है
02:34आइडिया मैं खाना बाहर से ही आउडर कर दीती हूँ
02:38थोड़ी दिर में खाना आ जाता है और बहु टेबल पर खाना लगा देती है
02:42ए भगवान कितनी करने दाल बनाई है पेटा
02:47नहीं नहीं पेटाजी वो
02:49क्या बात है नंदनी रोटी तो चबाई ही नहीं जा रही है लग रहा है रबड खा रहा हूँ
02:56एक तो इतने महंगे होटर से खाना मंगवाया और वो भी इन लोगों को पसंद नहीं आया
03:00तब ही सास नोट गिंती हुई पहर आती है
03:04बाँ माजी बड़ी कमाई हुई लगती है
03:08हाँ मैंने वो दो हजार वाली साड़ी तीन हजार में पेश दी
03:13अरे बाँ माजी
03:16दोनों सास बहु बहुत खुश हो जाती है
03:21मेरे पेट में ना बेटा जोर का दर्द हो रहा है
03:26अरे मा, क्या हुआ, पेट में दर्ट, बाहर का कुछ खाय था क्या, मैदा तो नहीं खा लिया
03:34मैंने छोले भटूरे खाये थे
03:38मा क्यूं खाये, आपको तो पता है कि आपको मैदा सूट नहीं करता
03:45चलिए, मा को डॉक्टर की पास ले जाते हैं
03:48तभी अंदर से पापा की आवाज आती है, ए बगवाद, मेरा तो पेट खराब हो गया
03:55सब पिताजी के पास जाते हैं, पिताजी, आपको क्या हुआ, खाना बासी था शायद
04:05अरे पिताजी, नंदनी जानती है कि बासी खाने से आपकी तवित खराब हो जाती है
04:09तो वो ऐसा क्यों देगी, है ना नंदनी
04:14वो वो खाना मैंने बाहर से ओर्डर किया था
04:17मैं और मा दुकान का सामान लेने गए थी
04:20इसलिए खाना नहीं बना पाए
04:23क्या, नंदनी दुकान के चटकर में
04:25तुमने तो सारे घर का हाल भिगार रखा है
04:27चलो, अब मा और पापा को लेकर अस्पिताल चलते है
04:32अस्पिताल में जाने पर डॉक्टर कहती है
04:34हाँ, हाँ, इन दोनों को तो एक दिन के लिए अड्मिट करना पड़ेगा
04:40क्या, क्यों, पेटी तो खराब है ना
04:44हाँ, तो घर लई जाईए ना
04:46अगर लग रहा है कि कोई बड़ी बात नहीं है
04:48और हमसे पैसा कमाने के लिए इन लोगों को एड्मिट कर रहा है
04:53नर्स, जरा इन लोगों को बिल तो देते ना
04:57ही ही ही ही, चलिए, मैं आप लोगों को पैकेट समझा देती हूँ
05:03जब बहु की हाथ में बिल आता है
05:05ही भगवान, साथ हजार रुपे, इतना तो मैंने कमाया भी ना था
05:12अब समझ गई कि कमाय की चेकर में घर की लोगों की सिर्थ के साथ मैं खिलवाट कर रही थी
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