00:01foreign
00:13foreign
00:14foreign
00:14foreign
00:15प्रफ्सर निलूरो मेत्रा जी, प्रफ्सर प्रकास अंतल जी, सभागार में उपस्थित, पुर्व पुलिसमानिदेशक श्रीयसोगमान जी, पदम्ष्री श्रीयस्पी वर्मा जी,
00:36पदम्ष्री स्री जीतेंदु घंपुरी जी, पदम्ष्री स्री ललित मंगोत्रा जी, पदम्ष्री रमालू राम जी,
00:48विश्विद द्यले परिवार के सभी संबानी सदस्य, प्रसासन के हमारे सवयोगी देवियो सज्ञणोर मित्रो,
01:01गूंज 2026 के अद्वितिय महोत्सों के उल्गाटन समारोह में उपस्थित होना मेरी निश्चित रूप से 70% काविस है
01:14मैं इस समारोह से जुड़े जमू विश्विद्याले के सभी प्राध्यापकों का सभी साथियों का विनिदन करना चाहता हूँ
01:26दोगरी में कहा जाता है कि मेहनत दी मिट्टी सुगंद देवे आसा फूल बन खिलन आजदा बीज जे बोईे कल
01:36सुग दे फल मिलन
01:39मेहनत की मिट्टी ही कुश्बू देती है तथा हमारी आसाएं हमारे सपने फूल बन कर खिलते हैं
01:48हमें सदेव इस बात को ध्यान रखना होगा असमरन रखना होगा कि अगर आज हम बीज बोईेंगे तो कल हमें
01:56सुख के फल जरूर मिलेंगे
01:58इसलिए गूँज महोसो उजल भविसे के लिए मुझे लगता है कि एक बीज की तरह है गूँज कोई सरकारी आयोजन
02:07नहीं है बलकि यह उद्सव है ग्यान का सरजन सीज़ता का सांस्कृतिक समनवे का
02:15यह विविद रंगों से सजी एक जीवन्त काथा बन सकती है गूँज को एक ऐसे प्लेटफार्म के रूप में भी
02:22मैं देखता हूँ जो इस बात को प्रमानित करता है कि जब युवाओं की उर्जा को सही दिसाथ और सही
02:30आउसर मिलता है तो साधारन शन भी और साधारन उप
02:35लब्धियों में तब्दील हो जाता है मुझे पूरा भरोसा है कि वाओर्जा का या संगम सभी विद्यार्थियों और जंबू संभाग
02:43के उच्चे सिक्षा के सभी संस्थानों दोनों को अपने स्रिष्टतम स्वरूप को प्रस्तूत करने का आउसर प्रदान करेगा साहित
02:54की गंभीरता हो कला की व्यक्ति हो विद्वता नौलेज के नए आयाम में एक्स्प्रोर करने की जिक्यासा हो या खेल
03:03के मैदान की दर्दा हर एक शेतर में युवा उर्जा को उतकर्स का उसर मिलेगा और मैं समझता हूं कि
03:10हर एक डिसिप्लिन में स्टूडिन्स की भागीद
03:24होसों में स्टूडिन्स की टैलेंस, समर्पन और अनुसासन एक संदेज भी दे सकेंगे कि युवा सक्ति में समाज और रास्ट
03:34के भविश्य की दिशा देने की असीम छमता नहीं थे अगर युवा अपने होसले की लो जला ले और मन
03:42में विश्वास रखकर कदम आगे बढ�
03:46पल समाज और देश के लिए नए रास्टे बनते ही हैं हमारी संस्कृती में कहा गया नित्यम सोधर में इस्थिता
03:54हस्यात मनुस्य को अपने कर्तब्य पर सदा इस्थिर रहना चाहिए यानि दृता से कर्तब्य का पालन ही जीवन की सबसे
04:03बड़ी मर्यादा है यह भाव अज
04:15इसी सिक्षा प्रदान की जाए जो केवल बहुत धिक प्रगती तक्सीमित नहों बलकि उनके व्यक्तितों के समग्र विकास को अपना
04:25धेव बना सकी है और इसलिए क्रियेटिविटी और कॉलेबरेशन पराधारीतिय अगूँज ट्वेंटी ट्वेंटी ट्वेंटी सिक्स म
04:38रूप एक संदेश देगा कि एजुकेशन का उद्यश केवल ग्यानार जन नहीं बलकि समवे तंसील जागरूप और उत्तरदाई नागरिकों का
04:49निर्मान भी है एक बाद संदेश ये भी है कि एजुकेशनल कैंपस में स्टूडेंट्स केवल करिकुलम समाप्त करने और डि
05:08और उसके द्वारा साहस के साथ समाज की प्रगति में सक्रिय सा भागी बनने के लिए भी आते हैं
05:14Robert Frost कि एक कविता है उसकी चंदलाईने में उद्रत करना चाहूंगा
05:20I shall be telling this with a sigh, somewhere edges and edges hints, two roads diverged the north and I,
05:29I took the one less traveled by and that has made all the difference
05:36एक जंगल में दो रास्ते अलग-अलग दिसाओं में जा रहे थे
05:41मैंने वो रास्ता चुना जिस पर कम लोग चले थे
05:45और उसी से सब कुछ बदल गया, इसलिए मैं मानता हूं कि एजुकेशन का मतलब यह नहीं है
05:52that you can find your own way
06:22and new ideas.
06:25I've been looking for many years
06:26to this talk about the fact that
06:30the future of the future of the future
06:32has been the most difficult
06:36to do the future.
06:37I've seen the past two, three years
06:40in technology explosion
06:41the educational institutions
06:43and industry
06:45both of them
06:46and the future
06:47I've seen some of them
06:50पढ़ रहा था और उस समचार में था कि विश्व की एक बड़ी मानी यानी कमपनी उसने अपने आडिट कमपनी
06:58को कहा कि भाई तुम आडिट का बिल कम करने का प्रयास जल्दी से जल्दी करो नहीं तो हम इसके
07:07लिए भी टेक्नालजी की सेवा लेना सुरू करेंगे अब एक �
07:11देड़ साल पहले इस तरह की बात हम सबके कलपना से परे थी और इसलिए मैं इन्वरस्टीज को निरंतर इस
07:18बात के लिए निवेदन करता रहता हूं कि कैमपस को नए आइडियाज का manufacturing हब हम कैसे बना सकते हैं
07:26करिकुलम से ज्यादा इस बात का प्रयास होना चाहिए कि अल�
07:34असरूं का हरेक लेक्षर नई सामभावनाओं को जन्म दे जम्मू इन्वरस्टी इस दिशा में परिवर्तन का नेतर तो कर रही
07:43है और मैं समझता हूं कि design your own degree cross-disciplinary को system, innovation, culture, startup यात्रा के अलावा
07:53गूंच जेसे आवजन ने युवा कलपना को स्वर दिया है तता साहित्य, खे
08:00के अनुसासन ने मिलकर एक ऐसा वातावन निर्मित करने में सहयोग किया है जहां उतिक्रिस्टता किसी दबाओ से नहीं बलकि
08:10प्रेरणा से जन्म ले रही है मैं इसे ट्रडिशन और इनोवेशन दोनों का एक बहत खुबसूरत संतुलन भी मानता हूं
08:19युवाओं को भी सद
08:30ऐसे अन्प्रेडिक्टिबल वर्ल्ड में यह संतुलन बड़ा निवारी होगा सभी स्टूडिन्स को स्वभाविक रूप से इनोवेशन के महत्व नए रिसर्च
08:40की आवस्यक्ता को स्वीकार करना चाहिए नए प्रियोग करने की का होसला रखना चाहिए और रास निर्मान क
08:48संभावनाओं के नए द्वार खोड़ने का भी साहस रखना चाहिए इस दिस्टिकोंड से गूंज महोत्सवक मैं एक महत्वपूर आउसर के
08:57रूप में देखता हूँ जो क्यूरियासिटी, क्रियेटिविटी और रिसेप्टिविटी ये तीनों का अधूत संगम साबित हो स
09:18देखता है अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में आयोजित एई इंपक्ट समिट में भारत के अधरनी प्रथानमंतरी शरी नरेंदर मोदी
09:29जी ने ग्लोबल एई एको सिस्टम को आकार देने के लिए भारत के विजन को प्रस्तुत किया और उन्हें इस
09:36बात पर विशेश बल द
09:37या कि हमें मौरल और इथिकल सिस्टम डेवलप करने होंगे और एक्सेसिबल और इंक्लूजिव यह कैसे बना सकते हैं इस
09:48पर विशेश रूप से ध्यान देना होगा यह काम एजुकेशनल इंस्टूशन से ही सुरू हो सकता है मेरा मानना है
09:55कि हायर एजुकेशनल इंस्टू
10:07युवल अकेले नहीं गड़ सकता और इसलिए इंटर डिसिप्रिय एजुकेशन और इस तरह के आयोजन युवामन को एक बहतर मार्ग
10:17दिखाते हैं कठोप निशद में हमारे पूरवजों ने कहा कि स्रेयस्च प्रेयस्च मनुस्यमेत तौसंपतिय विवनिमक्ति भीर धीर
10:28अर्थात बुद्धिमान व्यक्ति के सामने स्रेय यानी सही और प्रेय यानी सुखत दोनों मार्ग आते हैं लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति स्रेय
10:38मार्ग का चैन करता है क्योंकि वह तातकालिक सुख की जगध चिनोतियों से भरे सही रास्ते को ही चुनना चाहता
10:46है
10:46युवा मित्रो आज मैं आप से अपनी संस्कृति को और सुदर्ड बनाने का भी आवहन करना चाहता हूँ
10:54हमारी संस्कृति को इंदर जीव धरोहर नहीं है
10:57जिसे केवल अस्मृति चिन्ह की वाग हम सुरक्षित रखे
11:01तो एक जीवन परंपरा है जो निरंतर प्रवाहित होती रहनी चाहिए
11:05हम सब का दाईत है केवल अपनी जणों को जानाना नहीं
11:10बलकि उन मुल्यों को वरतमान और भविसे के संदर्व में सार्थक बनाये रखना भी
11:16ये हमारा सबसे बड़ा उत्तर दाईत है
11:19इसके लिए अपनी परंपराओं और अतीत का सम्मान करना हमें सीखना होगा
11:24मैं समझता हूँ कि जब भी युवा चेतना अपनी सांस्कृतिक जणों से जुड़ती है
11:29तब वो अन्ना के वल अपनी पहचान को गहराई से समझ पाती है
11:33बलकि उनमें आत्मविश्वास और आत्मवोध बिक्सित होता है
11:38जो किसी क्लासरूम में नहीं मिल सकता
11:41जब मुकस्मीर जैसे विविटा से भरे कंदर सासित परदेश में
11:46नौजवान विद्यार्थियों को सांस्कृतिक समवाद का सेथ बनाने की जरूरत है
11:51इस बात को हमेशा याद रखें कि विविटा में ही समाज की असली सकती जागर्थ होती है
11:57अब इसलिए भिन परमपराओं और दृस्टिकोनों से परचित होकर
12:02आपको एक व्यापक दृस्टिकोन विविख्षित करना होगा
12:05और गूँज जैसे एविजन के जरिये संस्कृति को संडख्षित और आने वाली पीड़ियों के लिए
12:12उसे और सम्मर्द बनाना होगा
12:14अंत में मैं अपनी बात समाप्त करने से पहले कहना चाहता हूँ
12:19कि गूँज का अंती मुद्दे से क्या होना चाहिए
12:22मुझे लगता है जब आप इशार करेंगे
12:25तो मेरी राए से सहमत होंगे
12:27कि इसका अंती मुद्दे से तो रास्त निर्माण ही है
12:31और रास्त के वल नीतियों से नहीं बनते
12:33बलकि वह capable human resource से बनते है
12:37इसलिए आप जैसे नौजवान students
12:39रास्त निर्माण की सबसे प्रभावसाली शक्ती है
12:42और आप ही समाज के मुल्यों और विकास को आकार देने वाले
12:47मैं सभी युवाविद्यार्थियों का वाहन करते हुए
12:51कहना चाहता हूं कि इतिहास उन लोगों ने रचा है
12:54जिनोंने अपने भीतर की छमता को पहचाना है
12:58और साहस पुरवक उसे अभिव्यक्त भी किया है
13:01आपके वल्भविसे के निर्माता नहीं है
13:04बलकि आप वरतमान के शण के भी पत्परदर्सक है
13:07आपके भीतर असीम सामर्थ है
13:10आप आगे बढ़िए और ऐसी राह चुनिए
13:13जो आपके टीचर्स, गुरुजन के सिखाये आदर्सों के योग्य हो
13:18और उस यात्रा में आपका योगदान
13:20मानो कल्यान को समर्पित हो
13:22ये मेरी आप से अपेच्छा है
13:24अंत में दो पक्तियका के अपनी बात खतम करूंगा
13:29कि सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
13:38सभी हैं भीड में तुम भी निकल सको तो चलो
13:42सभी हैं भीड में तुम भी निकल सको तो चलो
13:46बहुत अधन्यवाद जैहिल जैभर
13:54You
Comments