00:00लंका की उस रात हवा भी काम पर रही थी क्योंकि मरित्यू चलकर रावन के महल की ओर आ रही थी
00:06असोक बाटिका से लोडते समय हनुमान जी ने जान भुजकर खुद को बंदी बना लिया
00:12रावन के दरवार में जब उस बाना ने आँख उठा कर देखा तो कुछ पल के लिए लंकेश्वर का हरिद्य थमसा गया
00:20हनुमान बोले नहीं बस मुस्कुराए और बही मुस्कान बविश्य के बिनाश की पहली आहट थी
00:26रावन धाड़ा इसकी पूश में आग लगा दो जैसे ही आग जली अकाश लाल हो गया दर्ती कांप उठी और लंका की दिवारों से चींखों की गूझ टकराने लगी
00:38जल्ती पूश के साथ हनुमान लंका की शट्टों पर कूदे जहां पैर रखा बहां आग जनम लेती गे
00:45सोने की लंका शम्शान में बदनने लगी यह आग नहीं थी यह रावन के पापों का परकोप था
00:52जब अधरम सीमा पार करता है तो बगवान चेताबनी नहीं देते बिनाश बेशते है यह कहानी सिर्फ आग की नहीं यह अधरम के अंत की कहानी है
01:03हनुमान जी की वे मुसकान जो रावन के बिनाश का सकेत थी अंत तक जरूर देखे जै शिजराम जै महाबीर हनुमान
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