00:00बगवान गरूर और अमरित की परिक्षा देवताओं का अमरित भी एक बाद सिर्फ हिम्मत और संकलुप के आगे हार गया था प्रानिकाल में बगवान गरूर की माता बनीता को दास्ता में बान दिया गया शर्त रखेगी अगर तुम सवर्ग से अमरत लासों को तभी आ जात
00:30सिर्फ एक सोच मा की अजादी से बड़ा कुछ नहीं बगवान इंदर ने भी पूशा तुम अमरित क्यूं चाहते हो तो गरूर जी बोले खुद के लिए नहीं करतब्बे के लिए इंदर जी चकीत रहे गे और अमरित गरूर के हाथों में आ गया इस कहानी से एक बात सीख
01:00तो इंसान देवताव से बड़ा बन जाता है
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