00:00कभी सोचा है बगवान सबसे ज़्यादा किसकी प्रिक्षा लेते है जो हार मानने वाला नहीं होता
00:05प्राचिन काल में एक साधारन लकड हारा था गरीब ठका हुआ लेकिन सच्चा एक दिन उसने बगवान से कहा है प्रबू हर दिन मेहनत करता हूं फिर भी जीवन नहीं बदलता क्यूं तबी अकास से अवा जाई कल सुबे पहाड पर जाना और जो दिखे उसे उठाना अगली
00:35का भड़ता कै एक दिन करोद में उसने पत्थर जमीर पर फैंका और पत्थर तूट गया अंदर से सोना निकला उसी सन अवाज आई जिस बोज से तुम भागते हो उसी के अंदर तुमारी किसमत शूपी होती है अगर आज जिन्दगी भारी लग रही है तो समझ लो भगव
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