00:00कई बचारे जो दिल के अच्छे लोग हैं, वोड़ी सत्भावना रखते हैं, वो भी सोचते हैं, एंसान जंगल काटता जा रहा है, कमर्शलाइशन वड़ता रहा है, ऐसे ही चलता रहा है, तो उसको आगे प्रोजेक्ट करते हैं, कहते हैं, कि फिर तो सब जंगल कट जाएं�
00:30में नहीं कर रहा है, तो हमें सहूलियत मिल जा रही है, उसको इग्नोर करने ही, नहीं तो वो जो कॉलाप्स है, वो तो प्रतिव देन आगे बढ़ ही रहा है, दो हजार पचास में, माने आज से पचीस साल बात, दुनिया वैसी नहीं रहने वाली है, जैसी आप आज देख �
01:00जबर्दस पढ़ने वादिए, और दो हजार पचास के बाद तो उस करव का जो शेप होगा, वो तो सिर्फ प्रक्रति जानती है, उसकी तो कल्पना करना भी मुश्किल है कि दो हजार पचास के बाद क्या होगा, हम जो एकोनोमिक लॉस के, या हुमन लॉस के, या अग्रिक
01:30तुम कहारो उसकी कमर्शिलाजेशन बढ़ जायागा, यह जो बनी हुही मारते हैं, रिस्डेंशल कंप्लेक्सेज हैं, इंफरस्ट्रॉक्चर है, रिजॉर्ट्स, होटेल्स हैं, यह सब हैं, तुम को खाली पड़ा पाओगे, क्योंकि इन में शॉपिंग करने के लिए लि
02:00उसके काओगा और चारो तरफ इमारते हैं, इमारते हैं और यही सब खड़ा होगा, तो आप बलत सोच रहे हैं, प्रक्रते होने नहीं देगी, वह तब नहीं होगा, लेकिन प्रक्रते इन्सान की हर्कतें, रोकने के लिए इन्सान को जंड बहुत बढ़ा देने वाली है, �
02:30झाल झाल
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