00:00आप छोटे होंगे, सब कहानियां पढ़ते होंगे, गांधी जी कहीं जा रहे थे, जहां जा रहे थे, वहां पता नहीं क्या था, तांगा था, कुछ भेजना था, किसी ने भेजा नहीं, तो पैदली भग लिए, जब पैदली भग लिए, देख रहे हैं अपना घड़ी में, �
00:30पैटी नहीं बन सकती, तो ये आश्रम भी नहीं चलेगा, निकलो सब यहां से, और मैं भी निकल जाओंगा, अगर ये हरिजन लड़की यहां नहीं आ सकती, तो फिर हैं कोई नहीं आ सकता, ये तो छोड़ो कि बाहर वालों की विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे, अपने ही �
01:00को जो भी ठीक लगता था, उसको जीते थे, जो भी ठीक लगता था उस पर अड़ते थे, बड़ी बात है, ये वेदान्त जैसी बात हो गई है, इतना तो कर सकता हूं, रोक नहीं सकता, कुछ हो रहा है गलत उसको रोक नहीं सकता, तो कम सकम उसको सहयोग देना बंद करूँ
01:30झाल झाल
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