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ये वीडियो 18th दिसंबर, 2025 को पटना(बिहार) में हुए सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00हम सब जो बिहार के यूथ है लगबग जो यहाँ पे गवर्मेंट इग्जाम की तयारी कर रहे हैं
00:05हम लोग जब अपने 20s, 30s में तयारी कर रहे थे उस तो में इतना education system इतना updated नहीं था जितना अभी options है
00:14हमारे parents के भी मन में वही है चाहे लड़की हो चाहे लड़का गवर्मेंट इग्जाम की तयारी करो
00:19बिहार UP में कर रेलेटिव यह ज़ादा है और इसकी चकर में यहां के उतसर बहुत टाइम अपना वेस्ट कर चुके है
00:26और हमारे पास कोई options भी नहीं है
00:29कोई options नहीं है बड़ी मजबूरी है
00:31आप कैसी बाते कर रहे हो आपको क्या इमांदारी से यह नहीं पूछना चाहिए
00:36कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दूसरे विकल्प हैं
00:40पर हमारे दिमाग में कुछ ऐसा बैठा है जो उन दूसरे विकल्पों को स्विकार नहीं करना चाहता
00:45बेटियों के बाप कितने बैठे हैं यहां पर जिन्होंने शादी कियों
00:50शादी की तो दहेश तो दिये ही है
00:52क्या मिलता है ऐसा सरकारी नौकरी में मुझे नहीं मालूम
00:56पुत्रियों के सब पिता लोग बताएं
00:59पर यह तो सब बेटियों के जो बाप बैठे हैं वो कह रहे हैं बात दहेश की भी है
01:05बात टेबल के नीचे से जो घूस मिलती है उसकी भी है
01:09बिल्कुल आप जो बात कह रहे हैं उसमें सच्चाई होगी
01:13पर मेरा काम है उसमें जितना जूट है उसको हटाना
01:16जब हवाओं में ये फैल गया हो
01:18कि जिन्दगी के मज़े तो इसमें है
01:21कि सरकारी गाडियों और एक टांग बाहर निकाल के उसमें बैठे हैं
01:26और किसी अविकसित कस्बे में बिल्कुल धूम बशा रहे हैं
01:30चोड दिखा रहे हैं और जिसको चाहते हैं उसी को डंडा जमा देते हैं
01:33मैं आज जहां रुका हुआ हूँ उसके पास में ही मौल है एक
01:37तो पैदा ली गया अपना
01:38देखने के लिए कि मौरे बिहार की हालत क्या है अच्छा लगा
01:43वहाँ पे मुझे लोग दिखाई दिया जो कैफे में बैठे हुए लैपटॉप पे काम कर रहे हैं
01:47मैं किताबों की दुकान में गया वहाँ पर मैंने कुछ देर बात भी करी लोगों से
01:51अच्छा लगा कि लोग किताबे पढ़ने के लिए उत्सुक हैं
01:54उसी के सामने में बहुत सारी अशिक्षा गरीवी भी देख रहा था वह अच्छा नहीं लग रहा था
01:58तो वहाँ मौल से में पैदली वापस लौट रहा था
02:00ऐसे ही साधारन कपड़े पैदली
02:03पहले निकली एक लैंड क्रूजर होटल के अंदर
02:06उसके बाद निकली फॉर्चूनर उसके बाद निकली इनोवा
02:10और धंधना के जंग जंग जंग बिलकुल ऐसे चूते हुए मुझे निकल रहे हैं
02:14इन्होंने मुझे मार नहीं दिया यह बड़ी बात है
02:16कोई निता जी थे
02:18अब ये सब मेहनत की नौकरी आंतिपिनर्शिप या प्राइवेट में कहां मिलेगा
02:24और यही संसकार बन गए हो
02:27यही जीवन का आदर्श बन गया हो
02:30कि ऐसे हो जाए बिलकुल की जलवा रहे हमारा
02:32गाड़ी निकले बिलकुल दंदनाती होई
02:34साहरन बजाती हुई
02:35और सब आते जातो को ठोक दो गिरा दो
02:37धमका दो कम से कम डर के रहे और ऐसे करें
02:40अरे अरे अरे अरे बड़े बाबू है
02:42सरकारी आदमी है या नेता है
02:43अगर यही उच्चतम आदर्श बन गया हो किसी स्थान का
02:47तो वो जगह प्रगती कैसे करेगी
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