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Transcript
00:00वे राम घर में देखें
00:01पच्छा सुबह उठता है, तो तु प्या देखने को मिलता है
00:04सुबह सुबह कि-श्वाइ पीव लगा दियो rahज रोता है
00:07कि शुबह सुबह की श् size इन घृती तुप मांने होती है
00:10na खटबर शुरू ही थिए होती है
00:10चिम्टे बजरह होते हैं, कढ़ाई बजरह होती है, सुबह सुबह गा नाश्ता तो उसकी खटपट और उसमें से वो जो सुबह सुबह गी की खुश्बू उठ रही होती है, कोई से ला रहा है कि मैं बासरूम में हूँ, मुझे तौलिया नहीं मिल रहा है, यही तब तो होता
00:40है और यह है, कि प्रक्रती में लीं हो गया है हर तरफ से जाके प्रक्रथी से जुड़ गया, बोले था काटो कहां से काटो
00:46यह लोई यह ऑग है पिन थे आटा हो रहा है, सुनो
00:52तो किया रहा रहा वारता गया हुनिया, मैं दो पहले ही प्रप्रतिस्ट हूँ
00:54तो एक और निगल पड़ा पीछे, फोटा वाला इसके, आओ
00:57जैसे देख रहे हैं
00:59जो देखो वहाँ आदे छुप कि आप देख रहे हैं
01:02विटा आना तो भी पड़ेगा
01:06तो यह चाहें हिरन हो कि एतना विशाल वरिक्षा यह हो, यह हमें कहां अपने घरों में देखने को मिलेगा
01:14जब यह देखने को नहीं मलेंगे तो फिर धान का महाल भी नहीं बनेगा
01:18जो सुमते हैं, उनसे मैं खासकर कह रहा हूँ
01:21अपने महौल को बदलने से धरो मत जहां भी हो बाहर निकलोगा आपका महौल ही अगर अंधेरे से और पुराने धर्रों से भरा हुआ है तो आप नए नहीं हो पाऊगे
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