00:00आप थोड़ा सा याद करिएगा, 60-70 के दशक के जो अभिनेता और अभिनेतरी थे, वो कैसे लगते थे, दिखने में, आप राज का पूरुव याद करिए, आप संजीव कुमार को याद करिए, कैसे लगते थे, और परिपक को लगते थे, जैसे इनोंने गोला भी अंकल टा�
00:30पर जो बॉलिवूड वाले हैं, आज के सफल हीरो, हीरो, इन ये दिखने में कैसे लगते हैं, एन फॉर, निबबा, वो पैतीस साल का भी होगा, पर आप उसको देखोगे, तो आप कहोगी अल्पुद्धी है, इसके मूँपे लिखा हुए अल्पुद्धी है, ये खोपड
01:0012 साल वाला आपको समझ ही नहीं पाएगा, आपको क्या लगता है, क्यों ऐसा हो रहा है कि PR ही सब कुछ हो गया है, दिल्ली की सत्ता पर कौन बैठेगा, ये भी इसी से निर्धारित हो रहा है, कि ज्यादा अच्छा PR कैंपेन कौन चला ले रहा है, इसको आप PR कहते हैं, उस
01:30तो इसी लिए राजनीती में भी ऐसा मुकाम आ गया है, जहां जो ज्यादा अच्छा PR करेगा सत्ता उसके हाथ में रहेगी, अगर लोग ज्यादा विक्सित होतें चेतना से, तो PR का इतना महत तो नहीं रह जाता, एक बहुत कमजोर सी पीड़ी हमारे सामने खड़ी हो रही
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