00:00मेरा एक बेटा है 16 साल का, उसको जब हम लोग आध्यात्म की तरफ कुछ बुक्स और देना चाहते हैं, तो हमारे पेरेंट्स कहते हैं कि अभी तो उम्र इसकी बहुत बाकी है, क्यों इस चीज में लगा के लेगो?
00:11आप एक काम करिए, आप अपने पेरेंट्स को दीजिए, बुलिए कि मेरे बच्चे की तो अभी उम्र नहीं है, आप ही के मताबिक, आप की तो है? आप ही बता रहे हैं ना, आपका तो लग गया ना वानप्रस्त, आप तो पढ़ो कम से कम, आप पढ़े होते तो आज इस प्र
00:41हमसे, बुलिए, उपनिशदों में जो शिष्य होते हैं, वो सब 90-90 साल के होते हैं, मरने को तैयार, और जब बिलकुल बेहोश हैं और हाँ कर रहे हैं, कि जब पूरी जिंदगी बरबाद हो जाए, एकदम जिंदगी खतम कर लो, मौका मिला था जीने का, जर्म को सार्थक क
01:11तब गीता चूना, जब पता ही न चले कि गीता है कि फीता है कि क्या है, तब कहो कि हाँ, फिर आधाश लोक पढ़ो, बेहोश हो जाओ, कोई दोश भी नहीं देगा, सबसे आवश्यक ज्ञान है, उसको पूरा जन्म गवाने के बाद पाया जाए, कोई तुक बनता है,
01:41कि दो कि ऑग icon हम लोक एग, तुक बनता है, बेह तो है, जब पगरावी नहीं कैने है, नहीं चे मद quest कि हीता है,
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