00:00मेरी एक फ्रेंड का, उसकी शादी हुई उसके घर में, उसकी भावी हाउस वाइव थी, और वो वर्किंग थी, उसमें होता गया था, उसकी भावी हर दिन अपनी सास को तेल लगाती थी सर, जो मेरी फ्रेंड है वो दिन बर आफिस से कड़के शाम में घर आती थी, और उसको
00:30साहन भूते नहीं मिलनी चाहिए
00:31और एक बात याद रखिएगा
00:33कोई किसी के सामने दबना
00:35मन्जूर नहीं करता
00:36हमेशा सौधा किया जाता है
00:39अगर कोई किसी से दब रहा है
00:41तो सिर्फ एक बज़ा होगी
00:42जिससे दब रहा है उससे
00:45कोई स्वार्थ पूरा कर रहा है
00:47नहीं तो कोई नहीं दबेगा
00:48कुछ न कुछ पाने का लालच है
00:51तभी दब रहे हो
00:52आप कोई स्वार्थ का सौधा कर रहे हो
00:54और उसको मजबूरी का नाम दे रहे हो
00:56इसके अलावा आप कुछ भी बोल दोगी
00:59विवश हूँ, helpless हूँ, मजबूर हूँ
01:01आप जूट बोल रहे हो
01:02यह ताने खाना, दब जाना, जुक जाना
01:05तलवों में तेल लगाना
01:08यह किस कोटी की बाते हैं
01:11और क्यों इन्हें जहिलना पड़ रहा है
01:12और मैं कह रहा हूँ तलवों में नहीं
01:14पूरे शरीर में तेल लगाओ
01:16बेशक लगाओ
01:18लेकिन प्रेम से लगाओ
01:20मजबूरी से नहीं
01:21मजबूर करोगे तो एक बूंद पानी भी नहीं देंगे
01:24हाँ, प्यार में अपनी जान भी दे देंगे
01:28प्रेम, कर्तब्वे, धर्म
01:30ये बड़े उचे शब्द है
01:31और इनका संबंद सोतंत्रता से
01:34जो सोतंत्र होता है
01:36वही प्रेम कर सकता है
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