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ये वीडियो 31.07.2022 के वेदांत महोत्सव सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00हर कोई आपको सुनता है और हर पंथ में हर मजहब में ये साधी होती है और हर मजहब में लड़की जो है वो ससुराल जाती है
00:11तो ऐसा क्या सोलूशन हो सकता है कि किसी भी बेटी को पराया न समझा जाए
00:17बेटी को विदा करना ये हर जगह पाया जाता है तो बात इसकी नहीं है कि तुहारे पास धर्म क्या है बात इसकी है कि इंसान कोई भी हो कहीं का भी हो किसी युक का हो वृत्ति तो उसकी भी है माया भी ना अब जाओ प्राचीन काल में तब ये था कि भाई जब कमाने वाला �
00:47प्राज में तरह तरही हो जाएगी तो ये बात तब शायद वैध भी थी कि पुरुष अपनी जगह रहे और विवा हो रहा है तो इस तरी उसके पास आएगी सोचो तुमने क्या किया होता पुरुष है वहां पे उसका खेत है वही काम करता है तुमने कहा दिया होता नहीं �
01:17पुर्जा के आधिक के कारण बनी थी वो सब परंपराएं अब समाप की जा सकती है कि लड़की को पराया मानो और उसे घर से विदा करो आप जीवन भर अपनी लड़की को अपने घर रख सकते हैं और ये बात पूरी तरह धार्मिक है इसमें कोई अधर्म नहीं हो गया ल�
01:47तुमने ही पैदा किया है और कहते हो कि प्रेम है तुमारी बेटी है काय को उसको फेकने को तयार बैठे हो उसको शही शिक्षा दो शही पालन कोशड दो अगर वो तयार है आपके घर में रहने को तो उसे घर में ससम्मान रखो संभावना यही है कि बेटे से ज्यादा काम �
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