00:00दो घरों की जीनत, नया अंदाज
00:02एक महले में दो घर आमने सामने थे
00:05पहला घर बहुत शानदार, उंची दिवारें, खुबसूरत लाइट्स हर वक्त सजा सजाया
00:11दूसरा घर सादा छोटा सा परसुकून
00:14इन दोनों घरों में दो औरतें रहती थी
00:17रहना और सयदा
00:19रहना का घर जाहरी शान
00:22रहना के घर में दाखिल हों तो लगता था जैसे होटल का लाबी हो
00:27हर चीज बरांडिड हर कमरा सजा हुआ मगर
00:31हर कमरे से तलखी की आवाजें आती थी
00:34कहीं सास बहु पर नाराज
00:37कहीं शोहर बीवी से बदमिजाजी से बात करता
00:41कहीं बच्चे एक दूसरे से लड़ रहे होते
00:44घर चमकता था मगर चहरे बुझे हुए थे
00:47सयदा का घर बातिनी शान
00:50सयदा का घर बहुत सादा था
00:53पुराने सोफे सादा बरतन छोटा किचन
00:56मगर घर में दाखिल होते ही महसूस होता
01:00यहां बहुत प्यार है
01:02खांदान के लोग एक दूसरे का ख्याल रखते
01:06सीधी बात करते नाराजी भी महबबत से करते
01:09खाना कम हो तो सब मिल कर बांट लेते
01:13फरनीचर कम था मगर खुशियां ज्यादा थी
01:16एक दिन
01:18रहना ने अपनी खिड़की से देखा
01:20कि सयधा के घर में सब एक साथ बैठ कर हंस रहे है
01:23वो सोच में पढ़ गई
01:26मेरे पास सब कुछ है
01:28फिर भी दिल खाली क्यों है
01:30वो पहली बार खुद चल कर सयधा के घर गई
01:34सयधा ने मुस्करा कर कहा
01:37आओ बहन
01:38हमारे सादा घर में सिर्फ दो चीजें ज्यादा है
01:42महबबत और शुकर
01:43रहना ने आहिस्ता से कहा
01:46बस यही तो मेरे घर में कम है
01:49सबक
01:50घर की जीनत महंगे पर दे आफरनीचर नहीं
01:54घर वालों का अच्छा अखलाक है
01:56जिस घर में दिल नर्म हों
01:59वहां अल्ला की रहमत उतरती है
02:00और जहां दिल सख्त हो
02:03वहां सोने की दिवारें भी सुकून नहीं दे सकती
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