00:00This is a great spirit, a dream of a dream.
00:11It was a bad day.
00:25This story was a good night.
00:28बिल्कुल वही जहां आईशा ने अपने अखरी रातें गुजारी थी
00:33वो डाइरी पर उंगली फेरता हुआ बोला
00:37काश एक बार और कह पाता के मैं तुम से नाराज नहीं था
00:42सुफ़ा खोली तो सबसे उपर एक जुमला लिखा था
00:46अगर कभी मैं चली जाओं तो याद रखना
00:49महब्बत कभी नाराज नहीं होती बस इंतिजार करती है
00:53इन अलफाज ने एहमद का सीना जैसे चीर दिया
00:56अचानक इसकी यादों में वापस वो दिन आया जब इसने गुसे में आकर आईशा को घर से भेज दिया था
01:03आईशा ने सिर्फ इतना पूछा था
01:06एहमद में ने किया गलत किया और एहमद ने बगएर सुने जवाब दिया
01:10तुम चली जाओ
01:11मुझे कुछ वक्त चाहिए
01:14वक्त
01:15जो कभी वापस नहीं आता
01:18डायरी की अगली लाइन पढ़ते हुए इसकी आँखें भीग गएं
01:22मैं जानती हूँ वो वक्त इसके गुसे का नहीं इसके खौफ का था
01:26लोग गुसा दिखाते हैं क्यूंकि वो दिल में तूटे होते हैं
01:31मैं इसका इंतिजार करूंगी
01:32अखरी सांस तक
01:34अहमद ने डायरी सीने से लगा ली
01:37आईशा
01:39मैं तूटा हुआ नहीं था मैं बस अना में बंद था
01:42और तुम
01:44तुम मुझे समझती थी
01:46खिलकी के बाहर बारिश और तेज हो गई
01:49जैसे आसमान भी इसके गम को महसूस कर रहा हो
01:53डायरी के आखिर में एक छूटी सी तस्वीर लगी थी
01:57दोनों की शादी वाले दिन की
01:58नीचे एक अखरी पैगाम
02:01अगर मुझे कभी दोबारा मौका मिला
02:04तो मैं इसे बताऊंगी के महबत कभी सवाल नहीं करती
02:07बस साथ देती है
02:08चाहे अखरी सांस तक ही क्यों ना हो
02:11एहमद तूट गया
02:13जिन्दगी में पहली बार इसे एसास हुआ
02:16कि कुछ लोगों की कमी कभी पूरी नहीं होती
02:18और कुछ लफस
02:20कभी वापस नहीं आते
02:22इसने आस्मान की तरफ देखकर आहिस्ता से कहा
02:26आईशा
02:28तुमने अखरी सांस तक मेरा साथ दिया
02:31और में
02:32तुम्हें अखरी बार भी ना रोक सका
02:34रात की खामोशी में बारिश रुक गई
02:37मगर एहमद के अंदर की बारिश कभी नहीं रुकी
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