00:00University
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00:03کی ایک مروف
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00:19کچھ
00:19نیا
00:19اور
00:20थोड़ा खुफनाक लग रहा था, बड़ी इमारतें, नए चेहरे, मुश्किल कोर्सिज.
00:25हाजिम अक्सर लाइबरेरी में बैट कर देर तक पढ़ता रहता.
00:29इसी दोरान इसकी मुलाकात आलिया से हुई, जो कलास की सबसे समझदार तालबा समझी जाती थी.
00:35दोनों अक्सर एक ही, मेज पर बैट जाते पहले खामोशी में फिर आहिस्ता आहिस्ता बातों में.
00:42एक दिन युनिवर्सिटी में प्रोजेक्ट प्रेजन्टेशन थी, हाजिम हमेशा से पबलिक सपीकिंग से घबराता था.
00:50इसने आलिया से कहा, मुझे तो लगता है कि मैं सब के सामने बोल ही नहीं पाऊंगा.
00:56आलिया मुस्करा कर बोली, हाजिम, डर से एक कदम आगे बढ़ने का नाम ही कामियाबी है. मैं तुम्हारे साथ हूँ.
01:05इस दिन हाजिम ने पूरी कलास के सामने शांदार प्रेजन्टेशन दी. इसकी आवाज कामती जरूर थी, मगर जजबा मजबूत था. जब प्रेजन्टेशन खत्म हुई तो सब ने तालीब जाई और प्रोफेसर ने इसे समिस्टर की बहतरीन प्रेजन्टेशन करार दिया
01:35और खड़े अपने वालिदेन को देखा, उनकी आखों में खुशी के आंसू थे. इस दिन हाजिम को एहसास हुआ कि युनिवरसिटी सिर्फ तालीम का नाम नहीं, ये वो जगह है जहां इनसान खुद को पहचानता है, अपने डर को हरता है और कभी कभार. अपनी जिन्द�
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