00:00एक जमिनदार की कहानी
00:01एक गाउ में हाजी अब्दल्ला नाम का एक जमिनदार रहता था.
00:07इसके पास वसी जमीने सैक्रों मवेशी और दर्जनों किसान काम करते थे.
00:12दौलत की कमीना थी मगर एक चीज गायब थी, दिल का सुकून.
00:16दौलत के बावजूद बेचेनी.
00:30एक दिन बारिश के बाद वो अपनी खेतों का चक्कर लगा रहा था.
00:34इसने देखा कि इसके मजदूर उन्ची गिली मिटी में कमजोर जूतियां पहने काम कर रहे हैं,
00:39जबकि वो खुद बहतरीन जूते च्छत्री और घोड़े के साथ आया था.
00:43अचानक एक मजदूर फिसल कर गिर गया.
00:47इसने हाथ उठा कर कहा,
00:49मालिक, इनसान भी तो खेत की तरह होता है.
00:54अगर इसे वक्त पर देख भाल ना मिले तो खुश्क हो जाता है.
00:58ये जुमला सीधा हाजी अब्दूल्ला के दिल पर लगा.
01:01बदलाओ का आगाज.
01:03इस रात वो देर तक जागा रहा.
01:06अपनी जिन्दगी, अपनी दौलत और अपने मजदूरों के हालाथ सोचता रहा.
01:11दिल ने पहली बार कहा,
01:13अब्दूल्ला,
01:15खेत सिर्फ फसलों से नहीं चलते, इनसानों से भी चलते हैं.
01:19अगले दिन इसने सब मजदूरों को बुलाया.
01:22कहा,
01:24आज से तुम सिर्फ मेरे लिए काम करने वाले लोग नहीं मेरे अपने हो.
01:28तुम्हारे बच्चों की तालीम में में मदद करूंगा,
01:31तुम्हारी उजरत दुगनी होगी,
01:32और हर साल तुम्हारे लिए कपरों और राशन का बंदोबस्त भी मेरा होगा.
01:37मजदूरों की आँखों में खुशी देख कर उसका दिल कई बरस बाद हलका हुआ.
01:42जमीन का असल वारिस.
01:45वक्त गुजरता गया.
01:47मजदूर पहले से ज्यादा दिल जान से काम करने लगे.
01:51फसले पहले से बहतर होने लगे.
01:54गाउवाले हाजी अब्दुल्ला का नाम एहतराम से लेने लगे.
01:57एक दिन इसका बेटा पूछने लगा.
02:00अबबा, आप इतने खुश क्यों रहते हैं?
02:04हाजी अब्दुल्ला मुस्करा कर बोला.
02:07बेटा, जमीने इनसान को अमीर जरूर करती है.
02:12मगर दिल इनसानों की खिद्मत से अमीर होता है.
02:15और जो दिल से अमीर हो जाए इससे बड़ी कोई दौलत नहीं.
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