00:00पता कौन आया था तेरे कम्रे में
00:07जबान क्यों बंध है तेरी बताती क्यों नहीं कौन था वो बदमाश
00:14मैं समझे नहीं आप किस के बारे में पूछ रहे हैं
00:19सुल्या भीया कैसी भोली बनती है ऐसा तिरिया चरित
00:25मैं अच्छी तरह जानता हूं इस किचाची को अपने आखों से देखाया हूं अगर वो इतनी तेजा तो यह क्या कम होगी
00:31मैंने बड़ी भूल की जो इस पाप की गश्डी को यह उठा लाया वहीं छोड़ाता तो अच्छा था
00:36मैं सच कहती हूं मैं बिल्कुल दोश हूं आप आप क्या पूछने हैं मैं बिल्कुल नहीं जनती हूं
00:42अपने प्रेमी को कमरे में बुला के और फिर भूली बनती हूं आज से इस घर में तू रहेगी या मैं
00:47अगर तुमने यह घर छोड़ा तो मैं जहर खाके मर जाओंगी तुम सब बात कुटा जी को बता दो जैसा ओ कहें वैसा करना
00:58मैं मैं सच कहती हूं
01:05प्रेमी उसका आशक आशक आज से इस घर में मैं रहूंगा याद की वो बहू
01:31क्या बात उसके कमरे में उसको मिलने उसका प्रेमी उसका आशक
01:35मैं ने और जम्ना ने अपनी आखों से देखा है अगर बचलन इस घर में रहेगी तो मैं कहीं और चला जोंगा यह मेरा आखरी फैसला है
01:42पेटा
02:00मैं जानता हूं कि तुम्रे रदोश हो लेकिन मेरी इस्थ खांदान की आपरू और ठाकुर मांचें की पगड़ी की आँ आज तुम ही बचा सकती हो
02:10तुम मेरी इस्थ खांदान की आपरू और ठाकुर मांचें की पगड़ी की आँ आज तुम ही बचा सकती हो
02:24तुम मेरी बहु ही नहीं बेटी भी हो बोलो बेटी तुम अपने बुडे बाप को निराश तो नहीं लोटा होगी
02:38आप मेरी पिता समान है आपकी आज्या का पालन करना मेरा धर्म है
02:45मुझे तुम से यही उमीद थी लेकिन मेरी बेटी ने मुझे इस काबल नहीं रखा
02:52कि मैं तुम्हे कोई आज्या देशकूँ
02:56मैं तुमसे भीग मनता हूं अपनी इस्थ की भीग
03:04अगर मेरी आपर लुट गए तो मैं जिन्दा नहीं रह सकूँगा
03:10आप कहना क्या चाहते हैं पिता जी
03:14मुझे कहते हुए शर्माती कि जमना अपना दोश तुमारे सर डाल रही है
03:24यह सब जानते हुए भी किसी और के सामने ये बात मैं अपनी सुभान तर नहीं आ सकता
03:32अपने बेटे के सामने भी नहीं दरता हुए कि कहीं वो जोश में आखर अपने बेहन का हून न कर दे
03:44और सारा काम न जान जाए कि ठाकुरमान सिंग की बेटी बचल
03:56बात इतनी भैल गई है कि उसका दबाना मुश्किल है
04:08बेटी क्या तुम निर्दोश होते हुए भी ये खलंक अपने उपर ले सकती हूँ
04:18मैं तुमसे बहुत बड़ी कुर्बानी मांग रहा बेटी
04:23जो दुनिया की तारीख में आज तक किसी बहुन अपनी सुस्राल की इज़त बचाने के लिए नहीं दी
04:30मेरी पगड़ी तुम्हारे कदमों में तुमसे ठोकर भी मार सकती हूँ और मेरे सर पर भी रख सकती हूँ
04:46मेरे प्राइब नहीं दी जुमसे एक रहा बचाने के लिए नहीं तुमसे रहा हूँ
04:58कर दो खंड बाई खंड नार्ण कर दो झाए जा थां
05:20कर दो आसर कर दो यार्ण
05:23बेटी, तुमने मेरी लाज रख ली
05:29लेकिन बचलन बहु को भी तो आप अपने खर में नहीं रख सकते
05:36तुम थोड़े दिन के लिए अपने चचा के हैं चली जाओ
05:43बात जंडी हो गई, तो मैं खुद तुमें ले आओ
05:49जी अच्छा
05:52एक वादा और करो बटी के राज हमारे और तुम्हारे दर्म्यान ही रहे
06:02जी अच्छा, कब जाना होगा?
06:10सुबह, मेरे आद में तुम्हें पहुचा आएगा
06:18पेदाजी, एक बार उनके पहच हो सकती हूँ
06:28शायद तुम्हारा पती नमाने, मेठी
06:32यह सिबर क्यों उता रहे हैं, इन्हें अपने साथ लेती जाओ
06:40यह सिबर क्यों उता रहे हैं, इन्हें अपने साथ लेती जाओ
06:52इन कांटों को अब बदन पर रखने की हिम्मत नहीं मुझे
06:56अगर तक पही वापस ले आई, तो फिर पहन लोगी
07:01तुम किसी देवी कावदार हो, बटी
07:05मुझे अपने पाउँ छो रहना तू
07:09इमें कदमों बैठकर तो रो लेती
07:14अरी, लीला, चैची
07:20अरी, बदन पर गहने क्यों नहीं? इस तरह जाते ही, लोट क्यों है अकली?
07:28मेरे लिए उनके घर में जगह नहीं
07:31तो मेरे घर मेजए नहीं तेरे लिए
07:33राम राम तरके तुझे अपने गले से उताराता है तो फिर आगई मरने के लिए या
07:37यहां तुझे अपने घर से निकाल दिया, क्या?
07:41क्यो?
07:44क्या बात हो यह भया?
07:46जी हम क्या छोटे मुझे बड़ी बात करें?
07:48हाँ हाँ कहो ना
07:49सुनने में आया है के
07:51बहु के कमरे में रात को एक आदमी
07:53यह जूट है, यह बिल्कुल जूट है जाजी
07:55यह बात होगी, बड़ना ठाकुरों का सिर्फ फिराता
07:57कल बया कर ले गए और आज घर से निकाल दिया
08:00विल्या आपी दे ना?
08:02हाँ आ गई, अकेली नहीं
08:04साथ कलंक लेकर बड़नानी के सावगात लेकर
08:07नहीं नहीं चाची, मुझ पर एदबार करो
08:09नार कुछ नहीं बता सकती
08:11मेरे पाउको हाथ ना लगा, तो आपी लड़ी
08:13चली दे यहां से
08:15मैं तहाँ जाँ जाँ चाची, मुझ पर तरस खाओ
08:18मुझे अपनी दासी समझ के यहां रख लो
08:21तुझे घर में रख लो, मेरी अपनी बेटी जवान है
08:23इसका रिष्टा बया करना है
08:25तुझे कलंकनी को रख कर सारी उमर के लिए इसे भी चाची
08:28यह भी अच्छा हुआ कि तेरा बात भी घर में नहीं है
08:30नहीं तो इस बचलन के सूरत देकर आतम हर्ट्या करनेता, समझी
08:33ऐसा नहीं को हो, चाची ऐसा नहीं
08:35मैं बचलनी में बिल्कुल बेगुना
08:37किसी लिए ऐसातरा हाल मैं तुझे जगाह नहीं मिली
08:40चल निकले आठ
08:43अरवान के लिए मुझे यूना दूर करो, चाची
08:45ख़परदाद को यह चाची कहा
08:47चाची मैं कहा जाँ चाची, मैं नहीं जानती
08:49अपने पत्री के साथ आदारमांग से आ, तो खुला हमेरा दर्वासा, नहीं तो बंद।
08:59अब मैं उन्हें कहां से लाओं।
09:01अब क्या हुतना है बहुजी।
09:05क्या बताँ।
09:07ये कलंक लेकर तुम्हें भगवान के पास भी नहीं जाए।
09:10बहुजी, हुकम हो तो जरा बैलों को खोल गो, बैचारे ठग गये, और हम लोग कुछ खा पिया।
09:20हाँ हाँ भीया।
09:21आपने तो कल से पानी का घूर तक नहीं पिया। हुकम हो तो कुछ लियाू।
09:25नहीं भीया, मुझे कोई इच्छा नहीं।
09:27तम लोग चाओ।
09:28चलो भाई।
09:29आप चलो
09:44कहां से आ रही हो बेहन।
09:47रामपू से
09:49कौन जाथ हो।
09:51ठाकुर।
09:52क्या नाम है तुम्हारा।
09:55लीला।
09:56प्या ही हो यह कमारी।
10:02क्या बताऊ।
10:03माबाप हैं।
10:06फिर रामपूर में कौन है तुम्हारा?
10:08चाचा चाची।
10:10क्या नाम है उनके।
10:12यह सब क्यों कूशे है।
10:14हमारी वहां रिष्टेदारी है, इसलिए बताऊना।
10:17अधाल मैं?
10:18चाचा का नाम बिक्रम सिंग, चाची का रंगिली बाई.
10:21बिक्रम सिंग और रंगिली बाई.
10:28तब तुम्हें तुम्हारी मामी लगती हूँ?
10:30मेरा तु कोई मामा नहीं.
10:32कोई मामा नहीं?
10:34बहला तुम्हारे बाप का क्या नाम है?
10:36विर सिंग.
10:38और मांका दुर्गा अरे फिर तो मैं तेरी फिल को सगी मामी लगती हूँ
10:43तो यही बेहना मैं तरे मामा को बुला के लाती हूँ
10:45अच्छा
10:58जी ओ, मैंने गहाँ
11:02क्या, क्या, क्या, क्या
11:04क्या
11:08क्या अच्छा
11:13कहा एको
11:15बाहर बैठी है बैल गारी में
11:18तो जाके मेरी पगड़ी कोट छोड़ी लेया
11:20पूरा मामा बनके जाओ उसके सामने
11:22अच्छा
11:23लीला
11:29मेरे बहन के निशाद
11:32अरे तु मुझे कैसे परचान हैगी
11:36सौरा स्वरूत दे आए
11:38अपनी बहन को याद करके
11:40अभर बेटी तु घवराम
11:44उतरा
11:46जब तु पैदा नहीं हुई थी
11:48उससे पहले ही तुरे बाद से मेरा जगड़ा आता
11:52इसलिए आस तक आनी जाना नहीं हुआ
11:54पर अब तुससे क्या बहर बेटी
11:58बेटी
12:00उतरा बेटी चल घर चल
12:06आज़ा बेटी तु घवरान नहीं बेटी
12:12बेटी
12:14उतरा बेटी
12:16यह आंसु को लोग दिखावा थोड़ा ही है
12:18क्यों जी
12:20मुझसे इस तो मैं कुछ नहीं कहा जाता है
12:24जी उतरा बेटी
12:26उतरा बेटी
12:28अज़ा मामा को और ना रूला
12:30मुझे क्या मालम था कि यह दिन देखना पर लागा
12:32मुझे
12:34बस बेटी
12:36मेरे नसीबों में तो रूना ही लिखा है
12:38कल बया ही गई थी
12:40आज उजड़ करा देए
12:42उन्होंने तुझे घर से क्यों निकाल दिया
12:44दान बहेज कम था
12:46या बारात की खातिर में कमी रही
12:48दोनों ही बाते थी
12:50मकमल में टाट का पैवन कौन रगाता
12:52अपनी हसियत से बड़े घर में लड़की ब्याने का यही नतीजा निकलता है
12:58पर रंगीली बाई और उसके मर्द की अकल को क्या हो गया था
13:02क्या पत्थर पढ़ गये थे उनकी समझ पर
13:04उनका भी क्या दूश
13:06अभागन का भाग कौन सुधाता
13:08गाड़ी में बैठी बैठी यही सोच देती के कहां जाओं तुम आसरा दो तो यहीं पड़ी रहो
13:14मेरे सरांखों पर बेटी अंधा क्या मांगे दो आंगी
13:18शरूल बाई अब उठो चूला चाहा दो भाईलों की आने का वक्त हो गया है
13:22कोई और में माना रहे हैं नहीं बेटी यहीं के अंधे लूले लंग्रे अपाहिज है यह उन्हीं की वस्ती है
13:28मैं उनका खाना पका दिया करती हूं हम दोनों मिया बीवी से जो कुछ बंद पड़ता है कर देते हैं सेवा विचारों की
13:35यह तो बड़ा पुर्ण काम है चलो मैं भी तुम्हारा हाथ बटाती है इस यह में इसे भी ले जाओ काम काजमी जी लेगा रहेगा चाब बटी
13:46कर दो
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