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► Synopsis
सहारा (1958)” एक भावनात्मक पारिवारिक फिल्म है जिसमें एक युवक अपने जीवन में रिश्तों, प्यार और जिम्मेदारियों के बीच फँस जाता है। कहानी एक ऐसी माँ और बेटे की है जो समाज की सच्चाई और रिश्तों की परख से गुज़रते हैं। जब प्यार और परिवार के बीच टकराव होता है, तब हर किरदार का असली चेहरा सामने आता है।

► Credits
Film: Sahara (1958) | सहारा
Film cast: M Rajan, Meena Kumari, Kuldip Kaur, Kanhaiya Lal, Kammo, Meena Kumari Leela Mishra
Singer: Aarti Mukherji, Hemant Kumar, Lata Mangeshkar, Sudha Malhotra
Lyricist: Bharat Vyas
Music Director: Hemant Kumar
Film Director: Lekhraj Bakshi

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Transcript
00:00पता कौन आया था तेरे कम्रे में
00:07जबान क्यों बंध है तेरी बताती क्यों नहीं कौन था वो बदमाश
00:14मैं समझे नहीं आप किस के बारे में पूछ रहे हैं
00:19सुल्या भीया कैसी भोली बनती है ऐसा तिरिया चरित
00:25मैं अच्छी तरह जानता हूं इस किचाची को अपने आखों से देखाया हूं अगर वो इतनी तेजा तो यह क्या कम होगी
00:31मैंने बड़ी भूल की जो इस पाप की गश्डी को यह उठा लाया वहीं छोड़ाता तो अच्छा था
00:36मैं सच कहती हूं मैं बिल्कुल दोश हूं आप आप क्या पूछने हैं मैं बिल्कुल नहीं जनती हूं
00:42अपने प्रेमी को कमरे में बुला के और फिर भूली बनती हूं आज से इस घर में तू रहेगी या मैं
00:47अगर तुमने यह घर छोड़ा तो मैं जहर खाके मर जाओंगी तुम सब बात कुटा जी को बता दो जैसा ओ कहें वैसा करना
00:58मैं मैं सच कहती हूं
01:05प्रेमी उसका आशक आशक आज से इस घर में मैं रहूंगा याद की वो बहू
01:31क्या बात उसके कमरे में उसको मिलने उसका प्रेमी उसका आशक
01:35मैं ने और जम्ना ने अपनी आखों से देखा है अगर बचलन इस घर में रहेगी तो मैं कहीं और चला जोंगा यह मेरा आखरी फैसला है
01:42पेटा
02:00मैं जानता हूं कि तुम्रे रदोश हो लेकिन मेरी इस्थ खांदान की आपरू और ठाकुर मांचें की पगड़ी की आँ आज तुम ही बचा सकती हो
02:10तुम मेरी इस्थ खांदान की आपरू और ठाकुर मांचें की पगड़ी की आँ आज तुम ही बचा सकती हो
02:24तुम मेरी बहु ही नहीं बेटी भी हो बोलो बेटी तुम अपने बुडे बाप को निराश तो नहीं लोटा होगी
02:38आप मेरी पिता समान है आपकी आज्या का पालन करना मेरा धर्म है
02:45मुझे तुम से यही उमीद थी लेकिन मेरी बेटी ने मुझे इस काबल नहीं रखा
02:52कि मैं तुम्हे कोई आज्या देशकूँ
02:56मैं तुमसे भीग मनता हूं अपनी इस्थ की भीग
03:04अगर मेरी आपर लुट गए तो मैं जिन्दा नहीं रह सकूँगा
03:10आप कहना क्या चाहते हैं पिता जी
03:14मुझे कहते हुए शर्माती कि जमना अपना दोश तुमारे सर डाल रही है
03:24यह सब जानते हुए भी किसी और के सामने ये बात मैं अपनी सुभान तर नहीं आ सकता
03:32अपने बेटे के सामने भी नहीं दरता हुए कि कहीं वो जोश में आखर अपने बेहन का हून न कर दे
03:44और सारा काम न जान जाए कि ठाकुरमान सिंग की बेटी बचल
03:56बात इतनी भैल गई है कि उसका दबाना मुश्किल है
04:08बेटी क्या तुम निर्दोश होते हुए भी ये खलंक अपने उपर ले सकती हूँ
04:18मैं तुमसे बहुत बड़ी कुर्बानी मांग रहा बेटी
04:23जो दुनिया की तारीख में आज तक किसी बहुन अपनी सुस्राल की इज़त बचाने के लिए नहीं दी
04:30मेरी पगड़ी तुम्हारे कदमों में तुमसे ठोकर भी मार सकती हूँ और मेरे सर पर भी रख सकती हूँ
04:46मेरे प्राइब नहीं दी जुमसे एक रहा बचाने के लिए नहीं तुमसे रहा हूँ
04:58कर दो खंड बाई खंड नार्ण कर दो झाए जा थां
05:20कर दो आसर कर दो यार्ण
05:23बेटी, तुमने मेरी लाज रख ली
05:29लेकिन बचलन बहु को भी तो आप अपने खर में नहीं रख सकते
05:36तुम थोड़े दिन के लिए अपने चचा के हैं चली जाओ
05:43बात जंडी हो गई, तो मैं खुद तुमें ले आओ
05:49जी अच्छा
05:52एक वादा और करो बटी के राज हमारे और तुम्हारे दर्म्यान ही रहे
06:02जी अच्छा, कब जाना होगा?
06:10सुबह, मेरे आद में तुम्हें पहुचा आएगा
06:18पेदाजी, एक बार उनके पहच हो सकती हूँ
06:28शायद तुम्हारा पती नमाने, मेठी
06:32यह सिबर क्यों उता रहे हैं, इन्हें अपने साथ लेती जाओ
06:40यह सिबर क्यों उता रहे हैं, इन्हें अपने साथ लेती जाओ
06:52इन कांटों को अब बदन पर रखने की हिम्मत नहीं मुझे
06:56अगर तक पही वापस ले आई, तो फिर पहन लोगी
07:01तुम किसी देवी कावदार हो, बटी
07:05मुझे अपने पाउँ छो रहना तू
07:09इमें कदमों बैठकर तो रो लेती
07:14अरी, लीला, चैची
07:20अरी, बदन पर गहने क्यों नहीं? इस तरह जाते ही, लोट क्यों है अकली?
07:28मेरे लिए उनके घर में जगह नहीं
07:31तो मेरे घर मेजए नहीं तेरे लिए
07:33राम राम तरके तुझे अपने गले से उताराता है तो फिर आगई मरने के लिए या
07:37यहां तुझे अपने घर से निकाल दिया, क्या?
07:41क्यो?
07:44क्या बात हो यह भया?
07:46जी हम क्या छोटे मुझे बड़ी बात करें?
07:48हाँ हाँ कहो ना
07:49सुनने में आया है के
07:51बहु के कमरे में रात को एक आदमी
07:53यह जूट है, यह बिल्कुल जूट है जाजी
07:55यह बात होगी, बड़ना ठाकुरों का सिर्फ फिराता
07:57कल बया कर ले गए और आज घर से निकाल दिया
08:00विल्या आपी दे ना?
08:02हाँ आ गई, अकेली नहीं
08:04साथ कलंक लेकर बड़नानी के सावगात लेकर
08:07नहीं नहीं चाची, मुझ पर एदबार करो
08:09नार कुछ नहीं बता सकती
08:11मेरे पाउको हाथ ना लगा, तो आपी लड़ी
08:13चली दे यहां से
08:15मैं तहाँ जाँ जाँ चाची, मुझ पर तरस खाओ
08:18मुझे अपनी दासी समझ के यहां रख लो
08:21तुझे घर में रख लो, मेरी अपनी बेटी जवान है
08:23इसका रिष्टा बया करना है
08:25तुझे कलंकनी को रख कर सारी उमर के लिए इसे भी चाची
08:28यह भी अच्छा हुआ कि तेरा बात भी घर में नहीं है
08:30नहीं तो इस बचलन के सूरत देकर आतम हर्ट्या करनेता, समझी
08:33ऐसा नहीं को हो, चाची ऐसा नहीं
08:35मैं बचलनी में बिल्कुल बेगुना
08:37किसी लिए ऐसातरा हाल मैं तुझे जगाह नहीं मिली
08:40चल निकले आठ
08:43अरवान के लिए मुझे यूना दूर करो, चाची
08:45ख़परदाद को यह चाची कहा
08:47चाची मैं कहा जाँ चाची, मैं नहीं जानती
08:49अपने पत्री के साथ आदारमांग से आ, तो खुला हमेरा दर्वासा, नहीं तो बंद।
08:59अब मैं उन्हें कहां से लाओं।
09:01अब क्या हुतना है बहुजी।
09:05क्या बताँ।
09:07ये कलंक लेकर तुम्हें भगवान के पास भी नहीं जाए।
09:10बहुजी, हुकम हो तो जरा बैलों को खोल गो, बैचारे ठग गये, और हम लोग कुछ खा पिया।
09:20हाँ हाँ भीया।
09:21आपने तो कल से पानी का घूर तक नहीं पिया। हुकम हो तो कुछ लियाू।
09:25नहीं भीया, मुझे कोई इच्छा नहीं।
09:27तम लोग चाओ।
09:28चलो भाई।
09:29आप चलो
09:44कहां से आ रही हो बेहन।
09:47रामपू से
09:49कौन जाथ हो।
09:51ठाकुर।
09:52क्या नाम है तुम्हारा।
09:55लीला।
09:56प्या ही हो यह कमारी।
10:02क्या बताऊ।
10:03माबाप हैं।
10:06फिर रामपूर में कौन है तुम्हारा?
10:08चाचा चाची।
10:10क्या नाम है उनके।
10:12यह सब क्यों कूशे है।
10:14हमारी वहां रिष्टेदारी है, इसलिए बताऊना।
10:17अधाल मैं?
10:18चाचा का नाम बिक्रम सिंग, चाची का रंगिली बाई.
10:21बिक्रम सिंग और रंगिली बाई.
10:28तब तुम्हें तुम्हारी मामी लगती हूँ?
10:30मेरा तु कोई मामा नहीं.
10:32कोई मामा नहीं?
10:34बहला तुम्हारे बाप का क्या नाम है?
10:36विर सिंग.
10:38और मांका दुर्गा अरे फिर तो मैं तेरी फिल को सगी मामी लगती हूँ
10:43तो यही बेहना मैं तरे मामा को बुला के लाती हूँ
10:45अच्छा
10:58जी ओ, मैंने गहाँ
11:02क्या, क्या, क्या, क्या
11:04क्या
11:08क्या अच्छा
11:13कहा एको
11:15बाहर बैठी है बैल गारी में
11:18तो जाके मेरी पगड़ी कोट छोड़ी लेया
11:20पूरा मामा बनके जाओ उसके सामने
11:22अच्छा
11:23लीला
11:29मेरे बहन के निशाद
11:32अरे तु मुझे कैसे परचान हैगी
11:36सौरा स्वरूत दे आए
11:38अपनी बहन को याद करके
11:40अभर बेटी तु घवराम
11:44उतरा
11:46जब तु पैदा नहीं हुई थी
11:48उससे पहले ही तुरे बाद से मेरा जगड़ा आता
11:52इसलिए आस तक आनी जाना नहीं हुआ
11:54पर अब तुससे क्या बहर बेटी
11:58बेटी
12:00उतरा बेटी चल घर चल
12:06आज़ा बेटी तु घवरान नहीं बेटी
12:12बेटी
12:14उतरा बेटी
12:16यह आंसु को लोग दिखावा थोड़ा ही है
12:18क्यों जी
12:20मुझसे इस तो मैं कुछ नहीं कहा जाता है
12:24जी उतरा बेटी
12:26उतरा बेटी
12:28अज़ा मामा को और ना रूला
12:30मुझे क्या मालम था कि यह दिन देखना पर लागा
12:32मुझे
12:34बस बेटी
12:36मेरे नसीबों में तो रूना ही लिखा है
12:38कल बया ही गई थी
12:40आज उजड़ करा देए
12:42उन्होंने तुझे घर से क्यों निकाल दिया
12:44दान बहेज कम था
12:46या बारात की खातिर में कमी रही
12:48दोनों ही बाते थी
12:50मकमल में टाट का पैवन कौन रगाता
12:52अपनी हसियत से बड़े घर में लड़की ब्याने का यही नतीजा निकलता है
12:58पर रंगीली बाई और उसके मर्द की अकल को क्या हो गया था
13:02क्या पत्थर पढ़ गये थे उनकी समझ पर
13:04उनका भी क्या दूश
13:06अभागन का भाग कौन सुधाता
13:08गाड़ी में बैठी बैठी यही सोच देती के कहां जाओं तुम आसरा दो तो यहीं पड़ी रहो
13:14मेरे सरांखों पर बेटी अंधा क्या मांगे दो आंगी
13:18शरूल बाई अब उठो चूला चाहा दो भाईलों की आने का वक्त हो गया है
13:22कोई और में माना रहे हैं नहीं बेटी यहीं के अंधे लूले लंग्रे अपाहिज है यह उन्हीं की वस्ती है
13:28मैं उनका खाना पका दिया करती हूं हम दोनों मिया बीवी से जो कुछ बंद पड़ता है कर देते हैं सेवा विचारों की
13:35यह तो बड़ा पुर्ण काम है चलो मैं भी तुम्हारा हाथ बटाती है इस यह में इसे भी ले जाओ काम काजमी जी लेगा रहेगा चाब बटी
13:46कर दो
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