00:00अगर हमें कामना की भी पूर्ती चाहिए, तो हमको गलत आचनन छोड़ने पड़ेंगे, क्योंकि हम जो कामना की पूर्ती चाहते हैं, उसमें पाप आचनन बाधा पहुँचाएंगे, पाप का फल दुख है, पाप का फल बिपत्ती है, पाप का फल संकट है, यदि आप मुर्
00:30पुर्ण नहीं होने वाले और आप किसी मंदिर न जाओ घर में पवित्र आचनन करो पवित्र भोजन पाओ और नाम जब करो तुमारे घर में भगवान आ जाएंगे कहो सु कहां जहां प्रभु नहीं हरी व्यापक सरवत्र समाना प्रेम ते प्रगट होए मैं जाना तो प्रे
01:00कि अंतरगत नहीं आता तुम्हारी अंगुली काटें तो मैं कैसा लगेगा दर्द नहीं लगेगा उन जीवों को देखो एक चीटी के भी पीछे अंगुली लगा के देखो ऐसे वो भाग रही अपने प्रान रक्षा के लिए क्या उनमें जीव नहीं है क्या मुर्गा अप
01:30स्रष्ष्टी रचना स्रष्टी पालं करना और स्रष्ष्टी का संघार करना वह भी अपने आ पर लेकर लीता है वह काल का ली काल है महां की
Comments