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  • 2 days ago
बेटा और बहु दोनों अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं मन दुखी हो जाता है क्या करूँ?
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00:00महरा जी प्रशन काफी ऐसे मातापिताओं का है इन नी का नहीं
00:04कि जैसे बेटे का शादी किया, अब ही बहु आई
00:07और फिर बहु बेटे के पक्ष में हो गई
00:10या बेटा बहु के पक्ष में हो गया और मातापिता से एक रूखा पन
00:14फिर के रहे हैं कि ऐसी स्थिती में जिसको पाला पोसा बड़ा किया और जब उसकी तरफ से कटूता होती है तो महरा जी जब बड़ा हिर्दे विर्दीन
00:21आपके समस्या नहीं है बहुत माता पिताओं के समस्या है क्योंकि बच्चे अध्यात्म से जब तक नहीं जुड़ते तब तक उनको इस समझ में नहीं आता कि मात्र देव भो पित्र देव हो हमारे माता पिता हमारे भगवान है ऐसा भाव नहीं आता तो स्वार्थ में बुद
00:51उनको फेकनी पड़ेगी न तब गालियां खानी पड़ेगी कोई विशेष्ट धावान अपने ऐसे माता पिता की सेवा कर पाता है नहीं तो बहुत सास को पीट रही है बेटा मापिता को मार रहा है लाद दर्णों थपड़ों से तो ये जो अध्यात्म विहीन हैं जिनोंने स
01:21समय आने पर आक्षशी सुरू प्रकट ये राक आशुरी बुद्धी है जो अपने माता पिता को मारे पीटे कष्ट दे उनको गालियां दे दैवी बुद्धी है कि उनके चरंच हुए उनको भगवान की दर्जाव दे और उनका पोशन करे अवस्था जैसे जैसे ढलती जा
01:51जो पुत्र होंगे वो हमको उससे सोगुना बढ़के कष्ट देंगे क्योंकि वो ब्याज भी तो मिलेगा तो इसलिए नए बच्चों को ध्यान रखना चाहिए कि वो भी किसी दिन माता पिता बनेंगे और वो किसी दिन वो भी बुड़े होंगे तो अपने माता पिता के सा
02:21भगवान का स्वरूप है ऐसा भाव पर ये भाव तभी आएंगे जब सत्संग सुनोगे अध्यात्म में चलोगे अगर अध्यात्म की बात ने सुनोगे तो राक्षसी भावी आएगा कि चलो किसी आनात हालाय में छोड़े आते हैं फुटपात में छोड़े आते हैं ऐसे �
02:51पुंडरीक नाम के भगत अपने माता पिता को भगवान मानकर आराधना करते थे तो भगवान स्वयम चलकर दरसंदेने आये जो बिठल रूप में है ना वो स्वयम दरसंदेने आये माता पिता के आराधना भगवान की आराधना है पर कल्योगी बच्चे नहीं समझ पा रह
03:21यहां सब कुछ बयारिसाइच मिलता है तो यही तो करम पर परम पराम आद तक भोग रहे हैं जब से स्रश्टी हुई तब से यही तो भोग रहे हैं बार बार जनम बार बार मरन बार बार
03:37मरन कहां मुब्त हो रहे हैं यह करम परमपरा चली आ रहे हैं अब यह अध्यात्म शिक्षा बचपन से दिए होते गल्ती इनकी भी
03:49आधुनिक शिक्षा ही केवल दी
03:51अध्यात्मी की सिक्षा नहीं दी
03:53तो वो क्या जाने
03:54अगर यह सुरू से कदे चो पैर
03:56प्राताकाल उठकर करके
03:59रोज मम्मी के पैर चो
04:00हाथ जोड़ो बड़े भाई से हाथ जोड़ो
04:02यह सिखाया गया है
04:04जैसे हम लोग चोटे थे ना
04:06कराग्रे वस्ते लक्षमी करमदेश रस्ते
04:08बोले हाथ जोओ धर्ती के पैर चो
04:11चलो अम्मा के पैर चो जाके
04:12पिता जीक पैर चो बड़े भाई
04:14जैसे ऐसे सिक्षा तो अब वो रोज
04:16की दिन चर्ज्या बना दी
04:17उठे उठे उठे करते हुए
04:20अब जिनके रोज पैर चो रहे
04:24तो हमारी सद्भावना बन रही ना
04:26उनका असिर्वाद बन रहा है
04:27अब कौन बच्चा रोज माता पिता के
04:30पैर चोता है कोई बिरला ही
04:32नहीं
04:33बिरला ही होगा हमें लगता है
04:36जो रोज शुबह उठकर
04:38अपने माता पिता के पैर चोई
04:39वो सत्संगी होगा
04:41बिना सत्संगी के तो माता पिता के पैर
04:44माता पिता को माता पिता
04:46मान ले भगवान न माने
04:48कम से कम माता पिता मान ले
04:49इतनी बड़ी बात है वो ऐसे तो
04:51भगवान का दर्जा दिया गया है माता पिता
04:54मेद कहता है मात्ड देवो
04:56हो पित्र देवो हो इसलिए
04:58भरजी पूर के कर्मा को तो हम
04:59देखनी पाते कि क्या आने वाला है
05:01बट कभी कभी परिवार में जैसे
05:03जो माता पिता है वो अपने
05:05बजूर्गों के पाउच हो रहे हैं तो ये प्रभाब बच्चे पे पढ़ रहा है।
05:35विद्या विने सब्वेता सिखाती है राज के पढ़े लखा बच्चा असब भी होता जा रहा है मातापितास का एक तुम अपना देखो हम देख लेगी कुछ तो पैरेंट्स भी अभी है ना मतलब बच्चों कोई क्योंकि खुद अध्यात्म नहीं है मराजी इसलिए उब चा
06:05पर तुम्हें पढ़े रहे लापढ़े रहे महराजी अगर सब्सक्राइब की चरुप कर दिया जा पर कर्म बंधन नहीं देखो देखो जब तक कोई समर्पित होना नहीं चाहेगा तो किसी को समर्पित करने से कोई समर्पड नहीं होता मनुष्य शरीर कोई फल फूल नहीं
06:35चलाने के लिए उनको सत्संग सुनाओ उनको आप आचरन सिखाओ और वो धीरे धीरे चाहें कि हम संत वाणी सुनकर के सुधरे तो समझ जाएंगे इसलिए शायद पहले गुरुकुलों का निर्मान था कि कुछ समय के लिए बच्चे भाता-पिता से अलग हो तो बहुत अ�
07:05रहते थे अब आज की पढ़ाई में आधुनिकता तो है लेकिन अध्यात्मिकता नहीं है तो अध्यात्मिक पढ़ाई नहीं के कारण विनय की बहुत कमी होती जा रहे हैं पढ़े लिखे बच्चे विनय से बहुत दूर होते जा रहे हैं जितना ग्रेजिवट उतना हंकार ह
07:35काइए दादा जी आपइठे हाई हम तो खड़ेभी सकते आब तो लगा पढ़ा लिखा हैं यह लगा कि पढ़ा लिखा है सब यादमी है यह तो पढ़ा लिखा का
07:44संफ समन्न सभधिता और बिने से वाज सभधिता और Bye जा रहे हैं पढ़े
07:49लिखे तो बहुत लोग है सब्व्यतार विने जा रहा है तो हमें लगता है ध्यात्मिक शिक्षा ही सुधार सकती है गुर्देव भगवान वच्छे तो नादान हैं उनको समझ नहीं है उनके कल्यान के लिए कही ना कहीं हम नाम जब करके समर्पित करें तो हां हो जाएगा हा
08:19पर आ रहा है यह सब कुछ करना कि मतलब बता भी रहें कि हम कि यह इत्ता करो तब आप करो आपको नाम जब करना पड़ेगा बट वह फिर भी नहीं करना चारे एक दो दिन करेंगे फिर फुसला दे फिर फुसला वे हपते में एक दिन भी करने लगे ना तो हमारी बात तो म
08:49बंद किया तो नहीं मिलेगा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा सुदू हो जाएगी बच्चे है और इसके बाद फिक है ले राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा ऐसे बताब प्यार से दुलार से आओ हम सब बैठते हैं देखो
09:19अर्जुन जी ने तो चक्रवी तोड़ना गर्वसे जाने तो गर्वस्त सिसु को कितना ग्यान वो तो आप बाहरा चुका है अगर हम सुनाएंगे तो उसके संस्कार बदलेंगे उसके भाव बदलेंगे

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