00:00पाइल जी, रादे रादे महराजी, महराजी हमने आपसे नामजब की महिमा सुनी और एक महीने पूर्फ से रोज 30-40 अजार नामजब करना शुरू किया महराजी, हम चाहते हैं कि हमारी प्रलहाजी जैसी संतान हो जिसे कम आयू में ही भगवत प्राप्ति हो जाए उनकी वान
00:30और हिरनकश्यप तपश्या कर रहा था, तो देवराजिंद्र कयाधून की माता का नाम है प्रलहाजी की, तो महल में आक्रमन किया, तो कयाधून जी को बंदी बना के ले जा रहे थे, तो देवर्ष नारत जी मिल गए, उन्होंने का कहा ले जा रहे हैं, बुले इसके गर्�
01:00तो उसका बद करूँगा, तो उनका नहीं, छोड़ो इसे, छोड़ाया और अपने आस्रम ले गए, रूज भगवत कथा सुनाते, रूज महाभागवत धर्म का बरणन करते, नाम कीरतन भजन, तो नौ महीने में गर्भस्त सिशू प्रलाद महाभागवत बन चुके थे, व
01:30कि पांच वर्ष में जो देवर्षी नारज जी के द्वारा दिये हुए उपदेश से भक्त राज पदवी को प्राप्त थे, पांच वर्ष के प्रलाद जी, और त्रिभुवन पते हिरनकश्य पितना भारी विरोध, पाई भरना तो डरे, और नबाल बाका हुआ, हरी के बल
02:00पित्रवातावरन तो गर्वस्त सिसू पर इसका प्रभाव पड़ता है, पर अब वो प्रलाद जी के समान तो प्रलाद जी ही है, प्रलाद जी के समान नहीं, पांच वर्ष के बालक को अगनी में जलाया गया, हाथी से रौंदाया गया, परवत के नीचे दबाया गया, पा
02:30कहीं बाल नहीं जुल से, कहीं प्रलाजी जैसे तो सिर्फ प्रलाजी है, दूसरा हाँ, भक्त संतान हो, ऐसी आकांशा करो, लेकिन प्रलाजी जैसी तो प्रलाजी है, जैसे भगवान जैसे भगवान, ऐसे भगवान के भक्त प्रलाजी जैसे तो प्रलाजी, जिनके लिए भ�
03:00कि भगवान का भक्त देश भक्त पुत्र पैदा हो आक आंक्षा करें पर हम पहले से बता जेते प्रलाजी जैसे सिर्फ प्रलाजी क्योंकि वैसी पांच वर्स का बालक और इतनी महान निष्ठा त्रिभुवन पती हिरनकस्यप से विरोध कर लिया
03:18दैत्तिराज कहकर बात करते थे पिता स्री कहके नहीं बात की जब से भगवान का विरोध किया कुछ रही कितनी बड़ी हिम्मत बता पांच वर्स के बालक में कितना सामर्थ होती तो इसलिए प्रलाजी जैसे तो सिर्फ प्रलाजी हम भगवान से चाहें कि हमारे को ऐसी संतान
03:48तो इस जन्म कैसे नहीं पूर का भजन होता है कई जन्म तक जब उनकी साधना भजन होती है तो अब इस जन्म में सिध्व महापुरुश के रूप में प्रगट हुए
03:58जैसे तुकाराम जी के लिए साक्षात बीमान आया
04:01भगवान का साक्षात बीमान आया
04:03और सदेह बीमान पर बैठ कर भगवान के धाम में
04:06यह सम्माहा भागवत्यान है
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