00:00हम यह नहीं कहते हैं को दिन बर माला चलावे पर विद्यार्थी को जरूरी है कि वो दस-बीस मिनट अध्यात्मी की बातें रोज सुने या पढ़े मरलो सुनने को नहीं मिलता तो सास्तर से पढ़े छोटी-छोटी पुष्टिकाएं गीता प्रश्य प्रकासित हैं जो अध्य
00:30आंतरिक हम कमजोर हो जाते हैं आंतरिक हमारा चिंतन हो तो अब पढ़ाई में जो चिंतन लगना चाहिए प्रशन होकर उसमें लग जाता है तो कहीं न कहीं जो पराजय होती है जो फेल होना होता है जो हम ग्रहन नहीं कर पाते हैं जैसे हमारा अंदर से कहीं चिंतन है तो आ
01:00चाहिए वो भगवान का चिंतनों चाहिए विद्या का चिंतनों चाहिए विद्या का चिंतनो उपफेक्ड उसमें रहेगा तो हमें लगता है
01:06विद्यार्थियों को ब्रह्मचद से रहना चाहिए जब तक व्याहना हो और व्यशन का त्याग करना चाहिए कोई नसा नहीं होना चाहिए और किसी तरह गंदे द्रश्यों को देखना गंदी बाते नहीं होनी चाहिए तो बहुत अच्छे विद्यार्थि बन जाएंगे और �
01:36बंदा विचार वाला वो शोशन कर सकता है पोशन नहीं
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