00:00एक परचून की दुकान थी तो विचारा बड़े धर्म से चलता था तो सैकिल से चलता नमक रूटी खाता और सामने हलवाई की दुकान थी बहुत उसमें मिलावट सब कार से चलता तो एक दिन एक संत आये उस गरीब के घर तुनका महराज धर्म स्रिष्ट है कि अधर्म स्रि
00:30अधर्म से चलने वाला दीपक की तरह जलेगा लेकिन कुल परंपरागर चलेगा अधर्म वाला एकदम उठेगा और फ्यूज हो जाएगा नस्ठ हो जाएगा
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