00:00मरजी आप कह रहे हैं कि आपको बहुट डराबने सपने आते हैं?
00:03खंडर देखते हूं सफनों में मलद किसी की मृत्यू के बहुत सारे सपने
00:07मिल्यान क्रते हुए सोया करो पवित्र हो करके नाम जब करते हिए सोया करो तो अच्छे शोपनांगे
00:15नहीं तो मन संत्सकारों का अपपुंज है जैसे हम आचरण करते हैं पूरु जन्मों से लेके अभी तक वही शौपने में फेकता रहता है
00:23अब जैसे संत जन शौपने देखते हैं तो भगवान के शौपने देखते हैं तीरतों के शौपने देखते हैं
00:30संतों के श्वपने देखते हैं, ऐसा लगता है, सोते ही रहो, जगों मती यही देखते रहो, मन जो है, जो उसके अंदर होता है, श्वपने के समय वही फेकता रहता है, सब मिथ्या है, कोई सत्य नहीं है, जब जागरत मिथ्या है, तो श्वपने तो मिथ्या है, उमा कहूं मै