00:00मारा जी अगर कोई करम छेतर में बार बार सफलता ना मिल रही हो तो मुझे हार करम बदलना चाहिए या मेरी नेती पर छोड़ कर बस उसे करते रहना चाहिए
00:12अगर ऐसा लगता है कि मांगो हम ये व्यापार कर रहे इसमें असफलता मिल ले तो दूसरा देखना चाहिए अगर ऐसा लगता कि इस बार मेरी ये तुरूटी रही इसलिए सफलने हो पया तो एक बार और कर ले ना ऐसा नहीं कि ये कई को पकड़ के बैठ जाना चाहिए सफल
00:42समय नस्ट नहीं करना चाहिए वैसे सफलता और असफलता ये दो पार्ट जीवन में आते ही रहते हैं आज हमारा उन्नती का समय तो कलावनती का सकता है आज भी पत्ती का है तो कल संपत्ती का सकता है हमको धैरे रखना चाहिए पर जिसमें बराबर निरासा ही निरासा मिलती
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