00:00बस तुमको यही सुच न, वो देख रहा है, मेरा श्वामी देख रहा है, वो देखते हुए मॉन हैना, वो चारा हैना, को तेरा किया मीठा लागे, बस बात समझलो, इतना तो बहुत बढ़ी वस्तुपर आप ठोग, बहुत बढ़ी, उजे अंदर से भी बहुत पीडा दिया
00:30दिकार है हमारी प्रीति को प्रीतम सहावे और मैं दूसरे से सिकायत करूँ नहीं हर बिधान आपका सवे प्रेम है मस्तिका ए लजू-पंजू ऐसे काम नहीं है इनके देखते हैं पैर धरके अगर गरम लगा तो अटा लेंगे मत रखना गरम है और छाती मजबूत करके कि आ�
01:00है और घर से निकले थे कोई साथी नहीं है कोई समझाने वाला नहीं और आज इतना जीवन हो गया इसी यार के सहरे हुआ इसी यार ना एक उरुपया कभी था ना रहा है न रहेगा प्रेमानंद का एक उरुपया नहीं प्रेमानंद की एक वस्तु नहीं ना रहा न रहेगा
Comments