00:00एक लंग बैसा में पहले रंगापूरम नामक एक गाउं था। उस गाउं में रंगी और रमनी नामक दो सहेली रहते थे। वो दोनों एक ही गली के आमने सामने घरों में रहते थे। उन दोनों में रंगी बहुत अच्छी थी। सबसे बहुत अच्छी तरह से बात करती थी�
00:30तो आज क्या पकाया अपने कुछ नहीं पेटा आरे ऐसे क्यासे ये लो ये मूली लेकर आप कुछ बनाओ
00:42मेरी प्यारी बेटी शुक्रिया सौ साल जी ओ बेटी ऐसे वो सबसे अच्छी तरह से बात करते हुए मिल जुलके रहती थी
00:53जितना था उतने में खुश रहकर सबकी मदद करते हुए रहती थी और ऐसे ही उसको अपनी सहीली रमनी से भी बहुत लगाव था
01:03लेकिन रमनी अपने आपको आइने में देखकर आहां इस सारी दुनिया में तुछ से बढ़कर कोई खुबसुरत नहीं है
01:12इतनी सुन्दर्ता की कोई भला प्रशंसा किया बेना कैसे रहे तुम्हारी सुन्दर्ता और चतुराई के आगे कोई खड़ा नहीं रह सकता
01:22रमनी हमेशा उसके सुन्दर्ता और चतुराई के बारे में सोचते हुए बहुत गर्व मैसूस करती थी
01:28और उसी अहंकार से मेरे पास इतने पैसे और सुन्दरता है इसलिए उस रंगी जैसे लड़कियां भी मेरे ही साथ दोस्ती करती है वरना इस रंगी से मैं कब बात करती है ऐसी सोचते हुए वो उसके घर के अंदर चली जाती है
01:46रंगी के पिता को खेती में नुकसान होने के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्तिती बदल जाती है ये देख रंगी अपने आप में मुझे कुछ करके पापा को सहारा देना होगा ऐसे सोचती है उसी दुखी में वो फलों का व्यापार करने की फैसला लेती है और तुरंत �
02:16सहारा देने वाले ग्रहक थे उस गाउं की सारे लोग रंगी के पास ताज अफल खरीदे थे खुशी के मारे रंगी अपने आपने अगर मेरा व्यापर ऐसे ही कुछ और दिन चलते रहा तो मैं अपने पिता का सहायता कर पाऊंगी और हमारे सारी दुख दूर हो जाएंगे
02:46खुशे में यह रंगी यहां दुकान लगाकर सबको उसके जाल में फसा रही है अगर गाउंके सारे लोग इसी के प्रशंसा करेंगे तो मेरा कौन करेगा इसके दुकान को बंद ही करवाना होगा जा जाकर यह मेरे ही घर के सामने दुकान लगाई है अब इन सब को मेरी तर
03:16अब जरा मैं भी देखूं कि कौन उसके दुकान जाएगा
03:20अब मेरी सुन्दरदाकी और आकरशित होकर सब मेरे ही दुकान आएंगे
03:26हम्, हरे वा रमनी, तुम तो कितनी होश्यार हो
03:30ऐसे सोचती है
03:32अगले दिन उसके फैसले के मताबिक ही
03:35उसके घर के सामने दुकान खोलती है रमनी
03:38पहले से ही अमीर होने के कारण
03:41वो शहर से बहुत अलग तरीके के
03:44और अन्य प्रकार के फलों को
03:46वितारन करवा के दुकान में बेचने लगती है
03:50और बस गाओं के सारे लोग
03:53रमणी के पास मिल रहे अनेक प्रकार के फलों को खरीबने जाते है
03:57रमणी, तुम्हारी सुन्दरता की तो तुलना नहीं है
04:01तुम्हारे कारण ये फलों का दुकान भी सुन्दर दिखने लग रहा है
04:07और तो और ये होश्यार भी है
04:09इसलिए इतने प्रकार के फलोंग को यहां ले आई है
04:13इस फलोंग के बीच में तोटे की तरह प्यारी लग रही हो बेटी
04:18मेरा ही नजर लगने वाला है तुझे
04:21ऐसे आए हुए सारे ग्राहक उसकी सुन्दर्ता के प्रशंसा करते हुए
04:27और उसके दुकान में अन्य प्रकार के फलों के बारे में बात करते हुए रहते थे
04:31और लो रमनी के खुशी का हद ही नहीं था
04:35वहां दूसरी तरफ क्योंकि रमनी उसके दुकान में अलग प्रकार के फल बेच रही थी
04:41वहां रंगी की व्यापार ठीक नहीं चल रहा था
04:44क्या हुआ बेटी आजकल व्यापार अच्छा नहीं चल रहा है क्या
04:49नहीं आई ठीक नहीं चल रहा है
04:54तुम्हारी सहेली नहीं है अरे वही रामनी
04:59जबसे वो दुकान खोल बैती है, कोई तुमारे दुकान नहीं आ रहा
05:04उसने जान बूच कर दुकान लगाया
05:07वरना उसकी जिन्दगी में क्या कमी है
05:10आरे नहीं नहीं आई, ऐसा कुछ नहीं है
05:14अमीर होने के बावजूद वो खुद अपने पैरों पे खड़ा होना चाती है
05:19ये तो अच्छा लक्षन है ना
05:21ऐसे रंगी उसकी सहेली रमणी के बारे में खुश होकर
05:25कोई भेगभाव के बिना अपनी सहेली का अच्छा चाती है
05:29ऐसे कुछ समय बीच जाता है
05:32धीरे धीरे रंगी और रमणी दोनों का व्यापार अच्छा नहीं चलने लगता है
05:38इसी कारण दोनों के दोनों निराश होकर उनके अपने दुकानों में बैठे रहते हैं
05:44एक दिन एक रुशी उसी गाव से गुजर रहे होते हैं
05:49रमणी के दुकान के पास आकर
05:51बेटी बहुत भूक लग रहा है
05:54खाने एक फल दे सकती हो क्या
05:57जाएए बाबो जाएए
05:59मेरे पास यहां कुछ नहीं है और मुझसे मागने आए है
06:02एक तो मेरा व्यापार यहां नुकसान में है
06:05और मैं आपको फल मुफ्त में दूँ
06:07चलो हटो यहां से
06:08वो रुशी एक छोटी सी मुस्कान देकर
06:11वहाँ से रंगी के दुकान के और बढ़ते है
06:14भूका पड़ा हूँ बेटी
06:17कुछ फल दान में दे सकती हो क्या
06:19भूक मिट जाएगा
06:21ऐसे ही वो रुशी रंगी को भी पूचता है
06:24हरीरी स्वामी जी इतना पूचने की क्या सरूरत है
06:28आईए यहां बैटिए
06:30यह कहकर वो उस रुशी को उसके घर के पास बिठा कर
06:35कुछ फलों को काट कर उन्हें देती है
06:37उस मुनी के खाने की दौरान
06:39रंगी उनकी सेवा करती है
06:42उनकी खाने के बाद
06:43वो मुनी वहां से चल बसते है
06:45खुश रहो बीटी
06:47यह कहकर एक छोटी मुस्कान देकर
06:50उनके पास मौझूद पवित्र जल को
06:53रंगी के दुकान में मौझूद फलों पे डाल कर
06:55वहां से चले जाते हैं
06:57और रंगी उनको नमस्कार करती है
07:12और खाने के लिए फल चाहिए
07:15तुम्हारे पास मौझूद सारे फलों को
07:18मेरे गाड़ी में लगाओ
07:19यह सुनकर रंगी बहुत खुश होती है
07:22शायद मेरी सुनकर
07:23वो भगवान ही रुशी के अवतार में आकर
07:26मेरी सहायता कर रहे हैं
07:28यह कहकर वो आसमान की और देखकर
07:30भगवान की शुक्रियादा करती है
07:32रंगी के अगले दिन उटने से पहले ही
07:35खाली पड़े फलों के बक्सों में
07:38फल भरे रहते हैं
07:40यह देख रंगी को समझ में ही नहीं आता
07:42कि वो सपना है या सच
07:45कुछी दिनों में
07:46रंगी का व्यापार बहुत लाब पाता है
07:48तब से हर रोज सुबह
07:50रंगी के उटने से पहले ही
07:52फलों के सारे बक्सों में
07:54फल भरे रहते हैं
07:56और बस कुछी दिनों में
07:58रंगी अमीर बन जाती है
08:00यह सब देख रंवनी
08:01यह सब रंगी ने कैसे किया
08:04यह सोच वो दंग रह जाती है
08:07रंगी के पास जाकर
08:09क्या हुआ रंगी
08:10अच्छानक तुम्हारा व्यापार
08:12इतना अच्छा चलने लगा
08:14और बस जो कुछ भी हुआ
08:16रंगी उसे बताती है
08:18हारे री
08:19अगर मैं उसी दिन उस रुशी को
08:21फलतान में दे देती
08:23तो शायद मुझे ये सब मिलता
08:24मैंने ये मौका खो दिया
08:27ऐसे अपने आप में वो निराश होती है
08:29और उसी दुख में
08:30वो अपने घर चले जाती है
08:32अब उस रंगी का किस्मत
08:35अगर मुझे हासल करना है
08:36तो उसकी दुकान में मौजू
08:39टोकरी को मुझे चुराना होगा
08:41ये फैसला करके
08:43रमनी रात के समय में
08:45रंगी के दुकान जाकर
08:47उसके टोकरीयों को चुराती है
08:49उन टोकरीयों को घर ले आने के बाद
08:52रमनी उन टोकरीयों के भरने का इंतजार करती है
08:56रात सुबा में बदल जाती है
08:59लेकिन वो टोकरी सारे खाली के खाली रहते हैं
09:02हाई भगवान मेरी टोकरी कहां गए
09:05कहीं नजर नहीं आ रहे
09:07क्या हुआ होगा
09:09रंगी ऐसे अपने टोकरीयों को धूनते धूनते
09:13रमणी के दुकान के और बढ़ती है
09:15वहाँ उसे फलों के टोकरीयों के साथ
09:19दुखी बैटी रमणी दिखाई देती है
09:21और बस रंगी को सब समझ में आता है
09:24रंगी को देख रमणी निराश होते हुए उसके पास जाकर
09:29मैंने बहुत बड़ी गलती किया है
09:32मुझे माफ करो
09:33घमन और जलन के कारण ही मैंने ये सब किया है
09:37अपनी गलती मानने के लिए भी हिम्मत की जरूरत होती है रमणी
09:41और तुम बहुत हिम्मत वाली हो
09:44रमणी को ये कहकर
09:46रंगी अपने टोकरीयों को लेकर उसके घर चले जाती है
09:50माफ करने वाले महान है
09:52ऐसे रमणी रंगी के बारे में अपने मन में सोचती है
09:57ऐसे सहेलियां दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह समझ कर अपने खुद की व्यापार करने लगते हैं
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