00:00हर गुजरते सेकंड दुनिया के तमाम समंदरों में 2,70,000 शिप्स मौजूद होती हैं।
00:06लाइफ मेरी टाइम ट्रैकर पे देखा जाए तो पैसिफिक ओशन, इंडियन ओशन और अट्लांटिक ओशन में इस वक्त इतने ज्यादा बहरी जहाज ट्रैवल कर रहे हैं कि जैसे शहित पर मक्यां बैठी हो।
00:17आप नोटिस करेंगे कि ये देख्शतनाक पहरी जहाज बिना किसी रुकावट के समंदर के किसी भी हिस्से में घूम रहे हैं।
00:26पिर चाहे वो सदरन आस्ट्रेलिया हो, साउथ इंडिया, साउथ अफरीका या फिर बदना में जमाना बर्मुदा ट्राइंगल ही क्यों ना हो।
00:34बर्मुदा ट्राइंगल जिसके बारे में काफी कहानिया मशूर हैं पर हकीकत इसके बिलकुल बरक्स है।
00:40यहां से भी सालाना लाखों कार्गो शिप्स गुजरती हैं और अभी भी लाइफ ट्रेकर पर यहां कोई ऐसा स्पॉट जाहर नहीं हो रहा जो इन रंगी निशानात से खाली हो।
00:51पर इन सब के इलावा साउट अमेरिका के इस हिस्से में देखा जाए तो यही भारी भरकम जहाज यहां जाने की हिम्मत नहीं करते।
00:59एक ऐसा समंदरी रास्ता जहां शिप्स हर कीमत पर जाने से परहेज करती हैं।
01:05इसे कहते हैं डी ड्रेक पैसिज और आज हम जानेंगे कि यह समंदर का सबसे खतरनाक रूप क्यूं ओड लेता है।
01:13जैम टीवी की वीडियोज में एक बार फिर से खुशाम देए।
01:15नाजरीन कई सदियों से हजारों जाने लेने वाले इस ड्रेक पैसिज ने अपनी मौझूदगी का एहसास 28 नवंबर 2022 को एक बार फिर से दे दिया।
01:26जब वाइकिंग पॉलेरिस नामी ये क्रूज शिप पैसिंजर्स को एंटाक्टिका के नाकाबल यकीन नजारे दिखाने गई थी।
01:33660 फुट लंबी ये क्रूज शिप ड्रेक पैसिज के पुर सुकून पानी में अभी उतरी ही थी कि अचानक एक गयर मामुली लहर की लपेट में आ गई।
01:43वैसे तो ये मौडरन शिप पैसिंजर्स की सेफटी को नजर में रखते हुए काफी अराम देब बनाई जाती हैं पर ये लहर वाइकिंग पॉलेरिस से भी ज्यादा उंची थी और उसने लाखों टन वजनी शिप को कागस की कश्टी की तरहां हिला कर रख दिया।
01:58शिप की खिड़कियां तोट गएं जिसकी वज़ा से चार पैसिंजर्स शदीद जखमी हुए और एक की जान भी चली गई।
02:05सिर्फ पिछली दो सदियों के डेटा पर नज़र दोड़ाई जाए तो ड्रेक पैसेज 683 लोगों की जान ले चुका है और इससे पहले यहां कितने बहरी जहाज डूबे हैं इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं।
02:17आखर ड्रेक पैसेज में ऐसी कौन सी पुरिसरार चीज है जो यहां आने वाले जहाजों को दबूच लेती है और इसे दुनिया का खतरनाक तरीन समंदरी रास्ता बनाती है।
02:28हलांके देखने में ये काफी तंग रास्ता मालूम होता है पर साउथ अमेरिका में केप हौन से लेकर एंटाक्टिका तक ये 900 किलो मिटर्स का फासला बनता है और इसी को ड्रेक पैसेज कहते हैं।
02:41ड्रेक पैसेज की खास बात ये है कि यहां पर दुनिया के तीन ओशन्स आपस में आकर मिलते हैं।
02:47पैसिफिक ओशन, एटलांटिक और साउथ सी।
02:50समंदर की गहराई देखी जाए तो ड्रेक पैसेज 11,150 फीट गहरा है जबके इसके लेफ्ट और राइट पे समंदर 15,700 फीट गहरा हो जाता है।
03:01इसका ये नाम फ्रेंसिस ड्रेक के उपर रखा गया है जो एर 1577 में एक मशूरे जमाना पाइरेट हुआ करता था।
03:09पर हैरानी की बात ये है कि खुद फ्रेंसिस ने भी कभी ड्रेक पैसेज को पार नहीं किया।
03:15ये एक ऐसा समंदरी डाकू था जिसको ब्रिटिश कुईन की सपोर्ट हासल थी।
03:20ये समंदर में इस्पेन की शिप्स को लूटता जो उस वक्त ब्रिटिएन का दुश्मन था।
03:25फ्रेंसिस ड्रेक को क्योंके ब्रिटिश कुईन की सपोर्ट थी तभी वो नौर्थ अटलन्टिक ओशन में किसी भी शिप को या कोस्ट पे मौजूद शहर को लूट लेता था।
03:34आखिरकार उसने कोईन के दिल में इतनी जगा बना ली कि उसको एक खास मिशन के लिए चुना गया।
03:40ब्रिटेन किसी तरहां साउथ अमेरिका में एंट्री करना चाहता था क्योंके यहां पर पहाड़ों में सोने चांदी के रिजर्व्स पाए जाते थे।
03:48कुईन इलिजबत ने एक मिशन प्लैन किया जिसमें ब्रिटिश आर्मी को पांच शिप्स में फ्रेंसिस ड्रेक के साथ साउथ अमेरिका तक बेजा गया।
03:57200 लोगों के काफले को साउथ अमेरिका के स्ट्रेट आफ मैजलन को क्रॉस करके पेरू तक पहुंचना था जहां पर सुना गया था कि सोने के बहुत जखीरे हैं और वहां के लोग बेहद अमीर हैं।
04:10इस मिशन में फ्रेंसिस ड्रेक ब्रेटिश आफिसर्स को लीड कर रहा था और ये बात उन्हें हजम नहीं हुई और वो सफर के दोरान ही ड्रेक के खिलाफ साज़िश करने लगे।
04:20साउथ अमेरिका में आरजंटीना के कोस्ट पर पहुंच कर फ्रेंसिस ड्रेक ने अपने साथी ब्रेटिश आफिसर्स के उपर घगदारी का इलजाम लगा कर उन्हें फांसी चड़ा दिया।
04:29और दो शिप्स वहीं छोड़कर बकाया तीन शिप्स को स्ट्रेट ओफ मेजलन पार करवाया और साउथ अमेरिका के वेस्ट में पहुंच गया।
04:37आरजंटीना से स्ट्रेट ओफ मेजलन के तंग रास्ते के जरीए पैसिफिक ओशन पहुंचने में उन्हें 16 दिन लग गए।
04:45लेकिन जैसे ही वो खुले समंदर में निकले तो एक भयानक तुफान की गिरिफ्ट में फस गए।
04:51इस तुफान की वज़ा से ये तीनों शिप्स आपस में बिचड़ गई। एक स्ट्रेट ओफ मेजलन के जरीए वापस बिरिटेन पहुंच गई ये समझते हुए के फ्रेंसिस ड्रेक मर गया है।
05:02दूसरी शिप ड्रेक पैसिज को स्ट्रेट ओफ मेजलन समझ कर उसकी तरफ गई जिसकी बाद में कोई खबर नहीं आई।
05:09जबके तूफान थमने के बाद फ्रेंसिस ड्रेक को लगा कि शायद वो स्ट्रेट ओफ मेजलन से थोड़ा ही नीचे है।
05:16उसने सोचा कि मैं साहिल के साथ साथ उपर की तरफ जाता हूँ और स्ट्रेट ओफ मेजलन में घुस जाऊंगा।
05:23लेकिन असल में उस वक्त वो स्ट्रेट ओफ मेजलन के उपर था।
05:27लहाज़ा वो नौर्थ की तरफ बढ़ता रहा लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं मिला।
05:32बढ़ते बढ़ते उसने रास्ते में आने वाले हर चोटे बड़े गाओं और शिप्स पे खूब लूट मार मचाई और सोना चांदी जमा करता रहा।
05:40आखर कार उसने अपना सफर सैन फरेंसिसको में आकर खतम किया।
05:45इस वाके के बाद फरेंसिस ड्रेक ने बताया कि साउथ अमेरिका के नीचे एक खुला समंदरी रास्ता मौजूद है जो स्ट्रेट ओफ मेजेलिन को बाइपास करने के काम आ सकता है।
05:56बेशक ड्रेक पैसिज का नाम फरेंसिस ड्रेक पर रखा गया है लेकिन उसने खुद एक मरतबा भी इसको क्रॉस नहीं किया।
06:03फरेंसिस ड्रेक के इस एक्सपेडिशन के 40 सालों के बाद पहले बार विलम शाउटन नामी एक डच एक्सप्लोरर ने ड्रेक पैसिज को काम्याबी से पार किया और वेस्ट अमेरिका तक जाने का एक रास्ता बनाया जो 1914 में पैनामा किनाल के बनने तक इस्तमाल होता रहा�
06:33पैसिफिक, एट्लांटिक और साउथ सी तीनों का पानी इस पॉइंट पे आकर मिलता है और क्यूंके ये रास्ता ओशन के मकाबले में ज्यादा चोड़ा नहीं तभी पानी जब यहां से गुजरता है तो इसकी स्पीड काफी बढ़ जाती है तीनों ओशन के मिलने की वज�
07:03तो अब आपको अच्छी तरह अंताजा हो गया होगा कि ड्रेक पैसिज से कितना पानी गुजरता है इसके इलावा एंटाक्टिका के गिर्द दुनिया का सबसे ताकतवर समंदरी धारा गुमता है जिसे एंटाक्टिक सरकमपूलर करंट या फिर एसी सी भी कहते हैं ये ठं
07:33विजयती निजाम एक तरह से अंताक्टिका को पिगलने से भी बचाता है वरना अगर एसी सी ना हो तो पैसिफिक और एटलांटिक का गरम पानी एंटाक्टिका को कब का पिगला चुगा होता एसी सी एंटाक्टिका को क्लॉकवाईज डिरेक्शन में घूमकर महफूज र�
08:03सबसे बड़ा मसला ये है कि इन उन्ची लहरों को पहले से प्रेडिक्ट करना भी काफी मुश्किल है।
08:09एक्सपर्ट का मानना है कि ड्रेक पैसिज से गुजरते वक्त यहां समंदर के सिर्फ दो ही रूप होते हैं जिसको ड्रेक लेक और ड्रेक शेक का नाम दिया गया है।
08:39क्योंके ये दिखता कुछ और है पर असल में वैसा नहीं होता।
08:43ये अलग-अलग रूप में क्यों रहता है इसकी सही वज़ा आज तक किसी को भी मालूम नहीं।
08:48पर एक्सपर्ट का मानना है कि शायद ऐसा मौसम के बदलने की वज़ा से होता है।
08:53पैसिफिक और अट्लांटिक ओशन की नम और गरम हवाएं एंटाक्टिका की तरफ रुख करती हैं।
08:59जिसकी वज़ा से एट्मोसफेर में प्रेशर का डिफरेंस पैदा होता है।
09:03उनका खयाल है कि शायद ये प्रेशर का डिफरेंस ही अचानक से यहां 20-30 मीटर उंची जान लेवा लहरें बनाता है।
09:11पर इस चीज़ का अभी तक कोई साइंटिफिक एविटेंस नहीं मिला।
09:15ड्रेक पैसिज में एक और ख़च्छा भी जाहर किया जा रहा है।
09:19कि जब तीनों समंदर आपस में मिलते हैं तो तीनों की डिरेक्शन एक दूसरे के आपोजिट होती है।
09:25जिसकी वज़ा से समंदर में एक विल्ल पूर अफेक्ट पैदा होता है।
09:29जिसे गिरदाब या पानी का चक्कर भी कहते हैं।
09:32इस अफेक्ट की वज़ा से बहरी जहाजों का इसमें से निकलना काफी चैलेंजिंग होता है।
09:37और अगर इसी दोरान कोई खतरनाक लहर पैदा हो गई तो फिर वो जहाज को अगर नुकसान ना भी पहुंचाए तो ठीक ढाक जूला जरूर देती है।
09:46अक्सर पैसिंजर्स इस मोशन की वज़ा से बिमार पर जाते हैं तो कुछ इसको शिप डेक्ट पे सलाइड करके इंजोय भी करते हैं।
09:53लेकिन कई केसिज ऐसे भी सामने आए हैं जिसमें पैसिंजर्स या क्रू जटके की वज़ा से पानी में गिर जाते हैं।
10:00ड्रेक पैसिज में पानी का टेंपरेचर माइनस 6 डिगरी सेल्सियस होता है और ये दुनिया में वाहिद ऐसी जगा है जहां माइनस में होने के बावजूद भी पानी लिक्विड फॉर्म में ही रहता है।
10:12इतनी ज्यादा ठंड बदन को फॉरन फ्रीज कर देती है और हाइपो थर्मिया के बाइस इनसान की मौत हो जाती है।
10:19इसके इलावा ड्रेक पैसिज का मौसम बहुत ही अनप्रेडिक्टिबल होता है।
10:23ये एक ऐसा एरिया है जहां पर तेज हवाएं, लहरें और तूफान बहुत तेजी से बदलते हैं।
10:29कुछ वक्त ये पैसिज शान्त और साफ होता है जबके दूसरे वक्त ये तूफानी और खतरनाक हो जाता है।
10:36साइन्टिफिक कम्यूनिटी अभी तक यहां के इस एबनॉर्मल मौसम की सही वजा मालूम नहीं कर पाई।
10:42इन सब चीजों के साथ साथ कई लोग ड्रेक पैसिज को एक अनोखी और सुपर नैचरल जगा भी मानते हैं।
10:49कुछ सेलर्ज और ट्रेवलर्ज ने यहां पर अजीब फिनॉमनान भी नोटिस किये हैं।
10:54जैसा के आसमान में अजीब लाइट्स का दिखना, कमपास का अचानक खराब हो जाना और ऐसी आवाजें भी सुनी गई हैं जिनकी साइन्स वजाहत नहीं कर सकती।
11:04आपको यहां बताते चलें के ड्रेक पैसिज के आसपास का एको सिस्टम भी एक मिस्टरी से कम नहीं है।
11:10क्योंकि इस एरिया में एंटाक्टिक सरकमपुलर करंट्स की वजा से समंदर में वो मखलूक नहीं पाई जाती जो नॉर्मली दूसरे समंदरों में मौझूद है।
11:19यहां काफी मुख्तलिफ समंदरी परजातियां पाई जाती हैं जिनकी बॉड़ी माइनस टेंपरेचर और हाई प्रेशर को आसानी से जेल सकती है।
11:28यह एक्स्ट्रीम कंडिशन्स दूसरी समंदरी मखलूक के लिए बहुत चैलिंजिंग हो सकती है इसी वज़ा से उनका यहां कोई नाम और निशान नहीं लेकिन साइन्टिस्ट्स अभी तक इसकी असल वज़ा समझने से कासिर हैं।
11:41ड्रेक पैसिज के यह तमाम फिनॉमनौन साइन्टिफिक लॉजिक की समझ से बाहर हैं। तभी इनका ठोस जवाब अभी तक कोई नहीं दे पाया।
11:49इन्हीं खतरों और लंबे रास्ते से बचने के लिए 1914 में पैनामा किनाल वजूद में आया लेकिन आज भी सुपर साइज की कार्गो शिप्स और एक्सपेडिशन शिप्स ड्रेक पैसिज का रुख करती हैं।
12:01अमीद है जहम टीवी की ये वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कॉमेंट्स का बेहत शुक्रिया। मिलते हैं अगली शांदार वीडियो में।
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