00:03पित्रपक्ष के नौमी दिथी जिसे मात्री नौमी के नाम से जाना चाता है
00:07हमारे जीवन के सबसे पूझने स्त्रियों, माता, दादी, परदादी और सास के प्रती कृत्यग्या व्यक्त करने का पावन दिन है
00:16लेकिन कई बार अंजाने में स्वास्त संबंधी कारणों से
00:20या किसी अपात स्थिती की वजह से
00:23वेक्ति मात्री नौमी का शाद या तरपण नहीं कर पाता
00:27ऐसे में मन में ये डर बैठ जाता है कि क्या पित्र रुस्ट हो जाएगे
00:31हिंदु धर्म और शास्त्रों में इसका समधान बताया गया है
00:35ऐसे में चली बताते हैं आपको इस वीडियो में कि अगर कोई वेक्ति
00:38मात्री नौमी का शाद ना कर पाए तो उसे क्या करना चाहिए
00:42पित्र पक्ष की अंतिम दिथी यानि सर्व पित्री अमवस्या को
00:46विसर्जनी अमवस्या भी कहा जाता है इस दिन भूल चुक से छूटे हुए सभी पित्रों
00:52और माताओं का शाद एक साथ किया जा सकता है इस दिन किया गया तरपड और दान सीधे माताओं तक
00:59पहुचता है
01:00अगर अमवस्या तक रुखना संभव ना हो तो नौमी के बाद आने वाली द्वादशी यानि की बारवी तिथी या त्रियोदशी
01:08तिथी को भी सात्विक भोजन बनाकर माताओं के नाम से धूब ध्यान दिया जा सकता है
01:14वह अगर आप विस्तरित पूजा या फिर पंडिच जी को बुला कर शाद नहीं कर सकते तो भोजन पका कर
01:22उसका पहला भाग गाय कुत्ते कोवे और चीटी के लिए निकाल लें
01:28विशेशकर गाय को हराचारा या गुड रोटी खिला कर माताओं का स्मरण करें
01:33वह अगर आप किसी यात्रा में है या कोई भी विवस्ता नहीं हो पा रही तो दोपहर बारा बज़े से
01:40एक बज़े के बीच दक्षिन दिशा की और मुख करके खड़े हो जाए
01:45दोनों हाथ उठा कर भगवान सूरे और अपनी माता पित्रों का ध्यान करें
01:51साथ ही अपनी विवस्ता के लिए शमा मांगे
01:54सास्त्रों में इसे मानसिक्स श्राद कहा जाता है
01:57उमीद करते हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
01:59फिलाल हमारी इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना भूले