00:03जीतिय यानि जीवित पुत्री का व्रत महिलाओं के लिए सबसे कठिन और फलदाई व्रतों में से एक मना गया है
00:10इस दिन माता हैं अपने बच्चों की लंबी आयू, उत्तम स्वास्त और सुखी जीवन के लिए 24 घंटे से ज़ादा
00:16समय तक नर्जला व्रत रखती है
00:19जीतिय पूजा में जीत वाहन देव और चील सियार को सरसो का तेल और खरी चढ़ाने का विशेश महत्व है
00:27लेकिन कई बर माताओं के मन में सवाल आता है कि तेल खरी कब चढ़ाना चाहिए और अगर पूजा के
00:33समय खरी या तेल ना मिले तो क्या करना चाहिए
00:36तो चलिए बताते हैं आपको इस वीडियो में
00:39जीतिय पूजा के शुरुवात नहाय खाय से होती है
00:42इस दिन माताओं इसनान करके साफसुत्रे वस्त्र पहनती है
00:46इसके बाद कूशा से बनाई गई चील और शियार की मूर्ती को एक पत्ते पर स्थापित किया जाता है
00:54कई लोग नहाय खाय की रात यसुभे व्रत के शुरुवात से ठीक पहले ओटगन के समय जब माताओं भोजन ग्रहन
01:03करती है
01:03तब भी जिमुत वाहन देव को और चील सियार को तेल और खरी चढ़ाने की परंपरा है
01:10वहीं कई लोगों के घर में ये परंपरा होती है कि वो खरी तेल नहाय खाय से पहले चढ़ाते है
01:18वहीं पूजा में जो तेल और खरी चढ़ाई जाती है उसे बाद में प्रशाद के रूप में अपने बच्चों के
01:24सिर पर लगाया जाता है
01:26मानेता है कि इसे बच्चों को बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है और उनका स्वास्त उत्तम रहता है
01:32वहीं शहरों और आधुनिक समय में कई बार सरसो के असली खरी मिलना मुश्किल हो जाता है
01:38अगर आपको पूजा के समय खरी ना मिले तो आप साबुत खरी या पीली सरसो को थोड़े से सरसो के
01:45तेल में मिला कर भगवान को और पित कर सकते हैं
01:48गई जगहों पर सर्सों की खरी की जगे काले तिल को थोड़ा सा कूट कर तेल के साथ चढ़ाने का
01:54विधान भी माना जाता है
01:56हिंदु धर में पूजा का सबसे बड़ा अधार आपका भाव है अगर कोई समागरी ना मिले तो आप केवल शुद्ध
02:03सर्सों का तेल अर्पित करके मन में चील सियार और जीमुत वहन देव से प्रातना कर सकते हैं कि वो
02:10आपके भावनाओं को स्विकार करें
02:12उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंदाई होगी फिल हाल अमारी इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और
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