00:03अश्वन मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथी के साथ पित्रपक्ष आरंब हो गये थे तो सर्व पित्रियों मवस्या तिथी को
00:10ये समाप्त होंगे
00:11ऐसे ही अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथी को सुहागिन स्त्रियों अज्यात महलाओं का श्राद करने का विधान
00:18है
00:18इसी के कारण इसे मात्री नवमी के नाम से जानते हैं
00:22इसके अलावा पित्रपक्ष की नवमी तिथी को नवमी श्राद, नवमी श्राद और अविध्वा श्राद के डाम से भी जाना जाता
00:29है
00:29धर्मेक मानेत आगे अनुसार इस दिन इनका श्राद तरपन करने से उनका अशरवाद मलता है
00:35आईए जानते हैं मात्री नवमी की सहीतिति, मुहुरत और अन्य जरूरी जानकारिया
00:41द्रिग पंचांग के अनुसार अश्विनमास के कृष्णपक्ष की नवमी तिति 4 ओक्टूबर को सुब़ 5 बचकर 51 मिनट से शुरू
00:49हो रही है
00:49जो 5 ओक्टूबर को सुब़ 3 बचकर 53 मिनट पर समाप्त होगी
00:54ऐसे में मात्री नवमी 4 ओक्टूबर 2026 को पड़ रही है
00:58मात्री नवमी में कुतूब मुहुरत 12 बचकर 20 मिनट से 1 बचकर 13 मिनट पर जिसकी अवधी 33 मिनट की
01:05है
01:06मैं रोहनी मुहुर्त एक बचकर तेरह मिनट से दोपहर दोबचकर छे मिनट तक है
01:12अपराहन काल मुहुर्त दोपहर दोबचकर छे मिनट से शाम चार बचकर पैंतालस मिनट तक की रहेगी
01:19मात्री नवमी के दिन दिवंगत सुहागिन महलाओं के अलावा उन लोगों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्य शुक
01:26लिया कृष्ण पक्ष की नवमी तिथी को हुई थी
01:28हिंदु धर में मात्री नवमी का खास महत्व है
01:32इस दिन दिवंगत माता, मात्रिपक्ष की महिलाएं और सुहागिन अवस्था में दिवंगत स्त्रियों का श्राद्ध तरपण और पिंडदान करते हैं
01:40इसे मात्रियरण और पूर्वजों के प्रती कृतग्यत अव्यक्त करने का अच्छा उसर माना गया है
01:46इस दिन विधिविधान से तरपण करने से पूर्वजों कारशरवात तो मलता ही है
01:51साथी परिवार में सुख शांती के साथ समृद्धी खुशहाली बनी रहती है
01:55इसके साथ ही इस दिन दान करने का विशेश महत्तो है
01:59फिल हाल इस वीडियो में इतना ही
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