00:28जै जिमूत वहन
00:30आस वेडियो में जानते हैं
00:31सबसे पहले बात करेंगे शुमुहुरत की
00:34हश्टमी तिती की शुरुवात 3 अक्टूबर को सुबह 7 बचकर 69 मिनट से शुरू होकर
00:394 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बचकर 51 मिनट पर खत्म हो रहा है
00:45मैं पूजा के लिए 2 सबसे शुमुहुरत रहेंगे
00:49आमतोर पर प्रदोश काल में इसकी पूजा की जाती है
00:52लेकिन अभिजीत मुहुरत सुबह 11 बचकर 46 मिनट से दोपहर 12 बचकर 34 मिनट तक का रहेगा
01:06जीतिया में भगवान जीमूत वाहन और चील सियार की पूजा की जाती है
01:11जीतिया वरत के मुख्य देवता गंधर वराजकुमार भगवान जीमूत वाहन ही है
01:16और पूरानिक कथा के नुसार चील और सियार ने भगवान जिमूत वाहन का ये वरत सबसे पहले पूरी निष्ठा से
01:23किया था
01:24इसलिए पूजा में धें विशेस्थान दिया गया है
01:26इस दिन घर की मृत महलाओं खास करके सासू मा दादी सासू आदी और पित्रों का ध्यान कर ही अर्ग
01:33दिया जाता है
01:34ऐसे में अपसनानादी से निवरत होकर सबसे पहले सूरीदेब को अर्ग दे और उसके बाद अपने पित्रों को
01:41अब पूजा में चड़ाने के लिए भीगा हुआ अंकुरित चना, मकई, ठेकुआ, मलुआ कांटा, या रोटी, पेडा, खीरा, मक्षन या
01:50दही, खीरा, केला, नारियल, सेब, शरीफा, धूब, घास, सरसो का पोधा, नोनी का साग, जीतिया का पत्ता, अक्षत, लाल या
02:00प
02:11के गोबर या मिट्टी से लीप कर एक छोटी सी वेदी बनाएं, वेदी के पास एक छोटा तालाब बनाएं, पोखरे
02:18के किनारे कुष या मिट्टी से बनी भगवान जिमूत वहन की प्रतिमा स्थापत करें, पास ही चील और सियार की
02:24मिट्टी या कुष की आकरती बनाकर स्�
02:28प्रुद्ध होकर घी का दीपक जलाएं और जल का छड़काव करें भगवान जिमूत वहन को रोली अक्षत चन्दन धूप और
02:36लाल पीले फूल अरपित करें इसके बाद चीर और सियार की प्रतिकात्मक आकरतियों पर भी सिंदूर अक्षत और सरसों की
02:43खरी लगाएं भगव
02:54के चर्णों में रखें और उस पर सरसों का तेल सिंदूर और अक्षत अर्पित करें हाथ में दूब और भीगावा
03:00चना लेकर जीतिया व्रत की कथा ध्यानपूर्वक सुने या पढ़ें कथा पूरी होने के बाद आरती करें पूजा के अंत
03:08में भगवान के चर्णों से जी
03:23यो को लाइक और शेर करें साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें