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  • 34 minutes ago
दिल्ली में लड़कियों को घूरना और छेड़खानी इतनी आम क्यों है, जानिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में

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00:01भारत में छेरखानी को इतना सामाने मान लिया गया है कि अब ये परिशान करने दगा है
00:06मुखरजी नगर की घटना हमारे सामने है जहां दो छात्राओं को गाड़ी में खीचने की कोशिश होती है
00:12और F.I.R. दर्च करने में पीड़ित को तीन पुलिस स्टेशन दोड़ना पड़ता है
00:16पुलिस के रवये के तो कहने ही क्या
00:42आता नहीं है, मॉर्नल टाउन आता है तो अब हाँ चले जाएए
00:44हमने बूला कि आप पुलिस से बहुत ज्यादा उमीद लड़कियों को नहीं होती
01:02दुर भागे पूर्ण बात ये है कि जब महिलाएं होद़ ये बानने लगती है
01:05कि कुछ नहीं होगा तो घटना केस बनने से पहले ही हत्म हो जाती है
01:10इसका फाइदा वेटियों को सताने वाले उठाते हैं
01:14दिल्ली में महिलाएं हर जगे असहज होती रहती है
01:19दिल्ली के हौस खास की ये तस्थीर देखे
01:22जिसके विलिज के एंट्री गेट पर एक आदमी महा से गुजरने वाली महिलाओं को देख रहा था
01:27फोल कुछ नहीं रहा नहीं घूम रहा है
01:30बस हर उस अगली महिला के आने का इंदजार कर रहा है जो उसके खरीद से गुजरती है
01:38दिल्ली में खूरने की ये आदत किस कदर आम है उसे इस बाइक सवार से समझे
01:46जो गुजरती दो महिलाओं को देखने के लिए अपता सिर लगभग 180 डिगरी घुमाता है
01:54अपनी इस हरकत को ना च्पाने की कोई कोशश और ना ही देखे जाने का कोई डर
01:59यही दिल्ली की हकीकत है ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली में ये बरताव इतना आख हो गया है
02:05कि किसी को देखते हुए पकड़े जाने पर भी अब शर्मिन की महसूस नहीं होती
02:12ये सब कुछ मंदिर के बाहर भी होता है
02:15आज तक संबादाता अश्रिया भर्मान मंदिर गई जिसके प्रवेश द्वार के बाद चार पांच आदमी बैठे थे
02:21इसी दौरान एक अधेर उम्र की महिला अंदर आती है वो प्रातना करती है
02:26जाने से पहले जैसे ही वो जुकती है एक आदमी की नदर इस महिला का पीछा करती है
02:31उसके चेहरे को नहीं बलकि उसके शरीर को देखती है
02:36आश्था महिला को जुकने के लिए कहती है लिकिन ये भी किसी और के लिए गूटने का मौपा बन जाता
02:42है
02:42आखिर क्यों?
02:47इसके बाद फिर से हमने कुछ और देखा जिसे सिर्फ देखना तो नहीं कहा जा सकता
02:52इस तरह एक पहला साबोहिक मनुरंजन का विशे बन जाती है
02:57एक देखता है दूसरा ध्यान देता है पूरा सबुख देखता है
03:06मेरे लिए असहज कोई एक खास नजर नहीं था बलकि ये था कि कितना समानने हो गया है
03:12कुछ आदमियों का एक साथ बैठे रहना, एक महिला का गुजरना, एक कोनी से धक्का, एक आदमी का मुर के
03:19देखना
03:20और किसी को भी ये नहीं लगता कि ये गलत है
03:23और शायद यही सबसे बड़ी असहज सवाल है
03:26कि एक महिला को अनकमफुटबल फील करवाना इतना नॉर्मल हो गया है
03:31कि किसी को अब इस पर ध्यान भी नहीं जाता
03:36नमबर वन किसी का ध्यान नहीं जाता
03:38नमबर टू, ओनस ओफ प्रूफ
03:41लड़की पर है, आप बताईए कि आप प्रूफ केज़े
03:44कि वो इसी वज़े से देख रहा था
03:46और अभी हम यह दिखा रहे है पेशकाश
03:49आपको भी पता है हम यही बात कर रहे है
03:50तो लोग बोलेंगा रहे हो तो ऐसे ही देख रहा था
03:52तो देखना, घूरना
03:54इसे हम इतना नॉर्मलाइज कर दिये
03:56कि हर बार हमें इंतजार करना पड़ता है
03:58कि एक कोई घटना घट जाए
04:00जिसमें हमारे हिसाब से एक परफेक
04:02विक्टिम लगे तब जाके हम आवाज उठाए
04:04यह क्यों है
04:05यह जो नॉर्मलाइजेशन का पूरा कल्चर है
04:08हमें इसे बदलना तो पड़ेगा न
04:10क्योंकि हम लगाता है
04:12सेम सवाल कह रहे है
04:13जैसे 2012 में भी हमने सवाल उठाया
04:15आप आदे कंजावला के समाई बेभी
04:17जब एक इंसिडेंट हो आता हम तब भी
04:18रियालिटी चेक करने निकले
04:19आज भी हम रियालिटी चेक करने निकले
04:21कुछ नहीं बदल रहा है
04:23डर क्यों नहीं है
04:24कोई डरता क्यों नहीं है
04:26कि भाई कोई हमें देखते टोकेगा नहीं
04:28यह जो डर है यह तो अंदर से आना पड़ेगा
04:31उसमें तो आखों की शर्म होगी
04:45आपके पास इतना एक बजट बन गया
04:49निर्भया फंड जिसमें कितना कहां खर्च हो रहा है
04:52वो भी समझ में आए
04:52और उसके साथ साथ यह बदलाव
04:56मुझे लगता है सबसे ज़्यादा श्वेता जरुट जो इस समय है
04:59वो है पोलिटिकल विल की
05:00बड़ा सवाल है
05:02क्या किसी भी पार्टी में इतनी Viele में पॉलिटिकल है
05:05हमने तो देखिया है
05:06हम देखा है कि हम आप पार्टी बदली है
05:09एक पार्टी कोई भी
05:10यह बड़ा नेता यह फिर कोई एक बड़ा
05:12अनछ formulas कोई भी यह बोले कि भई ठीक Social
05:14आदे की जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, हम कोई corporate house बोले के भई इतनी की जिम्मेदारी हम लेते हैं, हम
05:19make sure करें कि CCTV लगे, अच्छा मज़े की बात क्या है, कई बार आप देखेंगे CCTV लगा है, वो
05:23कामी नहीं कर रहा हूँ,
05:28मुझे लगता है, हमें टोकना पड़ेगा, कई आप भी ऐसी जगे बैठी होंगी, कई बार ऐसी जगे बैठी हूँ, जहाँ
05:35पर अनफॉर्चुनेटली मैं ही अकेली महिला होती हूँ, तो अब आप बैठे हैं, वहाँ पर जिस टाइप के jokes crack
05:39होते हैं, वो डिमीनी होते हैं, ब
05:54महिलाओ के लिए ये करेंगे, लेकिन हम सिर्फ मैनिफेस्टों में नहीं रह सकते हैं, क्या हम सब जो पार्टी कवर
06:00करते हैं, जो रैली में जाते हैं, क्या हम कह सकते हैं कि किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के काडर ने
06:05हमें अनकमफुटबल नहीं फील करवाया है, क्या रैल
06:20लोगों को लगता है किसी को पता नहीं चलेगा किस ने छू दिया, वहाँ पर जादा, इसलिए जो रालीज की
06:25बात आप कर रहे हैं, अब हम ये भी नहीं कह रहे हैं, कि वो सारे हो सकता है, उसी
06:27पार्टी के पुलिटिकल वरकर उस टाइम हो, हो सकता है, उसमें लोग भी ऐसे �
06:31जो सोच रहे हों कि वहाँ मौके का फाइदा उठाया है, ये सोच, अब दिल्ली के जितने भी इलाकों से
06:37आपने लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा हमारा रियालिटी चेक देखा, वो सारे भीड़-भाड़ वाले इलाके हैं, एक भी इलाका
06:45ऐसा नहीं है, जहां पर �
06:46ट्राफिक या फिर लोग नहों, इसके बावजूद हमें ऐसा कुछ नहीं मिला, जिसके आधार पर कहा जा सके कि दिल्ली
06:52में बेटिया सुरक्षित हैं।
07:18लगातार घूरना, लेकिन जैसे ही घूरने वाले पर ध्यान जाता है, उसकी बाटी लेंग्वेज बदलती हैं।
07:46ये कई घटनाओं का मिला जुलासर होता है।
07:55देखना, रोकना, पीछा करना, पास आना, मना करना, लोटना और फिर से पूछना।
08:03सिंटल दिल्ली, मूलचंद, कनोट प्लेस, वेस्ट दिल्ली, पटेल नगर, कीरती नगर, राज़ाओरी गारडन, जनकपुरी, तिलक नगर, साउथ दिल्ली, एम्स, लाजपत
08:13नगर, होजखास।
08:15अलग-अलग रिपोर्ट, अलग-अलग जगे, अलग-अलग कुरुश, अलग-अलग पल, लेकिन वहवार का मूल पैटर्म एक जैसा है,
08:23और बेचियों को खोने वाली पीडा के बारे में, प्रियांशी से सुनिए।
09:08तो महिलाओं का सीधा सा सवाल है, महिलाओं पर पाबंदी की बात तो होती है, लेकिन मर्दों के बरताओं पर
09:14न के लिए।
09:25और शायद यही असल बात, क्योंकि अगर किसी लड़की पर कोई शाहरी खमला नहीं होता है, तो अक्सतर मान लिया
09:31जाता है कि कोई समस्या ही नहीं, लेकिन इसे नॉर्मल मान लेने की आदर, महिलाओं के आत्म सम्मान को हर
09:38रोज थोड़ा-थोड़ा खाए जा रही है।
09:40The man was just sitting in front of me, rickshaw में, so he was just continuously gazing and it was
09:47थोड़ा सा अंकमफोटबल for me, that's all.
09:51And that's all, अभी आप यहाँ पर ख़ड़े हो, और नोबड़ी इस टारिंग अट रहे हो, क्वहीं से भी आ
09:54रहे हो?
09:54I think because I'm living here from last past, I think 3.5 years, and I've experienced a lot, I
10:02have, you know, learned to live in that way, you can say.
10:07Soche, Delhi के एक बेटी इस माहों में जीना सीख लेने को मजबूर है, क्योंकि तमाम दावों के बावजो, कुछ
10:14नहीं बगल था.
10:15I was traveling by metro, so it was really crowded, and someone was trying to, you know, touch you inappropriately,
10:27like just to take advantage of the crowd, but then I kind of moved away, went to the another coach,
10:33but I could feel it, that the bad touch, I could feel it, that someone was deliberately trying to touch
10:37me.
10:37I'm going in the park just for running, I feel that someone is gonna follow me, so I'm just keep,
10:43I just keep looking back, just to make sure that no one is following me home, following me back home,
10:47so yeah, it's like a constant fear for me, and I think other girls as well, living in Delhi.
10:53स्टलक पर घूरने वाली नजर का सर वहीं ख़त नहीं होता, ये महिलाओं का घर तक पीछा करता है.
11:02अगर मैं एक चीज आप से पूछू, कहां से शुरुआत करनी चाहिए, कातिकी?
11:07मुझे सच में नहीं पता कहां से शुरुआत करनी चाहिए, ये mindset है, lack of education है, upbringing है, कोई
11:14माव अपने बच्चे को ये तो नहीं सिखाएगा, जाके लड़कियां छेड़ो, मुझे नहीं समझ में आ रहा है क्या दिक्कत
11:19है.
11:19अब bringing अच्छी लड़कों को भी चाहिए, लड़कियों को भी चाहिए, और हम इस चीज को मानते हुए कह रहे
11:24हैं, लेकिन जो vulnerability है, उसकी वज़े से हम ये कह रहे हैं, कि लड़कियों को सेफ रखना ज़रूरी है.
11:31मुझे लगता है, बहुत छोटी बेसिक चीजे भी, जैसे उस ज़र में देख रहे थी, कि किसी नहीं लिखा कि
11:35आपका जो nappy बदलने वाला, जो diaper बदलने वाला station होता है, वो हमें सिरफ women washroom में दिखता है,
11:42men's में नहीं दिखता है, ये पिटरार्की के बहुत छोटे छोटे
11:45साइन्स है, जो हमारी daily life में invisible हो गए, अब हम notice ही नहीं करते है, अब हम इसको
11:49question ही नहीं करते है, और कोई दूसरी बार इस पर question नहीं करता है, आख उठाके नहीं बोलते है,
11:54अगर हम ये सारी चीजों को, छोटी-छोटी चीजों को हम daily basis पे परखना शुरू करें, तब हमें �
11:59जाके दिखेगा कि कहां से change करना है, जब इस चीज को भी बदलना होगा, चाहे छोटा सा कदम ही
12:08सही, लेकिन कदम तो लेना ही होगा, बहुत बहुत धन्यवाद आप चारों का हमारे साथ जोडने के लिए

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