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  • 25 minutes ago
दिल्ली की सड़कों पर कितनी सुरक्षित हैं लड़कियां? देखें रियलिटी चेक

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00:05इसकी कि आपने एक मिर्ट क्या समिखाएं?
00:19इसकी कि आपने एक मिर्ट क्या समिज्ञाय के आपका बूच रेंगे रेट कोछे हैं?
00:25यह रेट कोछे हैं?
00:25अश्ली कमेंट्स
00:28गंदे इशारे, खूरना, और पीछा करना, दिल्ली की बेटियां कभी ना कभी इनका शिकार होती है, भले ही वो चाहे
00:40कोई भी, किसी भी लाके में रहती हैं, किसी भी कॉलेज में पढ़ती हैं, बड़ी से बड़ी वार्दात भी दिल्ली
00:46को नहीं बदल पाती हैं, आखिर क्य
00:57लड़की के पास जाकर उसे खूरना, गंदी नजरों से किसी लड़की को असहज करना, दिल्ली की ये वो कड़वी हकीकत
01:07है, जो देश की राजधानी को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बनाता है, क्योंकि ऐसा करने वालों को कानून
01:13का खौफ नहीं, तब ही तो
01:26चार महिला रिपोर्टर, एश्वर्या पालिवाल, जेसीका गोयल, श्रया चटरजी और कार्तिकी शर्मा, दिल्ली की चार दिशाओं में एक सवाल के
01:34साथ हो, क्या आखिर दिल्ली इतनी असुरक्षित क्यों है, इस सवाल की जड़ में वो सोच है, जो निर्भया जैसे
01:43कान क
01:43के बाद भी दिल्ली में कुछ नहीं बदलने देख, 14 साल बाद भी गैंग रेप नहीं रुखते, बेटियों को बार
01:49बार सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ता है, अगर जैसे ये पार्कवल एंसिडेंट हुआ, आप उनको पकड़ के या
01:59तो कैपिटल पनिश्में�
02:11क्यों ने, क्यों उसे हर खत्रा महसूस होता है, क्यों उसे सम्विधान से मिले सुरक्षा के अधिकार का एहसास नहीं
02:18होता है, दिल्ली में बेटियों से अपराद के बाद को बड़ी बड़ी बाते होते, लेकिन इस अपराद से पहले जो
02:25होता है, उस पर किसी का ध्यान क्यो
02:33पीछा करना, अकेली लड़की को देखकर गाड़ियों का पीछा करना, बार बार रुकना, बिना लड़की की जाज़त के तरीबार, बेक
02:49हॉप और बेशर्मी के साथ प्रस्ताव रखने से पहले मंचलों को सौबार नहीं सोचना पड़ता
03:00क्या इसकी वज़व वो मान सिकता है, जो सड़क पर चलने वाली हर औरत ऐसा महसूस करवाते हैं, जैसे वो
03:06कोई पब्लिक प्रॉफर्टी की
03:09दिल्ली की बेटियों की इसी दर्द को चानने, दिखाने हम निकले, सुन्सान गलियों में
03:15ऐसी जहां पर नहीं, जहां आम तोर पर औरत से घहा जाता है, तुम वहां क्यों गई हैं?
03:21हम वहां गए जहां दिल्ली पस्ति, हज़ारों की भील होगी
03:28इसमें मेट्रो स्टिश, बाजार, अस्पतार, कॉलेज, मंदिर, आफिस एरिया और कनॉट प्लेस बाजार शामिल
03:48आज तक की चार महिला रिपोर्टर पूरी राज थानी में निकलती हैं
03:52बेटियों की सुरक्षा के सवाल के साथ, क्या खिर क्यों दिल्ली का कोई भीला का बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं
03:58है?
04:03नमस्कार मैं हूँ श्वीता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
04:07जो हिस्सा हमने आपको हमारी चार महिला रिपोर्टर का दिखाया, उनकी रिपोर्टिंग का
04:12कि दिल्ली में एक रात में जब वो अकेले ऐसा प्रतीत होता है
04:17आसपास चलने वाले लोगों को कि वो अकेले निकल रही है
04:19तो उनके साथ क्या होता है? किस तरह की बाते हैं? किस तरह की नजरों का सामना
04:24उन्हें करना पड़ता है?
04:25आज वो चार रिपोर्टर्ज मेरे साथ स्टूडियो में मौझूद है
04:30और हम उनका अनुभव, उनके एहसास, उनकी बाते, उनके रिपोर्ट्स
04:37हमारे सवाल, उनके जवाबों के साथ आपके सामने रखने वाले हैं
04:41हमारी चार रिपोर्टर्ज बीती रात दिल्ली में बाहर निकली, सडकों पर निकली, उन्होंने देखा कि किस तरीके से आते जाते
04:53लोग व्यवहार करते हैं, हमारे साथ एश्वर्या पालिवाल स्टूडियो में हैं, हमारे साथ श्रेया चटेजी हैं, हमारे साथ इस समय
05:00जैस
05:12नॉर्मल ऐसा भी नहीं है जो जिसके लिए कई दफा ब्लेम कर दिया जाता है कि भईया तुमने कपड़े ही
05:16उट पर टांग पहने थे तुम देखी गलत तरीके से रही थी आप नॉर्मल तरीके से कहां पर निकली थे
05:22अश्वरिया कहां गई थी आप
05:23मैं आपको बता हूँ शुर्ता मैंने यही कपड़े पहने थे और मैं जानकर के यही कपड़े पहन के आई हूँ
05:29कि आपको मेरे शायद पैड दिख रहे हैं आपको मेरे हाथ का इतना हिस्सा दिख रहा है इसके अलावा मतलब
05:35क्या मैंने अपने आपको ऐसे आउट-इंदी ओ�
05:51स्टेप है पहला स्टेप क्या होता है मैं अगर ऐसे बैटके आपको गूरने लग जाओंगी शुर्ता आपको अनकमफोर्टेबल नहीं लगेगा
05:57क्योंकि आप समझ रही है कि मैं कहां देख रही हूं मेरे मन में क्या चल रहा है और कितनी
06:03बार आप जहां जहां जाती है आप
06:21नो मीन्स नो मैलाओं को बहुत अच्छा लगा था वर डायलोग जब अमिताब अच्चन जी ने बोला था एक फिल्म
06:25के अंदर नो मीन्स नो आप इसको किसी भी तरह से गुमागे देख लीजे नो का मतलब नो ही होता
06:31है और येस का मतलब येस होता है एक गाड़ी आती है औ
06:50करके ताकि कल को कोई ये ना बोले किया रहे आप तो ऐसे इलाके में खड़ी थी मैं खड़ी हूँ
06:55दो तीन लोग पास कर रहे है एक जना आया थोड़ा दूर खड़ा हो गया वो सिग्रेट पी रहा है
06:58देख रहा है आप यूस्टू हो तो आप चुप रहते हो तो कहने को क्
07:04कुछ छूके नहीं किया देखा तो आपने एक गाड़ी आती है और यहां पर नहीं ये फिर हो जाता है
07:11शोइता ये सिर्फ एक महिला समझ सकती हो कि आप किसी पुरुष को ये बोलेंगे ना कि वो गवराट सी
07:15हो रही थी तो वो आपको पलटके यही बोलेंगा रहे वो तो �
07:19और इसने मुझे बोला कि आपको कहीं छोड़ दूँ तो आप देखेंगे इशारू में मैं उसे मना कर रही हूं
07:24कि मुझे नहीं समझ जा रहा तो शायद हाथ से समझ आ जाएगा नो थैंक यू फिर उसने बोला कि
07:29नहीं मैं अच्छा लड़का हूं तो मैंने बोला नो थैं
07:49समझ नहीं आई and it was terrifying मेरे पास कोई और वर्ड नहीं है जबकि मैं जानती हूं मेरे जहन
07:56में मैं जानती हूं कि मेरे बैक अप है मेरे क्यामरा पास खड़ें जो कि एक नॉमल लड़की जो सड़क
08:02पर खड़ी रहती है उस समय किसी भी कारणवश उसके पास की option नहीं होता है क
08:10की रिपोर्ट दिखाते हैं और फिर हम एक एक करके आप सब के experiences जानते हैं आपने अपनी उस पूरी
08:15reporting के दौरान क्या क्या फेस किया देखें इस report
08:41दिल्ली की प्रियांशी जब छोटी थी तो उसे लगा कि बड़ी होने पर वो सुरक्षित महसूस करेंगी लेकिन भारत जैसे
08:47देश में और दिल्ली जैसे
09:14दिल्ली की प्रियांशी सुरक्षा को लेकर इस कदर निराश की
09:20अब उसे मूल्चा निलाके में खड़ी आज तक संपात दाता एश्वर या पानिवाल के साथ हुए वाकिये से समझे
09:29वक्त शाम के सारे साथ बज़े जगर दिल्ली का मूल्च अंदस पता
09:37दिल्ली में लड़कियों को घूरना कितनी आम बात है उसे आपको घलत साइट से बिना हेलमेट लगा कर आ रहे
09:43ये दो पाइक सवार समझाएंगे
09:48राष्टे महिल आयूप रिपोर्ट कहती है कि देश के मुकाबले दिल्ली में लड़कियों को सारुज़े मिक स्थानों पर दो गुना
09:54पीडन का सामना करना पड़ता है
09:57इस आकड़े का सबूत अब आपको एश्वरिया के साथ हुआ वाक्या समझाएगा जिनके पास एक गाड़ी रुपती अकेली लड़की देख
10:05सीधे छेर देने का आफर होता है
10:23तो एश्वरिया को ये गाड़ी सवार बार बार बार द्रॉप कर देने काउप पर देता है
10:27वो भी आज तक संभादाता के बार बार मना करने के बावजूद
10:48दिल्ली की सरकोर बस स्टेंड और मेत्रो स्टेश्टों के बाहर अंचांग लोग अक्तर अकेवी लड़कियों को ड्रॉप कर देने का
10:56उफर देते हैं
10:57लेकिन है कोई परुपकार या मदद की भावना नहीं, बलकि अधिकान श्मामला में महिलाओं को भजा आके उनका यौन उत्पिडल
11:04करने या उनके साथ गंभीर अपराद करने की एक सोची समझी आपराधिक साजिश होती है। पाग जूदिस के ये सिलसला
11:11नहीं रुखता है�
11:21बलकि अश्वरिया के साथ भी यही हो रहा है और तीसरी बार साफ तौर पर बना करने के पाद ये
11:26गाड़ी सवार चला जाता है।
11:30कई बार अपराद की अच्छी गाड़ियों में सब भी दिखने वाले कपड़ों में आते हैं ताकि लड़किया उन पर आसानी
11:36से भरुसा कर लें। इसलिए इस तरह ड्रॉप करने का ओफर और उसकी तरब से की जाने वाले जिद ख़धरनाक
11:42हो सकती है।
11:44मूल चेंद स्पताल के बाहर भी ऐसा ही कुछ होता है जहां ट्रैकिक के बीच आते जाती लोगों के बीच
11:50अकेली खड़ी लड़की पर सब की नजर जाती है।
11:57इसी बीच एक गाड़ी आकर रुपकी जिसमें सवार ब्रैवा तब तक ध्रॉप करने का ओफर देता है जब तक उस
12:03आदमी को यकीन नहीं हो जाती है कि लड़की के जवाब का मतलब सच मिद्ना ही है।

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