00:00अगर आप एक महिला है तो आपने वो फिल्म देखी होगी जिसमें अमिता बच्चन ने बहुत साफ कहा है
00:05No means no
00:07अगर आप किसी को मना करते हैं तो उसका मतलब है कि आप उस चीज को नहीं करना चाहते
00:12नहीं का मतलब नहीं होता है
00:13लेकिन मेरे साथ जो experience था उसमें मुझे यही समझ आया
00:17कि एक बार नहीं, दो बार नहीं, तीन बार भी अगर आप किसी को मना करते हैं
00:21तो हो सकता है कि उनकी वो समझ में ना आता हो
00:23लेकिन उनका ये ना समझना ही महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा दिक्कत का कारण बन चुका है
00:28हम बहुत सारे crowded जगाओं पे जाते हैं, हम मंदिर जाते हैं, हम पिचर देखने जाते हैं, हम अपने दोस्तों
00:33के साथ बाहर जाते हैं
00:35हमने इस चीज को आदमियों को महिलाओं को एक तरीके से देखने को नॉर्मल कर दिया है, लेकिन वास्तविक्ता यही
00:41है कि ये नॉर्मल नहीं है
00:42कहीं न कहीं हमें एक रेखा खिंचरी पड़ेगी और नो मींस नो का मतलब जो है वो सुसाइटी में बताना
00:49पड़ेगा, लड़कियों को भी और लड़कों को भी
00:53दिल्ली की सलकों पर लड़कियों की आज़ादी, उनकी गरिमा का हनद होना, कोई नई बात नहीं
00:58आजी तब के कैमरे में जो कैद हुआ, बात उससे भी आके बिगड़ जाती है, जैसा 23 तारिक दिल्ली के
01:04मुखर जी नगर जिस वक्त दिल्ली की लड़कियां कालकाजी गैंगरेव के बाद आख रोशिक थी, पुलिस कड़गरे में थी, तब
01:12मुखर जी नगर में दो छाक्
01:15चार गाडी सवार लड़कों ने गाडी में खीचने की कोशिक किया, यह सब कुछ नौर्फ केंपस में हुआ
01:46दिल्ली में बेटियों को लेकर, पुलिस हर बड़ी वार्दात के बाद जो दावे करते हैं, वो चंद घंटे भी नहीं
01:52ठैर पाते हैं।
02:15जो चीज उस समय होती थी, आज भी वही होती थी, कुछ तो समाज को आईना दिखाना है, कुछ प्रिशासन
02:20को आईना दिखाना है, कुछ सरकारों को आईना दिखाना है, कुछ पुलिस को आईना दिखाना है, श्वयत, कुछ बदला है
02:26इतने सालों में भी, मुझे तो याद
02:45एक तो होता है कि आप खड़े रहे तो हम सब को पता है कि कोई ना कोई आपको गूर
02:49के देखेंगा इतना नॉर्मलाइज कर दिया हमने इस चीज को कि हम आगे ही नहीं सोचते कि यह गलत है
02:54और इसलिए मैं होस्कास विलिज गई वहापे मैंने देखा कि लोग ना बस बैठे र
03:13वह से टोकता नहीं है थोड़े आगे जाके वहापे ने एक हनुमान मंदिर है थोड़ा एंड में अगर आप हाउसकास
03:18में जाओ वहाँ पर चार-पांच लोग ऐसे बैठे है एक औरत आस्था में जुक रही है अब उसे भी
03:23देख रहे हो एक और अगर अगर अपनी आस्था
03:25का में भी सूरक्शित नहीं हैं तो कहाँ सुरक्शित है तो यह सवाल जैसा कि आपने कहा ना सिर्फ पुलिस
03:30से नहीं है समाध से है क्योंकि हमेह ना इक परफेक्ट रेड विक्टिम एक परफेक्ट मिलस्टेशनका विक्टिम उनका इntजार नहीं
03:38करना चाहिए तब हमें आ
03:53कर लिया आकार्तिए तो I think problem वहीं से शुरू हो जाता है और लोग भी बोलेंगे कि अरे
03:57देखी तो रहा था तुमको क्या इतना problem हो गया तो वही तो हमारे प्रूफ भी नहीं है कि हमारे
04:02साथ कुछ गलात हो रहा हमारे साथ
04:03प्रूफ नहीं है उसको एविदेंस के तोर पे ना पुलीस को दिखा सकता है ना किसे और कुछ कर सकते
04:07हमने आपकी रिपोर्ट देखी थे कि आप सोथी पुलीस को जगा रहे देखिए हमार साथ क्या हो रहा है मेरे
04:12साथ क्या हुआ हमें इमस पे गई थी एंड एक जग जा के �
04:15खड़ी होगे थी सिदा सिर्फ आइड डिंट डिसाइड कि मैं एक घंटे के लिए खड़ी रहेंगी लेकिन ये पांच मिर्ट
04:22के अंदरे जो गाड़ी आने चालू होगी मेरे आसपास इप मेड मी स्टैंड देर मैं खड़ी रही वहां पे कोई
04:27यहां से आ रहा है कोई आग
04:43कोई गाड़ी जा के आगे जा कि खड़ी होगे मैंने मना किया फिर आगे जा के खड़ी होगी फिर पीछे
04:47से आई फिर आगे से उस टाइम पर उचे सच में डर लगने लगा कि वाट अगरिंग हो रही है
04:53वोट इफ की एक दम से मुझे अंदर गारी में खीचके ले जा मु�
05:09तो चलो मेरे पास recording में हैं, but what if, नहीं होता, मैं safe हूँ, मुझे पता है, कितनों के
05:15साथ होता है, कितनी बार मुझे साथ हो चुका है, कोई rate लगा रहा है, मेरा वहाँ से खड़े होता
05:21है,
05:21करती कि actually, सही बात यहीं कि ऐसा नहीं है कि इंडिया के बाहर नहीं होता है, लेकिन इंडिया के
05:26बाहर अगर आप complain करते हैं, तो आपको चार लोग seriously लेने वाले भी मिलते हैं, वरना ये बोलने वाले
05:30भी अगर आप कहीं पर खड़े हैं, कहीं जाते हैं, from Australia to South Africa, मैंने कई जगो
05:39ही आएगा जब आप चेंज करने को तयार होंगे, जैसे का आपका क्या पूरा experience रहा, ये इस तरह की
05:46report के लिए पहली बार आप गई थी बाहर, इस तरह की report के लिए, इस तरह के social experiment
05:50के लिए में पहली बार गई थी बाहर, और मेरा भी काफी similar experience था जैसे बाकी लोगों का था,
05:55म
05:55मैं कॉलेजिस के पास गई, एक वेस्ट डेली में गई, भारती कॉलेज के पास गई, मैं एक हापी स्कूल के
06:01पास की वहाँ पे और वो सारे इलाके, और हम लोग जब ये experiment करे थे, तो हम ये पाच
06:05से नौ बजे के बीच में ही कर रहे थे, तो हम ये बहुत ज्यादा रात का स
06:20साड़े नौ बज़रे होंगे, जब मैं उधर एक इलाके में वहाँ पे खड़ी थी और एक गाड़ी थी जो फॉलो
06:25करने लगी, और पहले फिर हमें रियलाइज हुआ कि अच्छा ये गाड़ी फॉलो कर रहे है, तो मुझे लगा कि
06:30ठीक है, मैं खड़ी हो जाती हूँ, शा
06:48उसने अपनी सिग्रेट जलाई और वहाँ पे खड़े होके, मुझे गूरते गूरते अपनी सिग्रेट पीने लगा, और उस समय तो
06:54हाँ ये सब रिकॉर्ड हो रहा था, तो मुझे पता था कि कोई है साथ में, बट अगर मैं सही
06:59में अकेले होती, तो कितना डरावना है, उस
07:18आगे चला गया, हमारे लिए भी ये काफी नॉर्मल हो गया है, कि आप कही भी जाते हो, आपको लोग
07:23घूरते हैं, आप तो इतना देखते भी नहीं कि कितने लोग आपको घूर के देख रहे हैं, कितने लोग आपके
07:27पास खड़े हो जाते हैं, ये कैमरा पर एक और भी हु�
07:42जिसमें आप पीछे से जा सकते हो, आप यही से क्यों जा रहे हो, और ये सब इंस्टेंस इतने नॉर्मल
07:46हो गया है, अब ऐसा लगता भी नहीं है, कि हाँ मैं इसके बारे में किस से शिकायत करूँ, क्या
07:51बोलू, मैं अपने दोस्तों को आके बोल दूँगी, अब परिवार
07:55में तो मैं क्या ही बताओ, किसको क्या बोलू, मतला भी कप से होता आ रहा है, कितना नॉर्मल लगने
07:59लगा है, बट अच्छी बात है कि अब हम इसके बारे में आवाज उठा रहे हैं, बट हम आपकी रिपोर्ट्स
08:03देखते हैं, जो इंडिया टोटे ने पहले भी की है, 2012 में
08:07और तब सिले के अफ़ तक तो कुछ भी नहीं बदले, तो हमारी रिपोर्टेंग से भी क्या ही बदलेगा, ऐसा
08:11भी लगता है, अगर एक व्यक्ति भी बदल पाए हम, तो मुझे लगता है कि एक शुरूात होगी, ना का
08:17मतलब ना होता है, इतनी छोटी सी बात दिल्ली के व
08:34पारदात की वज़े बनती है, क्योंकि घूरना हो, या फिर अकेली लड़की को देखकर उसे ड्रॉप करने का ओफर देना
08:40हो, ये सारी हिम्मत लोगों में इसलिया आती है, क्योंकि उन्हें इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता, मतलब गलती तो
08:48तब मानेंगे जब लगेगा
08:49कुछ गलत कर रहे है, खबरदार करने वाली बात ये है कि बस, मेट्रो, सड़क, इन सभी जगों पर महलाओं
08:57के साथ बज सलुकी करने वाले ज्यादतर पुरुशों की मानसिक्ता यही होती है, वो इसे अपराद या गलती मानते ही
09:04नहीं है, मतलब शुरूआत यहीं से करने क
09:18कोईल गई, इस दोरान जेसिका कोईल के साथ वो सब कुछ हुआ जिसका सामना दिल्ली की हर लड़की गए, जो
09:35अब इतना नॉर्मल हो चुका है कि किसी का थ्यान नहीं जाए, सिवाए दिल्ली की बीठियों में, जो ये सब
09:40सहने को मजबूर है, मतलब लड़की को देखकर �
09:43पाइक सवारों का रुखना, अजनभियों का घूर कर देखना, पीछा करना, कार से उतर कर इंतजार करना, पटेल नगर और
10:03कीर्ती नगर में, जेसिका को चलते फिर के लोग बार बार पाइक और कार रोग कर पस घूरते हैं
10:12ये देखे, राज़ाओरी गार्डेन बस स्टॉप पर बिना किसी साफ वज़ा के बाइक वाले रुख जाते, जनकपुरी में हैप्पी मॉडल
10:19स्कूल के पास, एक कार कुछ दूर तक जेसिका का पीछा करती कैमरे में कैद बुर्ट, ये आदमी भले ही
10:27जेसिका के पास नही
10:38लड़की देखकर एक कैब ड्रैवर रुखता है, गारी से बाहर निकलता है, रिपोर्टर के आगे से होकर देखता हुआ चाता
10:44है, सिगरेट सुलगा कर वापस लटता है, और फिर गारी के पास सिगरेट पीते हुए बार बार देखता है, फोन
10:50पर बात करता है, जिस सिलसला
10:526 मिनट तक चलता है इस आदमी की हरकतों को देखते हुए जेसिका इस गाड़ी से आगे जाकर खड़ी हो
10:57जाती है इसके बाद भी यह वही रहता है और थोड़ी दिर बाग चला जाता है देखने में भले ही
11:02आम लग रहा हो लेकिन एक लड़की के नजरगे से रात के वक्त में
11:06दिल्ली की सड़क पर किसी अजनवी का इस तरह से पीछा करके रुकना बार बार देखना अलर्ट कर देता है
11:12दिल्ली में सड़क पर एक औरत के लिए कुछ नहीं हुआ का मतलब हमेशा कुछ नहीं हुआ नहीं होता क्योंकि
11:18कुछ नहीं हुआ में लड़की का पीछा किया ज
12:02और खराब लाइटों की हकीकत दिखाता है।
12:02और किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई।
12:04उन्हें लगा कि एक आम जिन्दगी की तरह मुझे इसमें चलते ही रहना चाहिए।
12:09जब तक कुछ गंभीर नहीं हो जाता, तब तक इसको शिकायत के लायक भी नहीं समझा जाता।
12:14लेकिन एक औरत होने के नाते आप वो फरक समझते हैं।
12:18पहाँ जाता जाता जाता हैं।