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  • 31 minutes ago
दिल्ली की सड़कों पर अकेली महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

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00:00हम समझ सकते हैं कि बदलाव एक जटके में नहीं आ सकता लेकिन बदलाव के शुरुआत कहीं पर तो होगी
00:04और हम ये भी नहीं कहते हैं कि सारे के सारे लड़के एक जैसे हैं नहीं इनमें ऐसे लोग भी
00:11हैं जो बचाते भी हैं रक्षा भी करते हैं आखिरकार हम सब अपने भा
00:29क्या मैं उन लड़कों को देख रहे हैं, उन लोगों को देख रहे हैं, उसको देख कर सोचिए कि अगर
00:36कोई बिना किसी साथी के, कहीं पर जा रही हो, किसी के पास कोई साधन न हो, गाड़ी न हो,
00:43पैदल जाना हो अपने घर तक, किन चीज़ों से होकर वो नहीं गुजरेंग
00:56थे जिसको लेकर कोई भी असेहज हो जाएगा डाक कॉन अस्तियो मुझे लगता है ये हमारे देश की राज़दानी दिली
01:04की एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि बहुत सारे आपको ऐसे इलाके मिलेंगे जो वैलिट नहीं होते हैं वहाँ पर
01:10किसी को खीचना किसी के साथ ब
01:27हमने कोशिश ये करी दिखाने की और हम सब जो हमने फेस किया वो ये कि अप्रोच तो सेकंड था
01:32वो जो गेज थी आप सोचिए आप मंदिर जा रहे हैं और जाधा तर लोगों की हमाई जो आस्ता होती
01:37है हम जब मंदिर की डेली इस पे पहुंचते हैं हम जुक कर उसको चू
01:58सब्सक्राइब करें जब मंदिर कर रहे हैं और जो कालका जी वाला केस है वह भी तो एक मंदिर से
02:03जुड़ा हुई है मंदिर में दर्शन करके गई जनम दिन पर उससे अनफॉचिनिट क्या हो सकता है वो कोई भी
02:09जनम दिन पर अप कमफुटबल नहीं रह पाएगी उसके सा
02:11ऐसा दर्दनाक सा हाथसा हो गया अपने जनम दिन पर वो मंदिर गई और उस पूरी घटना क्योंकि एक बीट
02:17ऑफिसर से में बात कर रहे थी और ने कहा कि वो जो आस्था कुंछ पार्क है वो ऐसे जगह
02:22पे स्थित है कि अगर आप चाहो तो आप कालका जी मंदिर का दर्श
02:41सकते हैं तो अगर तो कहते हैं कि नहीं वो तो एक बॉइफरेंड के साथ गई अगर वो अपने बॉइफरेंड
02:46के साथ गई तो भी क्या उसे ये भी तो कहा था ना उसने कि तुम अपने घर में बात
02:51कर रहा हूं तो मतले क्यों नहीं ऐसा हो सकता है अगर मैं अपने बॉइ�
03:09कर रहे थी कि जम्मुई की घटना के बाद महिलाओ की ऐसे बाइटे आ रही थी कि वोशली मेडिया पर
03:14रील्स चल रही है ऐसे कही सारी जुसमें वो कह रही है कि भाई शादी ही तो करने ले जा
03:18रहा है तो मतलब यह जस्टिफाइ करने भी लगते हैं लोग उसके बाद लेकिन
03:22काती की आप से इसलिए मैं यह पूछ रही हूँ क्योंकि अगर मैं कॉंट्रास्ट के तौर पर देखू जैसे का
03:27काफी अपने बात्चीत में भी सॉफ्ट स्पोकन रहती है उतना पलट कर वो स्नाप नहीं करेंगे आप स्नाप कर रही
03:33थी सामने जो आपको बोलने आ रहा था
03:34आपने पलट कर सीधा उसको कंफरंट किया कंफरंट करने पर वो बैक फूट पर जा रहे थे नहीं नहीं वहीं
03:40खड़े थे घूम कर आ रहे थे वो पीछे से आ रहे थे वो आगे से आ रहे थे वो
03:45वहीं खड़े थे एक इंसान I would I don't know बट हाँ वो एक आड़ोकेट थे he was playing subtle
03:50कि मतलब मैं ही जाओंगी उनसे पूछाँगी कि मैं ही अपना कुछ अप्रोच लेके जाओंगी कि हां मैं कॉल गूल
03:57हूँ टाइप आप मुझसे पूछो मैं लेक में चलूँगी
04:00ऐसे काफी लोग थे वो आदा घंटा खड़ा रहा है मैं एक घंटा थी माप पर आदा घंटा खड़ा रहा
04:04वहाँ बाहर खड़े हो के मुझसे मुझे देख रहा है बात करने की कोशिश कर रहा है किसी से फोन
04:08पे एक और
04:09काफ वाला आया काफ तो मतलब और ही मुझे स्केरी लगा क्योंकि हम लड़किया पुब्लिक ट्रांसपोर्ट को और ऐसे ट्रांसपोर्ट
04:16पे यखीन करती है ट्रस्ट करती है कि हम हमारे डेस्टिनेशन पे धंग से पहुँचाएं लेकिन वही सोर्स ओ फिर
04:23बन रहा है हमाल
04:36काफ जाके लड़की खड़ी है तो ड्रॉप कर दोगे कहीं पीपी जाके मतलब घर पी नहीं जा पहेंगा हम कर
04:44दो अरे
04:46आपने देखा कि कैसे हमारी एक समवाधाता को एक गाड़ी सवार ने बारुबार ड्रॉप करने का उफर दिया तो एक
04:52गाड़ी वाले को कई मिंटों तक रात के वक गाड़ी खड़ी करके हमारी रिपोर्टर को घूरता रहा कई बाइक सवारों
04:59ने भी यही किया कई लोग �
05:00जान बूज कर, रिपोर्टिंग के दोरान करीब से निकले, चिंदा की बात यह है कि यह हालाद दिल्ली के किसी
05:07एक इलाके के नहीं हैं, एम्स, लाजपत, नगर, हर जगे यही होता मिला, सबसे खबरदार करने वाली बात, पुलिस की
05:15गहर मौजूद की.
05:26दिल्ली का लाजपत और एम्सिलाका, जहाच तक समपाता था कारतिकी शर्मा सड़किनारे खड़ी, कारतिकी एम्सिलाके के पास एक जगा पर
05:36लगबग एक खंटे तक खड़ी रही,
05:41करीब साट मिनट के अंदर साथ से आठ गाडियाओं के पास रूगी,
06:03ज्यादा तर ने उन्हें कहीं छोड़ने की पेशकर्ष भी की,
06:06कुछ हिच किचाए, वहीं कई बापस आए, मना करने के बावजूद,
06:13और फिर ट्रॉप करने वाले में वो बात कहीं जिसका सामना दिल्ली की लड़कियां अकसर करती,
06:43तो दिल्ली में गलड़कियां, अगर सालक पर अकेली खड़ी हैं,
06:46तो अजनवी के दिल्ली ये मौका होता है,
06:50तभी तो घंटे भर में साथ से आठ गाड़ी वाले रुपते हैं,
06:54रिपोर्टर के मना करने के बाद दो से तीन गाड़ीयां वापस लॉटते हैं,
06:58दो तीन तो पूझ भी लेते हैं,
07:03मैं किसी की तरफ नहीं जा रही थी,
07:05मैं बस वहां खड़ी थी, मैं लिफ नहीं मांग रही थी,
07:08लेकिन लगबग एक घंटे के अंदर वहां पर कई गाड़ीयां आके रुख गई,
07:12कुछ ने मुझे कहीं छोड़ने की पेशकश की,
07:15कुछ ने मेरे मना करने के बावजूद वह वापस आये मुझसे पूछने के लिए,
07:20और कुछ मर्द तो ऐसे थे, जोनों ने मुझसे पूछा, आप मिलेंगी.
07:24एक औरत के लिए ये सुनना छोटी-मोटी बाते लग सकती हैं,
07:29लेकिन जब ये बार-बार हो, तो हर मर्द, हर गाड़ी, हर मोड,
07:34आपको देखने वाला हर इंसान, आप उनका हिसाब किताब करने लगती हैं.
07:40तो पुलिस की मौझूदगी या गेर मौझूदगी,
07:44जैसिका, आपको पुलिस की प्रेजन्स दिख रहा था उने अरिया से?
07:48नई, अच्छली, अब मैं सोच रही थो, मुझे कहीं पे भी पुलिस आसपास नहीं दिखी,
07:52मैं जिस भी लाके में गई, मैं वेस्ट दिल्ली में थी,
07:54मैं वहाँ कॉलेज के पास गई, वो एरिया भी अच्छे से लिट नहीं था,
07:57वहाँ पे अच्छी लाइट भी नहीं थी, और एक हैपी स्कूल था जहां से मैं गई,
08:01मैं एक मेट्रो के पास भी गई, यहाँ पे हो सकता है,
08:24मेरे एक्स्पिरियंस में,
08:26इश्वरे आपको दिख रहा है था पुलीस वाले,
08:29नहीं, शुटा मैं तो,
08:32LSR के दो गेट है, एक में गेट है, एक बैक गेट है, उसके पीछे एक पार्क है,
08:36तो बैक गेट से निकलते ही, जरूर वहाँ पे पुलीस वान खड़ी थी,
08:54DCP West का office is a stone throw away, लेकिन वहाँ कभी भी light नहीं है, वह सही कह रही
08:58है,
08:58वहाँ, it's a black spot, कि ओवर कॉन्फिदेंस में नहीं है, बता नहीं,
09:01सच में DCP West office मतलो, अब चल के जा सकते हो, लेकिन वहाँ पर light नहीं है,
09:05और अगर मेरी बात करें, तो कुछ जगा है, जैसे माता सुंदरी कॉलेज के बार मुझा ITBP की तनाती दिखी,
09:11ITBP वाले वहाँ पे तनाती थे कि भाया चेरकानी नहीं हो, और बाकी श्वैता आपको भी पता है कि हमें
09:18ना विजूल मिलते हैं,
09:19पुलिस गोरे पे सवार हो के पेट्रोलिंग कर रही है, तो यह ना दिखावा हो गया है,
09:23तो आप तो क्राइम भी कवर करती है, क्यों नहीं पुलीस की प्रेजन्स को पाती है, इतने शॉट स्टाफ है,
09:28तभी आपको ITBP परसनल बुलाने पर रहे है,
09:30तो फिर आप सारे कॉर्नर्स को लाइट अप क्यों नहीं कर ले रहे हैं, वो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है, हमने
09:35अभी कितने बार सोनाएं कि हमने इतनी सीस्रीवी लगवा दिये, यह लगवा दिये जाएंगे, कि पुलिस की पट्रॉलिंग हो रही
09:53है, फिर वापस स
09:53सब शानत हो जाता है, दिली में हमने अपनी इस परताल के दौरान कई महलाओं से भी बात की है,
10:00उनमें से ज्यादतर ने बताया कि वो जब छोटी थी, तो उन्हें लगता था कि बड़े होने पर ठीक हो
10:05जाएगा, सुरक्षित महसूस करेंगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हु�
10:08बलकि असुरक्षा का जो भाव था वो बढ़ता ही चला गया, विटंबना देखिये, ये डर सिफ लड़कियों तक सीमत नहीं
10:14है, दिली में लड़कियों के भाई तक अपनी बहनों की सुरक्षा को लेकर उतने ही चिनते थे, इस रिसेंटली आपनी
10:26शुरक्षा को लेकर उत
10:38दिली का अवद, जो अपनी बहन के बाहर जाने पर परिशान हो जाता है, क्योंकि बाहौल बहुत खराब है
11:02दिली में लाखों परिवार रोज इसी डर से गुजरते हैं, बेटी जब तक घर के बाहर रहती है
11:07उसकी सुरक्षा की चिंदा सताती रहती है
11:11भाई के तौर पर अवद भी परिशान रहते हैं
11:14लेकिन उससे ज्यादा परिशानी वारी बात उन्हें लोगों का रवया लगता है
11:21अलेजोस, इसनाँ कन्ट था और मुड़ में एंपाना रहते हैं
11:23झारोस, ओप्र परिशानी वारी क्या चाई यड़ाए लिज बीड़ствен बां यज वीड़ आए लोगता बिलिग आई अँग्वादा है
11:37वेखल, वेखल, वेखल, वेखल बड़ीज और बशाट।

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