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महिलाओं के लिए दिल्ली क्यों इतनी असुरक्षित? देखें आजतक की 4 महिला रिपोर्टर्स की पड़ताल
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00:15अपने एक मिर्ट क्या समझाए?
00:23आप क्या भूच रहे हैं? रेट भूच रहे हैं?
00:26अश्ली प्रमेंट्स
00:28गंते इशारे, खूरना
00:33और पीछा कर दिन्ली की बेटियां कभी ना कभी इनका शिकार होती हैं
00:39भले ही वो चाहे कोई भी हैं
00:41किसी भी लाके में रहती हैं, किसी भी कॉलेज में पढ़ती हैं
00:44बड़ी से बड़ी वार्दात भी दिन्ली को नहीं बदल पाती हैं
00:47आखिर क्यों दिल्ली में अखेली लड़की देखकर उसके करीब आना लड़की के पास जाकर उसे खूरना गंदी नजरों से किसी
01:02लड़की को असेहज करना दिल्ली की ये वो कड़वी हकीकत है जो देश की राजधानी को महिलाओं के लिए सबसे
01:10असुरक्षित शहर बनाता है
01:11क्योंकि ऐसा करने वालों को कानून का खौफ नहीं तब ही तो कालका जी जैसे कांड होते हैं
01:21दिल्ली में बेटिया कितनी सुरक्षित है इससे खबरदार करने के लिए आज तक की चार महिला रिपोर्टर एश्वर्या पालिवाल जेसी
01:29का गोयल श्रेया चटरजी और कार्तिकी शर्मा दिल्ली की चार दिशाओं में एक सवाल के साथ हो क्या आखिर दिल्ली
01:36इतनी असु
01:37प्रक्षित क्यों है इस सवाल की जड़ में वो सोच है जो निर्भया जैसे कांड की बाद भी दिल्ली में
01:45कुछ नहीं बदलने देगा 14 साल बाद में गैंग रेप नहीं रुखते बेटियों को बार बार सलक पर उतरने को
01:51मजबूर होना पड़ता है
01:53कि उनको डर नहीं है अगर जैसे यह पार्कवल एंसिदेंट हुआ आप उनको पकड़ के या तो कैपिटल पनिश्मेंट दो
02:00या फिर आप उनको जेल में डालो ताकि लोग उनसे डरे फियर क्रिएट करने की जरुवत है दाट्स हाओ आई
02:05सी एट
02:08अकिर दिल्ली की साथ पर अकेली चलती महिला सुरक्षित क्यों ने क्यों उसे हर खत्रा महसूस होता है क्यों से
02:15समविधान से मिले सुरक्षा के अधिकार का एसास नहीं होता है
02:20दिल्ली में बेटियों से अफ्राद के बाद को बड़ी बड़ी बाते होती
02:23लेकिन इस अफ्राद से पहले जो होता है उस पर किसी का ध्यान क्यों नहीं चाते
02:29क्यों घूरना
02:33पीछा करना
02:35अकेली लड़की को देखकर गाड़ियों का पीछा करना
02:38बार-बार रुकना
02:43बीना लड़की की जाज़त के खरीवार
02:49फेक हॉप और बेशर्मी के साथ प्रस्ताव रखने से पहले
02:52मनचलों को सौबार नहीं सोचना पड़ता
03:00क्या इसकी वजह वो मांसिकता है
03:02जो सड़क पर चलने वाली हर औरत ऐसा नहसूस करवा दे
03:06जैसे वो कोई पब्लिक प्रॉफर्टी थी
03:09दिल्ली की बेटियों की इसी दर्द को जानने दिखाने हम निकले
03:13सुंसान गलियों
03:15ऐसी जहां पर नहीं जहां आमतार पर औरत से कहा जाता है
03:18तुम वहाँ क्यों गई थी
03:21हम वहाँ गए जहां दिल्ली बस थी
03:23हज़ारों की भीड हो इसमें मेट्रो स्टिफ, बाजार, अस्पतार, कॉलिज, मंदिर, ऑफिस एरिया और कनौट प्लेस बाजार शामी है
03:48आज तक की चार महिला रिपोर्टर पूरी राज थानी में निकलती है
03:52बेटियों की सुरक्षा के सवाल के साथ
03:54क्या खिर क्यों दिल्ली का कोई भीला का बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं है
04:03नमस्कार मैं हूँ श्वीता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
04:07जो हिस्सा हमने आपको हमारी चार महिला रिपोर्टर का दिखाया
04:11उनकी रिपोर्टिंग का कि दिल्ली में एक रात में जब वो अकेले ऐसा प्रतीत होता है
04:17आसपास चलने वाले लोगों को कि वो अकेले निकल रही है तो उनके साथ क्या होता है
04:21किस तरह की बातें किस तरह की नजरों का सामना उन्हें करना पड़ता है
04:25आज वो चार रिपोर्टर्ज मेरे साथ स्टूडियो में मौझूद है
04:30और हम उनका अनुभव, उनके एहसास, उनकी बातें, उनके रिपोर्ट्स, हमारे सवाल, उनके जवाबों के साथ आपके सामने रखने वाले
04:41है
04:41हमारी चार रिपोर्टर्ज बीती रात दिल्ली में बाहर निकली, सडकों पर निकली
04:48उन्होंने देखा कि किस तरीके से आते जाते लोग व्यवहार करते हैं
04:54हमारे साथ एश्वर्या पालिवाल स्टूडियो में हैं, हमारे साथ श्रेया चटेजी हैं
04:58हमारे साथ इस समय जैसिका गोईल हैं और कार्तिकी हमारे साथ हैं कार्तिकी अरोडा
05:06ये एक एक करके आप सब बताईए, सामान्य कपड़े पहने, नॉर्मल, ऐसा भी नहीं है
05:13जो जिसके लिए कई दफा आप ग्लेम कर दिया जाता है कि भाईया तुमने कपड़े ही उट पर टांग पहने
05:17थे
05:17तुम देखी गलत तरीके से रही थी, आप नॉर्मल तरीके से कहां पर निकली थे श्वर्या, कहां गई थी आप
05:23मैं आपको बता हूँ, श्वर्यता मैंने यही कपड़े पहने थे, और मैं जान करके यही कपड़े पहन के आई हूँ,
05:29कि आपको मेरे शायद पैड दिख रहे हैं, आपको मेरे हाथ का इतना हिस्सा दिख रहा है, इसके अलावा, मतलब
05:35क्या मैंने अपने आपको ऐसे आउट
05:51स्टेप है, पहला स्टेप क्या होता है, मैं अगर ऐसे बैठ के आपको गूरने लग जाओंगी, श्वर्यता आपको अंकमफोर्टेबल नहीं
05:57लगेगा, क्योंकि आप समझ रही हैं कि मैं कहां देख रही हूँ, मेरे मन में क्या चल रहा है, और
06:02कितनी बार आप जहां जहां �
06:04अब भीडवाले इलाकों में आप भी जाती है, आपने देखा होगा कि भीडवाले इलाकों में इतनी जगे खाली है, लेकिन
06:10वो चिपक के इतनी सी जगे में से ही निकलेंगे, अरे भाई क्यों इतनी सी जगे से निकलो गया, यही
06:15एक्सपीरिंस यहां इस बार भी रहा है, �
06:17इस बार वो फिल्म है ना श्विता आप नो मीन्स नो मैलाओं को बहुत अच्छा लगा था वो डायलोग जब
06:24मिताब अच्छन जी ने बोला था एक फिल्म के अंदर नो मीन्स नो आप इसको किसी भी तरह से गुमा
06:29के देख लीजे नो का मतलब नो ही होता है और येस का मतलब �
06:33एक गाड़ी आती है और ये लसर के पास है क्योंकि वहाँ पे लगभग सत्रा सू पीजी हैं बहुत सारी
06:39बच्चियां वहाँ पर पढ़ने जाती हैं पीजी में रहती हैं रात को आट बज़े के आसपास बाहर भी निकलती हैं
06:44साड़े साथ बज़े का समय था महज लसर से द
07:02ने तो कुछ नहीं किया हां भई आपने कुछ छूके नहीं किया देखा तो आपने एक गाड़ी आती है और
07:08यहां पे नहीं ये फियर हो जाता है शोटा ये सिर्फ एक महिला समझ सकती हो कि आप किसी पुरुष
07:13को ये बोलेंगे ना कि वो गवराट सी हो रही थी तो वो आप
07:16को पलट के यही बोलेंगे रहे वो तो इतनी दूर था ये गाड़ी आती है और इसने मुझे बोला कि
07:21आपको कहीं छोड़ दू तो आप देखेंगे इशारू मैं मैं उसे मना कर रही हूं कि भई मुह से नहीं
07:25समझ जा रहा तो शायद हाथ से समझ आ जाएगा नो थैंक यू
07:28फिर उसने बोला कि नहीं मैं अच्छा लड़का हूं तो मैंने बोला नो थैंक यू तो दूसरी बार मैंने मना
07:33किया तीसरी बार उसने बोला आप शोर हैं तो मैंने बोला नो तो मैं शोर हूं तो थोड़ा सा आगे
07:39गया महस पचास मीटर फिर वापस आया तो आप शोर हैं क
07:56जानती हूँ कि मेरे क्यामरा पास खड़ें जो कि एक normal लड़की जो सड़क पर खड़ी रहती है उस समय
08:03किसी भी कारण वश उसके पास की option नहीं होता है कि उसका कोई backup नहीं होता है पहले हम
08:09इश्वरिया आपकी report दिखाते हैं और फिर हम एक एक करके आप सब के experiences जानते हैं आ
08:14आपने अपनी उस पूरी reporting के दौरान क्या क्या फेस किया देखें इस report
08:40दिल्ली की प्रियांशी जब छोटी थी तो उसे लगा कि
08:44बड़ी होने पर वो सुरक्षित महसूस करेंगी लेकिन भारत जैसे देश में और दिल्ली जैसे शेहर में लड़कियों के सुरक्षा
08:50की हालत सुधरना तो तूर बत से बत्तर होती जा रही है
09:15दिल्ली की प्रियांशी सुरक्षा को लेकर इस कदर निराश क्यों है?
09:21अब उसे मूल्चा निलाके में खड़ी? आज तक संपात्नाता एश्वर या पालिवाल के साथ हुए वाकिये से समझी हो
09:29वक्त शाम के सारे साथ मज़े जगर दिल्ली का मूल्चंदस पता
09:37दिल्ली में लड़कियों को घूरना कितनी आम बात है उसे आपको घलत साइट से बिना हेलमेट लगा कर आ रहे
09:43ये दो बाइक सवार समझाएंगे
09:48राष्टे महिल आयूप रिपोर्ट कहती है कि देश के मुकाबले दिल्ली में लड़कियों को सारुजनिक स्थानों पर दोगुना पीडन का
09:55सामना करना पड़ता है
09:57इस आकड़े का सबूत अब आपको एश्वरिया के साथ हुआ वाक्या समझाएगा जिनके पास एक गाड़ी वुक्ती है अकेली लड़की
10:04देख सीधे छेड़ देने का आफर होता है
10:23तो एश्वरिया को ये गाड़ी सवार बार बार द्रॉप कर देने गाउप पर देता है
10:27वो भी आज तक संबादाता के बार बार मना करने के बावजूद
10:33त्था और थो धिया थार ये ज़ए अख्यूद और देख सब्सक्राइप करेंगे दिल्ली की सरकों बस स्टेंट और मेट्रो स्टेशनों
10:51के बाहर अचांग लोगा उसर अटेवी लड़कियों को ड्रॉप कर देने या लिफ्ट देने का ओफर देते हैं
10:57लेकिन है कोई परोपकार या मदद की भावना नहीं बल्कि अधिकान शमामला में महिलाओं को भजा आने, उनका यौन उत्पिडन
11:04करने या उनके साथ गंभीर अपराद करने की एक सोची समझी आपराधिक साध्यू शोड़ी
11:09पाग जू दिसके ये सिलसला नहीं रुपता
11:30कई बार अपराधि अच्छी काड़ियों में सब भी दिखने वाले कपड़ों में आते हैं ताकि लड़किया उन पर आसानी से
11:36भरोसा कर लें
11:37इसलिए इस तरह ड्रॉप करने का ओफर और उसकी तरब से की जाने वाले जित खथरनाग हो सकती है
11:44मूल चेंद स्पताल के बाहर भी ऐसा ही कुछ होता है जहां ट्रैकिक के बीच आते जाती लोगों के बीच
11:50अकेली खड़ी लड़की पर सब की नजर चाती है
11:57इसी बीच एक गाड़ी आकर रुकती जिसमें सवार भ्रैवर तब तक ज्रॉप करने का ओफर देता है जब तक उस
12:03आदमी को यकिंग नहीं हो जाती है कि लड़की के जवाब का मतलब सच मिद्ना नहीं है
12:10अगर आप एक महिला है तो आपने वो फिल्म देखी होगी जिसमें अमिता बच्चन ने बहुत साफ कहा है
12:18अगर आप किसी को मना करते हैं तो उसका मतलब है कि आप उस चीज को नहीं करना चाते
12:23नहीं का मतलब नहीं होता है लेकिन मेरे साथ जो experience था उसमें मुझे यही समझ आया
12:28कि एक बार नहीं दो बार नहीं तीन बार भी अगर आप किसी को मना करते हैं तो हो सकता
12:33है कि उनकी वो समझ में ना आता हो
12:34लेकिन उनका ये ना समझना ही महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा दिक्कत का कारण बन चुका है
12:39हम बहुत सारे crowded जगाओं पे जाते हैं हम मंदिर जाते हैं हम picture देखने जाते हैं हम अपने दोस्तों
12:44के साथ बाहर जाते हैं
12:46हमने इस चीज़ को आदमियों को मैलाओं को एक तरीके से देखने को नॉर्मल कर दिया है लेकिन वास्तविक्ता यही
12:52है कि यह नॉर्मल नहीं है कहीं ना कहीं हमें एक रेखा खिंचनी पड़ेगी और नो मींस नो का मतलब
12:58जो है वो सुसाइटी में बताना पड़ेगा लड़
13:18जिस वक्त दिल्ली की लड़कियां कालकाजी गैंगरेव के बाद आत्रोशिक थी पुलिस कड़गरे में थी तब मुखरजी नगर में दो
13:25चाक्ताओं को चार गाडी सवार लड़कों ने गाडी में खीचने की कोशिक थी यह सब कुछ नौर्ड केंपस में गुआ
13:33क्यों हम लड़किया हैं तो क्या में रात में निकलना नी चाहिए नौ बजे कौन सी रात होती है डी
13:37यू है यह हमने बोला कि आप मतब आप इसमें हमारी क्या हेल्प कर सकते हैं क्या कर सकते हैं
13:41हम क्या कर सकते हैं हम क्या कर सकते हैं हम क्या कर सकते हैं दिल्ली में बेटियों
13:58को लेकर पुलिस हर बड़ी वार्दात के बाद जो दावे करते हैं वो चंद घंटे भी नहीं ठैर बाते हैं
14:04दिल्ली में अगर कुछ बचता है तो बेटियों से छिर्थानी उनकी असुरक्षा
14:15यह बड़ी अजीब सी बात है कि आज से 20 साल पहले भी अगर हमारी कोई महिला साथी निकलती थी
14:21सड़क पर अगर एक रिपोर्टर के तौर पर हम रियालिटी चेक करने जाते थे
14:25जो चीज उस समय होती थी आज भी वही होती थी कुछ तो समाज को आईना दिखाना है कुछ प्रशासन
14:31को आईना दिखाना है कुछ सरकारों को आईना दिखाना है कुछ पुलिस को आईना दिखाना है
14:35श्रयक कुछ बदला है इतने सालों में भी, मुझे तो याद है जब निर्भया का अंदोलन भी हो रहा था,
14:41उस समय भी इस तरह की मामले सामने आ जाते थे
14:43श्रयता उस समय पे तो आप अतरकार की तो और कवर भी किये थे, मैं कॉलिज में थी, मैं प्रोटेस्ट
14:47कर रहे थी, सरको पे, आज मेरी छह माईनी की बेटी है, आज भी मैं वही सवाल उठा रही हूं,
14:52कुछ नहीं बदला है, और अगर आप अभी मेरे डिपोर्ट जब देख
15:10कि लोग ना बस बैठे रहता ओरतों को गूरने के लिए, यही काम है, शाम को आते हैं, कोई काम
15:15नहीं है, कोई जगा ना पब में घुसते हैं, कुछ नहीं करते हैं, बस बैठते हैं, कि भी अगूर के
15:19ओरतों को देखे, यह इतना नॉर्मल हो गया है कि सामने वाला बंदा, �
15:23जो से देख भी रहा है, वो से टोकता नहीं है, थोड़े आगे जाके वहाँ पे ने एक हनुमान मंदिर
15:28है, थोड़ा एंड में अगर आप हौसकास में जाओ, वहाँ पे चार-पांच लोग ऐसे बैठे हैं, एक औरत आस्था
15:33में जुक रही है, अब उसे भी देख रहे हो, �
15:35एक औरत अगर अपनी आस्था में भी सुरक्षित नहीं है, तो कहां सुरक्षित है, तो यह सवाल जैसा कि आपने
15:40कहाना, सिर्फ पुलिस से नहीं है, समाच से है, क्योंकि हमें ना एक परफेक्ट रेप विक्टिम, एक परफेक्ट मोलेस्टेशन का
15:47विक्टिम, उनका इंत�
15:50करना चाहिए, हमें वो करेक्शन अभी करना चाहिए, क्योंकि आपको एक औरत के तरफ ऐसे गंदे नजर से घुड के
15:57देखना, वो गलत है, और उसे टोकना भी चाहिए, और वही, नॉमल नहीं करो, इस चीज को अगर हमने नॉमल,
16:03नॉमलाइस कर लिया आकार्तिकी, तो आ�
16:16एविडेंस के तोर पे ना पुलीस को दिखा सकता है, ना किसे हो कुछ कर सकता है, हमने आपकी रिपोर्ट
16:19देखी थे कि आप सोथी पुलीस को जगारे देखे हमार साथ क्या हो रहा है, मेरे साथ क्या हुआ हुआ
16:24है, मैं एक जग जा के खड़ी हो गए थी सीधा, सिर्फ आ�
16:40आगे से पुछा, मैं लिफ टे दू, मैं डॉप टे दू, अरे क्यों, मैं खड़ी नहीं रह सकती है, मैं
16:44सिर्फ खड़ी हो ना, मैं एक्जिस्ट नहीं कर सकती एक जगह पे, मैरा भी तो देश है, मैं खड़ा रहना
16:49है यहाँ पे, दिक्कत क्या है आपको, आप अच्छे इ
17:04एक दम से मुझे अंदर गाड़ी में खीच के ले जा, मुझे कौन बजाएगा, मैं मिलूंगी भी नहीं नेक्स दिन,
17:09क्या होगा मेरा, एक मेरे फादर के एज का बंदा आके मुझसे, आदमी आके मुझसे पुछता, आप मिलेंगी, और मैं
17:17कापना चालू कर दिए उस ता�
17:37अगर आप को चार लोग सीरिसली लेने वाले भी मिलते हैं, वरना ये बुलने वाले भी अगर आप कहीं पर
17:42खड़े हैं, कहीं जाते हैं, फॉम उस्टेलिया टू साउथ आफरिका, मैंने कई जगों पर यह देख लिया है, लेकिन वो
17:48आप, चेंज तो तभी आएगा, जब �
17:51आप चेंज करने को तयार होंगे, जैसे का आपका क्या पूरा experience रहा, ये इस तरह की report के लिए
17:57पहली बार आप गई थी, बहाद, बहार है, इस तरह की report के लिए, इस तरह के social experiment के
18:01लिए मैं पहली बार गई थी बहार, और मेरा भी काफी similar experience था जैसे बाकी लोगों का था, मैं
18:07क
18:09वेस्ट डेली में गई भारती कॉलेज के पास गई में एक हापी स्कूल के पास की वहापे और वो सारे
18:13इलाके और हम लोग जब यह एक्सपरिमेंट करे थे तो हम यह पाच से नौ बजे के बीच में ही
18:17कर रहे थे तो हम ले बहुत ज्यादा रात का समय भी नहीं चुना था क्य
18:34और एक गाडी थी जो फॉलो करने लगी और पहले फिर हमें रियलाइज हुआ कि अच्छा यह फॉलो करी है
18:40तो मुझे लगा कि ठीके मैं खड़ी हो जाती हूँ शायद से वह निकल जाएगी तो मैं जैसे ही खड़ी
18:44हुई वह निकली नहीं वह मेरे आगे जाके खड़ी हो �
18:47और उस समय अफकोस हमारा कैमरा परसन भी था पर हमें लगा कि ठीके देखते हैं वो क्या करेगा क्या
18:53वो निकलेगा बाहर कुछ करता है या वो अधर बस खड़े होने ही आया है बट उसने फिर वो गाडी
18:58से बाहर निकला उसने अपनी सिगरेट जलाई और वो वहाँ पे ख
19:17या वो आगे आगे लगा पर निकलते हैं वो गाडी से बैठके निकल जाता है उसके लिए तो मतलब यह
19:24शायद रोज की बात होगी वो ऐसा है मैं आया मैंने देखा लड़की देखी और मैं आगे चला गया हमारे
19:30भी यह काफी नॉर्मल हो गया है कि आप कहीं भी जाते हो आ
19:45और मेरे बीच में ही वो बंदा आके बहाँ से निकलता है और वो ऐसे चूने की कोशिश करता है
19:50और यह कैमरा पर रिकॉर्ड हुए है वो इतना पूरी खुली सड़क है जिसमें आप पीछे से जा सकते हो
19:55आप यही से क्यों जा रहे हो और यह सब इंस्टेंस इतने नॉर्मल
19:57हो गए अब ऐसा लगता भी नहीं है कि हां मैं इसके बारे में किस से शिकायत करूं क्या बोलूं
20:02मैं अपने दोस्तों को आके बोल दूंगी अब परिवार में तो मैं क्या ही बताओ किसको क्या बोलूं मतला भी
20:08कब से होता आ रहा है कितना नॉर्मल लगने लगा बट अच्�
20:24व्यक्ति भी बदल पाए हम तो मुझे लगता है कि एक शुरुआत होगी ना का मतलब ना होता है इतनी
20:29छोटी सी बात दिल्ली के वो मर्ग क्यों नहीं समझते जो अकेली लड़की को देखते ही उसे घूरने लगते हैं
20:35उसके करीब जाकर उसे असहज करते हैं कई बार तो ज
20:38जान बूझ कर छूने की कोशिश करते हुए निकल जाते हैं क्या यही मानसिकता आगे चलकर गैंगरेप जैसी वारदात की
20:45वज़े बनती है क्योंकि घूरना हो या फिर अकेली लड़की को देखकर उसे ड्रॉप करने का ओफर देना हो यह
20:52सारी हिम्मत लोगों में इसलिया �
20:54आती है क्योंकि उन्हें इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता मतलब गलती तो तब मानेंगे जब लगेगा कुछ गलत कर
21:01रहे हैं खबरदार करने वाली बात यह है कि बस मेट्रो सड़क इन सभी जगों पर महिलाओं के साथ बद
21:09सलूकी करने वाले ज्यादतर पुरुशों की म
21:11मानसिक्ता यही होती है वो इसे अपराद या गलती मानते ही नहीं है मतलब शुरुआत यहीं से करने की जरूरत
21:18है
21:20पटेल नगर, कीर्ती नगर, राज़ोरी गार्डर, जनकपुरी और तिलक नगर पश्चमी दिल्ली का वो इलाका जहां पर आज तक संभादाता
21:29जेसी का कोयल गई
21:34इस दोरान जेसी का कोयल के साथ वो सब कुछ हुआ जिसका सामना दिल्ली की हर लड़की गई
21:46जो अब इतना नॉर्मल हो चुका है कि किसी का ध्यान नहीं जाता, सिवाए दिल्ली की बीठियों में, जो ये
21:51सब सेहने को मजबूर है
21:53मतलब लड़की को देखकर पाइक सवारों का रुखना, अजनब्यों का घूर कर देखना, पीछा करना
22:01कार से उतर कर इंतजार करना
22:13पटेल नगर और कीर्टी नगर में, जेसिका को चलते फिर के लोग बार बार बार बाइक और कार रोपकर बस
22:19भूरते हैं
22:23ये देखे, राज़ाओरी गार्डेन बस स्टॉप पर बिना किसी साफ वज़ा के बाइक वाले रुख जाते हैं
22:29जनब्यों के पास एक कार कुछ दूर तक जेसिका का पीछा करती कैमरे में कैद भूरते हैं
22:37ये आदमी भले ही जेसिका के पास नहीं आ है लेकिन गाड़ी से बाहर निकल कर देखता है
22:41सिगरेट जला कर पीता है बार बार आज तक संबादाता के करफ देखता है
22:45दिल्ली की एक चलती सलग पर आज तक संबादाता को अकेली लड़की देखकर एक टैप ड्रैवर रुखता है, गारी से
22:52बाहर निकलता है, रिपोर्टर के आगे से होकर देखता हुआ चाता है, सिगरेट सुलगा कर वापस लोड़ता है, और फिर
22:58गारी के पास सिगरेट पीते
23:00हुए बार-बार देखता है, फोन पर बात करता है, यह सिलसला 6 मिनट तक चलता है, इस आदमी की
23:05हरकतों को देखते हुए, जेसी का इस गारी से आगे जाकर खड़ी हो जाती है, इसके बाद भी यह वही
23:10रहता है, और थोड़ी दिर बाद चला जाता है, देखने में भले ही �
23:13आम लग रहा हो, लेकिन एक लड़की के नजरगे से रात के वक्त में डिल्ली की सड़क पर किसी अजनवी
23:19का इस तरह से पीछा करके रुकना, बार-बार देखना, अलर्ट कर देता है, दिल्ली में सड़क पर एक औरत
23:25के लिए कुछ नहीं हुआ का मतलब हमेशा कुछ नहीं
23:28हुआ नहीं होता, क्योंकि कुछ नहीं हुआ में लड़की का पीछा किया जाना, नजर रखे जाना, पास आने की कोशिश
23:34करना, बेचैन महसूस करवाये जाना शामीर, यह दिल्ली का भार्टी कॉलिग, यहां बता रहा हंदेरा, महिला सुरक्षा के दावों और
23:44खराब ला�
24:08पास आके गाडिया रुकी, मुझे गाडियों ने फॉलो किया, बाइक वाले लोग मेरे पास आकर रुके और किसी ने कोई
24:14आवाज नहीं उठाए, उन्हें लगा कि एक आम जिंदगी की तरह मुझे इसमें चलते ही रहना चाहिए, जब तक कुछ
24:20गंभीर नहीं हो जाता, त
24:25लेकिन एक औरत होने के नाते, आप वो फरक समझते हैं.
24:56लेकिन सड़क पर चलते हुए, आप जितनी संख्या में उन लड़कों को देख रहे हैं, उन लोगों को देख रहे
25:01हैं, उन आदमीयों को देख रहे हैं, उसको देखकर सोचिए कि अगर कोई बिना किसी साथी के, कहीं पर जा
25:11रही हो, किसी के पास कोई साधन नहों, गाड़
25:23थी या डाक कॉनर्स जैसे थे जिसको लेकर कोई भी सहज हो जाएगा डाक कॉनर्स थे और मुझे लगता है
25:32ये हमारी देश की राज़दानी दिली की एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि बहुत सारे आपको ऐसे इलाके मिलेंगे जो
25:38वैलिट नहीं होते हैं वहाँ पर किसी क
25:40खींचना किसी के साथ बत्तेमीजी करना किसी के सामने अचानक से आ जाना यहां तक की किसी को भयोश करना
26:00भी बहुत आसान
26:10ये श्रेया ने अपने कामरे में कैप्चर किया कि वहाँ पर ऐसे लोग थे जो हमाँ बैटे ही इसलिए थे
26:14कि अगर महीलाय आएंगी वो जुकेंगी वो और वो सब कैप्चर हुआ है तो आप इससे यह समझ सकती है
26:20कि मानसिक्ता क्या हो मुझे लगता ही तो स्टेप वन है ला
26:43अपने जनम दिन पर वो मंदिर गई और उस पूरी घटना क्योंकि एक बीट ऑफिसर से में बात कर रही
26:48थी और ने कहा कि वो जो अस्थाकुंच पार्क है वो ऐसे जगा पे स्थित है कि अगर आप चाहो
26:53तो आप कालकाजी मंदर का दर्शन करो आप अस्थाकुंच पार्क स
27:12अगर तो कहते हैं कि नहीं वो तो एक बॉइफ्रेंड के साथ गई अगर वो अपने बॉइफ्रेंड के साथ गई
27:16तो भी क्या उससे ये भी तो कहा था था ना उसने कि तुम अपने घर में बात कर रहा
27:20है उसने कहा कि मैं घर में बता कर रही हूं तो मतले क्यों नहीं ऐसा हो
27:25अगर मैं अपने बॉइफ्रेंड के साथ भी पार्क में गई तो क्या वो आपको एक इंविटेशन देता है कि आप
27:30मेरे को मुलेस्ट कर सकते हो आप मेरे पर सवाल कर सकते हो यह जो सोच है यह मान सिकता
27:36भी हमें बदलना पड़ेगा क्योंकि आपके भी अभी हम बात कर रहे थ
27:55मैं कॉंट्रास्ट के तौर पर देखू जैसे का काफी अपनी बात्चीत में भी सौफ्ट स्पोकन रहती है उतना पलट कर
28:01वो स्नाप नहीं करेंगे अप स्नाप कर रही थी सामने जो आपको बुलने आ रहा था आपने पलट कर सीधा
28:05उसको कंफरंट किया कंफरंट करने पर �
28:07वो बैक फूट पर जा रहे थे नहीं नहीं वो वहीं खड़े थे घूम कर आ रहे थे वो पीछे
28:13से आ रहे थे वो आगे से आ रहे थे वो वहीं खड़े थे एक इंसान I would I don't
28:17know but हाँ वो एक अड़ोकेट थे he was playing subtle कि मतलब मैं ही जाओंगी उनसे पूछ होंगी कि
28:22मैं ही अपन
28:36करने की कोशिश कर रहा है किसी से फॉन पे एक और कड़ वालाया क्या तो मतलब और ही मुझे
28:42रहे लगा क्योंकि हम लड़कियां पबलिक ट्रांस्पोर्ट को और ऐसे ट्रांस्पोर्ट पे यखीन करती हैं ठस करते हैं कि हमारी
28:49डेस्टिनेशन पे धंग से पहुचाएं ले
29:06मतलब है इसका आप जाके मेंज़ लड़की खड़ी है तो ड्रॉप कर दोगे कहीं पीपी जाके मतलब घर पी नी
29:13जा पहेंगे हम कर दो अरे
29:16आपने देखा कि कैसे हमारी एक समवादाता को एक गाड़ी सवार ने बार-बार ड्रॉप करने का ओफर दिया
29:22तो एक गाड़ी वाले को कई मिंटों तक रात के वक्त गाड़ी खड़ी करके हमारी रिपोर्टर को घूरता रहा
29:27कई बाइक सवारों ने भी यही किया कई लोग जान बूज कर रिपोर्टिंग के दोरान करीब से निकले
29:34चिंदा की बात यह है कि यहालाद दिल्ली के किसी एक इलाके के नहीं है एम्स लाजपत नगर हर जगे
29:41यही होता मिला
29:42सबसे खबरदार करने वाली बात पुलिस की गहर मौजूद की
29:56दिल्ली का लाजपत और एम सिलाका जहाच तक समपाता था कारतिकी शर्मा सड़किनारे खड़ी
30:04कारतिकी एम सिलाके के पास एक जगा पर लगभग एक खंटे तक खड़ी रहे
30:11करीब साट मिनट के अंदर साथ से आठ गाडियां के पास रूगी
30:32स्यादा तर ने उन्हें कहीं छोड़ने की पेशकर्ष भी की
30:36कुछ हिचकिचाए वहीं कई वापस आये मना करने के बावजूद
30:43और फिर ट्रॉप करने वाले में वो बात कहीं जिसका सामना दिल्ली की लड़कियां अकसर करती
30:55क्या होँ तो दिल्ली में गलड़की अगर साथ पर अकेली खड़ी हैं तो अजनभी के लिए ये मौका
31:18होता है तभी तो घंटे भर में साथ से आठ गाड़ी वाले रुपते रिपोर्टर के मना करने के बाद दो
31:25से तीन गाड़ियां वापस लौट दो तीन तो पूछ भी लेते
31:30क्या बोल रहे आप मिलेंगे मैं किसी की तरफ नहीं जा रही थी मैं बस वहां खड़ी थी मैं लिफ
31:37नहीं मांग रही थी लेकिन लगबग एक घंटे के अंदर वहां पर कई गाड़ियां आके रुख गई
31:42कुछ ने मुझे कहीं चोड़ने की पेशकश की कुछ ने मेरे मना करने के बावजूद वह वापस आये मुझसे पूछने
31:49के लिए और कुछ मर्द तो ऐसे थे जोनों ने मुझसे पूछा आप मिलेंगी एक औरत के लिए यह सुनना
31:56चोटी मोटी बाते लग सकती हैं लेकिन �
31:59जब यह बार-बार हो तो हर मर्द हर गाड़ी हर मोड आपको देखने वाला हर इंसान आप उनका हिसाब
32:07किताब करने लगती है
32:10तो पुलिस की मौझूदगी या गएर मौझूदगी जैसे का आपको पुलिस की प्रेजन्स दिख रहा था उन एरिया था नई
32:18अच्छली अब मैं सोच रही था हूँ मुझे कहीं पे भी पुलीस आसपास नहीं दिखी मैं जिस भी इलाके में
32:23गई मैं वेस्ट दिल्ली में �
32:24मैं वहाँ कॉलेज के पास गई वो एरिया भी अच्छे से लिट नहीं था वहाँ पर अच्छी लाइट भी नहीं
32:28थी और एक हैपी स्कूल था जहां से मैं गई मैं एक मेट्रो के पास भी गई जहां पर हो
32:33सकता है अंदर गार्ड होंगे पर बाहर तो कोई पुलीस वैन नी �
32:36एक पुलीस वैन शायद बीच में गुजरी थी और वो तभी था जब वो आदमी वहाँ पर खड़ा था बट
32:42पुलीस के साइट से ही दो चार लोग अपनी बाइक पे बुलिट वाली बाइट फड़ाते वे भी जा रहे थे
32:47और उनको किसी ने कुछ नहीं रोका और ये जैसे
32:49जैसे रात बढ़ती जा रही थी ऐसे और लड़के बाहर आ रहे थे और पुलीस उतनी ही कम होती जा
32:54रही थी मेरे एक्सपिरियंस में
32:56इश्वरे आपको दिख रहा थे पुलीस वाली नहीं शृता मैं तो LSR के दो गेट है एक में गेट है
33:04एक बैक गेट है उसके पीछे एक पार्क है तो बैक गेट से निकलते ही जरूर वहाँ पे एक पुलीस
33:09वान खड़ी थी वहाँ पर दो मैंडेटरी है मुझे लगता है व
33:26लेकिन वहाँ कभी भी लाइट नहीं है वह सही कह रही है वहाँ इस अ ब्लैक सपोट और ओवर कॉंफिडेंस
33:30में नहीं है पता नहीं है सच में DCP West Office मतलो अब चल के जा सकते हो लेकिन लाइट
33:35नहीं है और अगर मेरी बात करें तो कुछ जगह है जैसे माता संदरी College के बार म
33:55क्यों नहीं पुलीस की प्रेजन्स हो पाती है इतने शॉट स्टाफ है तभी आपको ITVP परसनल बुलाने पर रहे है
34:00तो फिर आप सारे कॉनर्स को लाइट अप क्यों नहीं कर ले रहे हैं तो अबसे ज्यादा इंपोर्टेंट है हमने
34:05अभी कितने बार सोना है कि अमने इन सी
34:09आस्ता कुंछ पार्क में CCDV क्यों नहीं चल रहे थी आस्ता कुंछ पार्क में लाइटे क्यों नहीं है ये तो
34:13टेंडर्स आप निकालते हो हर बार लगता है फिर क्या हो जाता ले तो ये सवाल करते करते हम ठक
34:18जाएंगे हर बार जब घटनाए होंगी उसके बाद हमें वि�
34:36करेंगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ बलकि असुरक्षा का जो भाव था वो बढ़ता ही चला गया विदंबना देखिए ये
34:42डर सिफ लड़कियों तक सीमत नहीं है दिली में लड़कियों के भाई तक अपनी बहनों की सुरक्षा को लेकर उतने
34:47ही चिंते थें
35:08दिली का अवद जो अपनी बहन के बाहर जाने पर परिशान हो जाता है क्योंकि बाहौल महुत खराब है
35:32दिली में लाखों परिवार रोज इसी डर से गुजरते हैं
35:35बेटी जब तक घर के बाहर रहती है उसकी सुरक्षा की चिंता सताती रहती है
35:41भाई के तौर पर अवद भी परिशान रहते हैं लेकिन उससे ज्यादा परिशानी वारी बात उन्हें लोगों का रवया लगता
35:48है
36:10भारत में छेरखानी को इतना सामाने मान लिया गया है
36:13कि अब ये परिशान करने दगा है
36:15मुखरजी नगर की घटना हमारे सामने है
36:17जहां दो छात्राओं को गारी में खीचने की कोशिश होती है
36:21और FIR दर्च करने में पीडित को तीन पुलिस टेशन दोड़ना पड़ता है
36:25पुलिस के रवये के तो कहने ही क्या
36:53अब अब बुला कि आप इसमें हमारी क्या हेल्प कर सकते हैं
36:57हम क्या करेंगे हम से क्या होगा
37:04इसे ही दावे ये यकीन करने पर मजबूर कर देते हैं
37:07कि दिली में पुलिस से बहुत ज्यादा उमीद दड़कियों को नहीं होती
37:11दुर्भागे पूर्ण बात ये है कि जब महिलाएं हुद ये मानने लगती है
37:14कि कुछ नहीं होगा तो घटना केस बनने से पहले ही हत्म हो जाती है
37:19इसका फाइदा वेटियों को सताने वाले उठाते हैं
37:23दिली में महिलाएं हर जगे असहज होती रखती है
37:29दिली के हौस खास की ये तस्वीर देखिए
37:31जिसके विलिज के एंट्री गेट पर एक आदमी बहा से गुजरने वाली बहिलाओं को देख रहा था
37:36फोल कुछ नहीं रहा नहीं घूम रहा है
37:39बस हर उस अगली बहिला के आने का इंतजार कर रहा है
37:43जो उसके खरीद से गुजरती है
37:47दिली में घूरने की ये आदत किस कदर आम है उसे इस बाइक सवाद से समझ ये
37:55जो गुजरती दो महिलाओं को देखने के लिए अपता सिर लगभद 180 डिगरी घुमाता है
38:03अपनी इस हर्कत को ना छिपाने की कोई कोशिश और ना ही देखे जाने का कोई डर
38:08यही दिली की हकीकत है
38:10ऐसा इस लिए क्योंकि दिली में ये बरताम इतना आध हो गया है
38:14कि किसी को देखते हुए पकड़े जाने पर भी अब शर्मिन की महसूस नहीं होती
38:21ये सब कुछ बंदिर के बाहर भी होता है
38:24आज तक संबादाता अश्रिया भनवार बंदिर गई
38:27जिसके प्रवेश्ट द्वार के बाद चार पांच आदमी बैठे थे
38:30इसी दौरान एक अधेर उम्र की महिला अंदर आती है
38:34वो प्रातना करती है
38:35जाने से पहले जैसे ही वो जुपती है
38:38एक आदमी की नदर इस महिला का पीछा करती है
38:41उसके चेहरे को नहीं बलकि उसके शरीर को देखती है
38:45आज था महिला को जुपने के लिए कहती है
38:48लिकिन ये भी किसी और के लिए गूटने का मौपा बन जाता है
39:15मेरे लिए सहज कोई एक खास नजर नहीं था
39:19बलकि ये था कि कितना समानने हो गया
39:21कुछ आद्मियों का एक साथ बैठे रहना
39:24एक महिला का गुजरना
39:25एक कोनी से धक्का
39:27एक आदमी का मुर्के देखना
39:29और किसी को भी ये नहीं लगता
39:31कि ये गलत है और शायद
39:33यही सबसे बड़ी सवाल है
39:35कि एक महिला को uncomfortable
39:37फील करवाना इतना
39:39नॉर्मल हो गया है कि किसी को
39:41अब इस पर ध्यान भी नहीं जाता
39:45नंबर वन किसी का ध्यान नहीं जाता
39:47नंबर टू ओनस ओफ प्रूफ
39:48इस ओनस
39:50लड़की पर है आप बताईए कि आप
39:52प्रूफ किजे कि वो इसी वज़े से देख रहा था
39:55और अब हम यह दिखा रहे है
39:57पेशकाष श्वेता आपको भी पता है
40:10एक पर्फेक विक्तिम लगे तब जाके हम आवाज उठाए
40:14यह क्यों है
40:14यह जो नॉर्मलाइजेशन का पूरा कल्चर है
40:17हमें इसे बदलना तो पड़ेगा न
40:19क्योंकि हम लगाता सेम सवाल कह रहे है
40:22जैसे 2012 में भी हमने सवाल उठाया
40:24आप आदे कंजावला के समाइबे भी जब एक इंसिडेट दुआ था
40:27हम तब भी रियालिटी चेक करने निकले
40:28आज भी हम रियालिटी चेक करने निकले
40:30कुछ नहीं बदल रहा है
40:32डर क्यों नहीं है
40:33कोई डर क्यों नहीं कि भाई कोई हमें देखते टोकेगा नहीं कोई यह जो डर है यह तो अंदर से
40:39आना पड़ेगा ना उसमें तो आखों की शर्म होगी कि आरे किसी ने देख लिया कि मैं इतनी देर से
40:43घूर रहा हूं पर यह डर ही नहीं है इसका मतलब है कि आपको वही ची�
41:00चो रहा है वो भी समझ में आए और उसके साथ साथ यह बदलाव मुझे लगता है सबसे जादा जरुवत
41:08जो इस समय है वह पोलिटिकल विल की बड़ा सवाल है क्या किसी भी पार्टी में इतनी पोलिटिकल विल है
41:14हमने तो देखिया है हम देखा है कि हम भी पार्टी बदली
41:17है एक पार्टी कोई भी या कोई एक बड़ा नेता या फिर कोई एक बड़ा कॉपरेट हाउस कोई भी यह
41:22बोले के भाई ठीक है इस आदे की जिम्मेदारी मैं लेता हूं हम कोई कॉपरेट हाउस बोले के भाई इतनी
41:27की जिम्मेदारी हम लेते हैं हम मेक्शोर करें कि CCTV लग
41:43जहां पर, unfortunately, मैं ही अखेली माइला होती हूँ.
41:46तो आप बैठे हैं, वहाँ पर जिस टाइब के जोक्स ख्राक होते हैं,
41:49वो डिमीनी होते हैं, बट आप कई बार कुछ बोल नहीं पाते हैं,
41:51खून का गूट पी के रहा जाते हूँ, आपको भी बता है मैजॉरिटी.
41:54और जो एश्वरिया, तुम कह रहे हो ना, कि जो पॉलिटिशन्स है, पॉलिटिकल पाटीज है,
41:58वोमन सेफ्टी उनके लिए एक स्कोर काड है, कि आप एक मैनिफेस्टों में बता देंगे,
42:03कि हम महिलाओं के लिए यह करेंगे, लेकिन हम सिर्फ मैनिफेस्टों में नहीं रह सकते,
42:07क्या हम सब जो पाटीज कवर करते हैं, जो रैलीज में जाते हैं,
42:11क्या हम कह सकते हैं कि किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के काड़र ने हमें उनकमफोटिबल नहीं फील करवाया है
42:16क्या रैली में हमें सेफ लगता है
42:18तो इसे सिर्फ एक ना मैनिफेस्टों में कह जाने वाली बात नहीं कीजिए
42:22सचमया ग्राउन में इंप्लिमेंट करने के लिए जो करना है वो करिये
42:25खासकर जब एक भीड होती है और वहाँ पर लोगों को लगता है किसी को पता नहीं चलेगा किसने चू
42:31दिया
42:31वहाँ पर जादा इसलिए जो राली की बात आप कर रहे हैं
42:34हम यह भी नहीं कह रहे हैं कि वह सारे हो सकता है उसी पार्टी के पुलिटिकल वरकर्स उस टाइम
42:38हो
42:38हो सकता है उसमें लोग भी ऐसे घुसाए हो जो सोच रहे हूं कि वहाँ मौके का फाइदा उठाया
42:43यह सोच अब दिल्ली के जितने भी इलाकों से आपने लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा हमारा रियालिटी चेक देखा
42:50वो सारे भीड़ भाड़ वाले इलाके हैं एक भी इलाका ऐसा नहीं है जहां पर ट्राफिक या फिर लोग नहों
42:56कि इसके बावजूद हमें ऐसा कुछ नहीं मिला जिसके आधार पर कहा जा सके कि दिल्ली में बेटिया सुरक्षित है
43:04करो प्लेस राजठानी का दिल
43:13रॉक्षिनी से भराता भीर फारवाता आम लोग सुरक्षित कम से कम काज़ों पर लेकिन ध्यान से देखिए एक नज़र एक
43:23और नज़र
43:27लगातार घूरना लेकिन जैसे ही खूरने वाले पर ध्यान जाता है उसकी बाटी लेंग्वेज बदलती है
43:35लड़कियों को घूरने की आदर महिलाओं की मानसिक शांत और उनकी आज़ादी को छीनने वाली हरकत है
43:41जिसे विजवल हरस में यानि नजरों से की जाने वाली छेड़ खानी कहा जाता है
43:45दिल्ली की सलकों, मेट्रो, बसों और बाज़ारों में लगभग हर लड़की को रोज़ाना इस असहज कर देने वाले अनुवफ से
43:53गुजरना पड़ता है
43:54ये कई घटनाओं का मिला जुलासर होता है
44:04देखना, रोकना, पीछा करना, पास आना, मना करना, लोटना और फिर से पूछना
44:24अलग अलग अलग जगें, अलग अलग कुरुश, अलग अलग पल
44:29लेकिन वहवार का मूल पैटर्न एक जैसा है
44:32और बेचियों को होने वाली पीडा के बारे में प्रियांशी से सुनिये
44:36और भी तो normal है बहुत जादा, everybody it has been normalized so much that it is just normal
44:42so what experience did you?
44:44अभी भी हमने a cap book कर रहा था, like an auto and there were two people sort of sitting
44:49in the auto
44:50जो हमार को बोल रहा है, का मैं आप हमारसा चलो घर रा दारू पी के आय हूँ है
44:53and they're like, आप हमारसा चलो, there is no other way, अप बहुत भी बहुत कर दे रहते हैं
45:17तो महिलाओं का सीधा सा सवाल, महिलाओं पर पाबंदी की बात तो होती है, लेकिन मर्दों के बरताओं पर नतेल
45:23कैसे कसी?
45:34और शायद यही असल बात, क्योंकि अगर किसी लड़की पर कोई शाहरी खमला नहीं होता, तो अकस्तर मान लिया जाता
45:41है क्यों कोई समस्या ही नहीं है, लेकिन इसे नॉर्मल मान लेने की आदर, महिलाओं के आत्म सम्मान को हर
45:47रोज थोड़ा-थोड़ा खाए जा रहे थी
45:49The man was just sitting in front of me, रिक्षा में, so he was just continuously gazing and it was
45:56थोड़ा सा uncomfortable for me, that's how
46:00So, अभी आप यहाँ पर ख़ड़े हो और नोबड़ी इस staring at you, कहीं से भी आ रहे हो
46:03I think because I am living here from last past, I think 3.5 years and I have experienced a
46:10lot, I have, you know, learned to live in that way, you can say
46:16Soche, दिली केक पेटी इस महों में जीना सीख लेने को मजबूर है, क्योंकि तमाम दावों के बाप जो, कुछ
46:23नहीं बदलता
46:45That someone was deliberately trying to touch me, going in the park just for running, I feel that someone is
46:50gonna follow me
46:51So I am just keep, I just keep looking back just to make sure that no one is following me
46:55home, following me back home
46:56So yeah, it's like a constant fear for me and I think other girls as well living in Delhi
47:11अगर मैं एक चीज आप से पूछू, कहां से शुरुआत करनी चाहिए, कातिके?
47:16मुझे सच में नहीं पता कहां से शुरुआत करनी चाहिए, यह mindset है, lack of education है, upbringing है
47:22कोई माबा बच्चे को यह तो नहीं सिखाएगा, जाके लड़कियां छेड़ो, मुझे नहीं समझ में आ रहा है क्या दिक्कत
47:28है
47:29upbringing अच्छी लड़कों को भी चाहिए, लड़कियों को भी चाहिए, और हम इस चीज को मानते हुए कह रहे है
47:34लेकिन जो vulnerability है, उसकी वज़े से हम यह कह रहे है कि लड़कियों को सेफ रखना ज़रूरी है
47:39मुझे लगता है बहुत छोटी बेसिक चीजे भी जैसे उस दिर में देख रहे थी कि किसी ने लिखा कि
47:44आपका जो नापी बदलने वाला जो डाइपर बदलने वाला स्टेशन होता है वो हमें सिरफ विमें वाश्रूम में दिखता है,
47:51में नहीं दिखता है
47:52यह पिटरार्की के बहुत छोटे-छोटे साइन्स है जो हमारी डेली लाइफ में इन्विजिबल हो गए, अब हम नोटेस ही
47:57नहीं करते हैं, अब हम इसको क्वेशन ही नहीं करते हैं
47:59और कोई दूसरी बार इस पर क्वेशन नहीं करता है, आख उठाके नहीं बोलते हैं, अगर हम यह सारी चीजों
48:04को छोटी-छोटी चीजों को हम डेली बेसे इस पर परखना शुरू करें, तब हम शायद जाके दिखेगा कि कहा
48:09से चेंज करना है
48:22करते हैं