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दिल्ली की सड़कों पर लड़कियां कितनी सुरक्षित, आज तक की महिला रिपोर्टरों ने जाना सच
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00:04क्या बूच रहा है?
00:30खुरना
00:33और पीज़ा करूँ
00:36दिल्ली की बेटियां कभी ना कभी इनका शिकार होती है
00:39भले ही वो चाहे कोई भी है
00:41किसी भी लाके में रहती है
00:42किसी भी कॉलेज में पड़ती है
00:44बड़ी से बड़ी वार्दाद भी दिल्ली को नहीं बदल पाती है
00:47आखिर क्यों
01:01गंदी नजरों से किसी लड़की को अस्यहज करना है
01:05दिल्ली की ये वो कड़वी हकीकत है
01:07जो देश की राजधानी को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बनाता है
01:11क्योंकि ऐसा करने वालों को कानून का खौफ नहीं
01:14तब ही तो कालका जी जैसे कान्ट होते है
01:21दिल्ली में बेटिया कितनी सुरक्षित है
01:23इससे खबरदार करने के लिए आज तक की चार महिला रिपोर्टर
01:27एश्वर्या पालिवाल, जेसीका गोयल, श्रेया चटरजी और कार्तिकी शर्मा
01:32दिल्ली की चार दिशाओं में एक सवाल के साथ दो
01:35क्या आखिर दिल्ली इतनी अस्रुक्षित क्यों है
01:40इस सवाल की जड़ में वो सोच है
01:42जो निर्भया जैसे कान की बाद भी दिल्ली में कुछ नहीं बदलने देख
01:4614 साल बाद भी गैंग रेप नहीं रुखते
01:48बेटियों को बार बार सालक पर उतरने को मजबूर होना पड़ता है
02:08आखिर दिल्ली की सालक पर अकेली चलती महिला सुरक्षित क्यों नहीं
02:12क्यों उसे हर खत्रा महसूस होता है
02:14क्यों उसे सम्विधान से मिले सुरक्षा के अधिकार का एसास नहीं होता
02:20दिल्ली में बेटियों से अफ्राद के बाद तो बड़ी बड़ी बाते होती
02:23लेकिन इस अफ्राद से पहले जो होता है उस पर किसी का ध्यान क्यों नहीं चाता
02:29क्यों घूरना
02:33पीछा करना
02:35अकेली लड़की को देखकर गाड़ियों का पीछा करना
02:38बार बार रुकना
02:43बीना लड़की की जाज़त के खरीबार
02:49वेक हॉप और बेशर्मी के साथ
02:51प्रस्ताव रखने से पहले
02:52मन्चलों को सौबार नहीं सोचना पड़ता
03:00क्या इसकी वज़ा वो मान सिखता है
03:02जो सड़क पर चलने वाली हर औरत
03:04ऐसा महसूस करवाते हैं जैसे वो कोई पब्लिक प्रॉफर्टी थी
03:09दिल्ली की बेटियों की इसी दर्द को चानने दिखाने हम निकले
03:13सुन्सान गलियों
03:15ऐसी जहां पर नहीं जहां आमतौर पर औरत से कहा जाता है
03:18तुम वहां क्यों गई थी
03:21हम वहां गए जहां दिल्ली पस्ति हज़ारों की भील होती है
03:28इसमें मेट्रो स्टिश्ट, बाजार, अस्पतार, कॉलेज, मंदिर, आफिस एरिया और कनॉट प्लेस बाजार शामिल है
03:48आज तक की चार महिला रिपोर्टर पूरी राज थानी में निकलती है
03:52बेटियों की सुरक्षा के सवाल के साथ
03:54क्या खिर क्यों दिल्ली का कोई भीला का बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं है
04:03नमस्कार मैं हूँ श्वीता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
04:07जो हिस्सा हमने आपको हमारी चार महिला रिपोर्टर का दिखाया
04:11उनकी रिपोर्टिंग का कि दिल्ली में एक रात में जब वो अकेले ऐसा प्रतीत होता है
04:16आसपास चलने वाले लोगों को कि वो अकेले निकल रही है तो उनके साथ क्या होता है
04:21किस तरह की बाते हैं किस तरह की नजरों का सामना उन्हें करना पड़ता है
04:26आज वो चार रिपोर्टर्ज मेरे साथ स्टूडियो में मौझूद हैं और हम उनका अनुभव
04:32उनके एहसास उनकी बाते उनके रिपोर्ट्स हमारे सवाल उनके जवाबों के साथ आपके सामने रखने वाले हैं
04:41हमारी चार रिपोर्टर्ज बीती रात दिल्ली में बाहर निकली सडकों पर निकली
04:48उन्होंने देखा कि किस तरीके से आते जाते लोग व्यवहार करते हैं
04:54हमारे साथ एश्वर्या पालिवाल स्टूडियो में हैं
04:57हमारे साथ श्रेया चटेजी हैं
04:58हमारे साथ इस समय जैसिका गोईल हैं
05:02और कार्तिकी हमारे साथ हैं कार्तिकी अरूडा
05:06यह के करके आप सब बताईए सामान्य कपड़े पहने नॉर्मल ऐसा भी नहीं है जो जिसके लिए कई दफा ब्लेम
05:15कर दिया जाता है कि भईया तुम ने कपड़े ही उट पटांग पहने थे तुम देखी गलत तरीके से रही
05:19थी आप नॉर्मल तरीके से कहां पर निकली थे अ�
05:27मैं जानकर के यही कपड़े पहन के आई हूँ कि आपको मेरे शायद पैड दिख रहे हैं आपको मेरे हाथ
05:32का इतना हिस्सा दिख रहा है इसके अलावा मतलब क्या मैंने अपने आपको ऐसे आउट इंदी ओपन किया है मुझे
05:38नहीं लगता आप हम देखेंगी कि हम सब जितन
05:55अपने लग जाऊंगी शुट आपको अनकमफर्टेबल नहीं लगेगा क्योंकि आप समझ रही है कि मैं कहां देख रही हूँ मेरे
06:00मन में क्या चल रहा है और कितनी बार आप जहां जहां जाती है भीड वाले इलाकों में इतनी जगे
06:09खाली है लेकिन वो चिपक के इतनी सी ज
06:16इस बार वी रहा है इस बार वो फिल्म है ना शुटा आप नो मीन्स नो माईलाओं को बहुत अच्छा
06:23लगा था वो डायलोग जब अमिताब अच्छन जी ने बोला था एक फिल्म के अंदर नो मीन्स नो आप इसको
06:28किसी भी तरह से गुमागे देख लीजे नो का मतलब नो ह
06:43भी निकलती है साड़े साथ बजे का समय था महज LSR से दो किलो मीटर दूर मैं खड़ी थी मैं
06:49एक लाइट के नीचे खड़ी थी जान करके ताकि कल को कोई यह ना बोले किया रहे आप तो ऐसे
06:52इलाके में खड़ी थी मैं खड़ी हूँ दो तीन लोग पास कर रहे हैं एक जन
07:12महिला समझ सकती हो कि आप किसी पुरुष को यह बोलेंगे ना कि वह गवराहाट सी ओर थी तो वह
07:16आपको पलटके यह बोलेंगा रहे वो तो इतनी दूर था यह गाड़ी आती है और इसने मुझे बोला कि आपको
07:21कहीं छोड़ दू तो आप देखेंगे इशारों मैं उसे मन
07:26जाज आएगा? No. Thank you. फिर उसने बोला कि नहीं मैं अच्छा लड़का हूँ. तो मैंने बोला no thank you.
07:33तो दूसरी बार मैंने मना किया. तीसरी बार उसने बोला आप शोर हैं. तो मैंने बोला no. तो मैं शोर
07:38हूँ. तो थोड़ा सा आगे गया महस 50 मीटर फिर वापस आया. तो �
07:42आप शोर हैं किया आप ढूंड नी रही हैं किसी को. तो मुझे समझ नहीं आया कि मेरे मना करने
07:46पे मूसे बोलने पे हाथ के इशारे से आपको क्या चीज समझ नहीं आई. एंड वोस टेरिफाइं. मेरे पास कोई
07:53और वर्ड नहीं है. जबकि मैं जानती हूँ. मेरे जहन में
08:12सब के एक्सपीरिंस जानते हैं. आपने अपनी उस पूरी रिपोर्टिंग के दौरान क्या-क्या फेस किया? देखे इस रिपोर्ट.
08:41दिल्ली की प्रियांशी जब छोटी थी तो उसे लगा कि बड़ी होने पर वो सुरक्षित महसूस करेंगी.
08:46लेकिन भारत जैसे देश में और दिल्ली जैसे शिहर में लड़कियों के सुरक्षा की हालत सुधरना तो तूर बद से
08:52बतर हो भी आ रही है।
09:15दिल्ली की प्रियांशी सुरक्षा को लेकर इस कदर निराश क्यों है।
09:20अब उसे मूल्चा निलाके में खड़ी।
09:23आज तक संपात दाता एश्वर या पानिवाल के साथ हुए वाकिये से समझी हो।
09:29वक्त शाम के सारे साथ बज़े। जगर दिल्ली का मूल्चा नसपता।
09:37दिल्ली में लड़कियों को घूरना कितनी आम बात है। उसे आपको गलत साइट से बिना हेलमेट लगा कर आ रहे
09:43ये दो पाइक सवार समझाएंगे।
09:48राष्टे महिल आयूप रिपोर्ट कहती है कि देश के मुकाबले दिल्ली में लड़कियों को सावजनिक स्थानों पर दोगुना पीडन का
09:55सामना करना पड़ता है।
09:57इस आकड़े का सबूत अब आपको एश्वरिया के साथ हुआ वाक्या समझाएगा जिनके पास एक गाड़ी रुप्ती है।
10:04अकेली लड़की देख सीधे छेड़ देने का आफर होता है।
10:23तो एश्वरिया को ये गाड़ी सवार बार-बार द्रॉप कर देने का उपर देता है।
10:27वो भी आज तक संबादाता के बार-बार मना करने के बावजूद।
10:48दिल्ली की सरकोर, बस स्टेंड और मेट्रो स्टेशनों के बाहर अंचांग लोग अक्तर अकेवी लड़कियों को ड्रॉप कर देने या
10:56लिफ्ट देने का उफर देते हैं।
10:58लेकिन है कोई परॉपकार या मदद की भावना नहीं, बलकि अधिकान श्मामला में महिलाओं को भजा आने, उनका यौन उत्पिडल
11:04करने या उनके साथ गंभीर अपराद करने की एक सोची समझी आपराधिक साजिश होती है।
11:10पाग जू दिसके ये सिलसला नहीं रुखता है।
11:21बलकि अश्वरिया के साथ भी यही हो रहा है, और तीसरी बार साफ तौर पर बना करने के बाद ये
11:26गाड़ी सवार चला जाता है।
11:30कई बार अपराद की अच्छी गाड़ियों में सब भी दिखने वाले कपड़ों में आते हैं ताकि लड़किया उन पर आसानी
11:36से भरुसा करने।
11:37इसलिए इस तरह ड्रॉप करने का ओफर और उसकी तरब से की जाने वाले जित ख़धरनाग हो सकती है।
11:44मूल चेंद स्पताल के बाहर भी ऐसा ही कुछ होता है जहां ट्रैकिक के बीच आते जाती लोगों के बीच
11:50अकेली खड़ी लड़की पर सब की नजर जाती है।
11:57इसी बीच एक गाड़ी आकर रुकती जिसमें सवार भ्रैवर तब तक ज्रॉप करने का ओफर देता है जब तक उस
12:03आदमी को यकींग नहीं हो जाती है।
12:05कि लड़की के जवाब का मतलब सच मिनना ही है।
12:10अगर आप एक महिला है तो आपने फिल्म देखी होगी जिसमें अमिताब बच्चन ने बहुत साफ कहा है।
12:18अगर आप किसी को मना करते हैं तो उसका मतलब है कि आप उस चीज़ को नहीं करना चाते।
12:23नहीं का मतलब नहीं होता है।
12:25लेकिन मेरे साथ जो experience था उसमें मुझे यही समझ आया कि एक बार नहीं, दो बार नहीं, तीन बार
12:30भी अगर आप किसी को मना करते हैं तो हो सकता है कि उनकी वो समझ में ना आता हो।
12:35लेकिन उनका ये ना समझना ही महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा दिक्कत का कारण बन चुका है।
12:40हम बहुत सारे crowded जगाओं पे जाते हैं, हम मंदिर जाते हैं, हम पिच्चर देखने जाते हैं, हम अपने दोस्तों
12:44के साथ बहार जाते हैं।
12:46हमने इस चीज़ को आदमियों को महिलाओं को एक तरीके से देखने को नॉर्मल कर दिया है, लेकिन वास्तविक्ता यही
12:52है कि ये नॉर्मल नहीं है।
12:53कहीं न कहीं हमें एक रेखा खिंचरी पड़ेगी और नो मींस नो का मतलब जो है वो सुसाइटी में बताना
13:00पड़ेगा लड़कियों को भी और लड़कों को भी।
13:23उखरची नगर में दो चाक्ताओं को चार गाड़ी सवार लड़कों ने गाड़ी में खीचने की कोशिक किया। यह सब कुछ
13:29नौर्ट केंपस में हुआ।
13:57दिल्ली में बेटियों को लेकर पुलिस हर बड़ी वारदात के बाद जो दावे करते हैं वो चंद घंटे भी नहीं
14:03ठैर बाते हैं।
14:06तो पेटियों से छिर्खानी उनकी असुरक्षा।
14:15यह बड़ी अजीब सी बात है कि आज से 20 साल पहले भी अगर हमारी कोई महिला साथी निकलती थी
14:21सडक पर अगर एक रिपोर्टर के तौर पर हम रियालिटी चेक करने जाते थे।
14:26जो चीज उस समय होती थी, आज भी वही होती थी, कुछ तो समाज को आएना दिखाना है, कुछ प्रिशासन
14:31को आएना दिखाना है।
14:32कुछ सरकारों को आईना दिखाना है कुछ पुलिस को आईना दिखाना है।
14:35श्रयक कुछ बदला है इतने सालों में भी।
14:38मुझे तो याद है जब निर्भया का अंदोलन भी हो रहा था।
14:41उस समय भी इस तरह की मामले सामने आ जाते थे।
14:43श्वेता उस समय पे तो आप अतरकार के तो और कवर भी किये थे, मैं आप कोलेज में थी, मैं
14:47प्रोटेस्ट कर रहे थी, सरको पे, आज मेरी छह माईनी की बेटी है, आज भी मैं वही सवाल उठा रही
14:52हूं, कुछ नहीं बदला है, और अगर आप अभी मेरे डिपोर्ट जब �
14:55देखेंगे, एक तो होता है कि आप खड़े रहे तो हम सब को पता है कि कोई ना कोई आपको
15:00घूर के देखेगा, इतना नॉर्मलाइज कर दिया हमने इस चीज को, कि हम आगे ही नहीं सोचते कि यह गलत
15:05है, और इसलिए मैं होसकास विलिज गई, वहाँ पे मैंने देखा, कि �
15:10लोग ना बस बैठे रहता है औरतों को गूरने के लिए, यही काम है, शाम को आते है, कोई काम
15:15नहीं है, कोई जगा ना पब में घुसते है, कुछ नहीं करते, बस बैठे है, कि भई अगूर के ओरतों
15:20को देखे, यह इतना नॉर्मल हो गया है कि सामने वाला बंदा, जो से द
15:23पी रहा है, वो से टोकता नहीं है, थोड़े आगे जाके वहाँ पे ना एक हनुमान मंदिर है, थोड़ा एंड
15:29में अगर आप हौसकास में जाओ, वहाँ पे चार-पांच लोग ऐसे बैठे है, एक औरत आस्था में जुक रही
15:33है, अब उसे भी देख रहे हो, एक औरत अगर
15:35अपनी आस्था में भी सुरक्षित नहीं है, तो कहा सुरक्षित है, तो यह सवाल जैसा कि आपने कहा ना, सिर्फ
15:41पुलिस से नहीं है, समाज से है, क्यूंकि हमें ना एक perfect rape victim, एक perfect molestation का victim, उनका
15:48इंतजार नहीं करना चाहिया, तब हमें आउट Aunist नहीं होना चाहिए, हमें �
15:51वो correction अभी करना चाहिए क्योंकि आपको एक औरत के तरफ ऐसे गंदे नजर से घुड़ के देखना वो गलत
15:58है और उसे टोकना भी चाहिए और वही नॉमल नहीं करो इस चीज को अगर हमने नॉमल नॉमलाइज कर लिया
16:04आकार्तिकी तो I think problem वहीं से शुरू हो जाता है और लो�
16:20सोथी पुलिस को जगारे देखे हमारे साथ क्या हो रहा है मेरे साथ क्या हुआ है मैं इमस पे गई
16:24थी एंड एक जग जाके खड़ी हो गए थी सिधा सिर्फ I didn't I didn't decide कि मैं एक घंटे
16:30क्ली खड़ी रहेंगी लेकिन ये पांच मिर्ट के अंदरे जो गाड़ी आने चालू हो
16:50ट � dakाब को आप अच्छे इन्सान और बुरे इन्सान ओं नहीं पता just leave me alone कोई गाड़ी जाके
16:55आगे जाके खड़ी हो कि मैंने बना किया फिर आगे जाके खड़ी हूई फिर पीछे से यी फिर आगे सि
16:59उस टैम पर मुझे सच में डर लगने लगा
17:01कि वोट इफ
17:02I know recording हो रही है
17:04What if की एकदम से मुझे
17:05अंदर गाड़ी में खीच के ले जा
17:07मुझे कौन बजाएगा मैं मिलूंगी भी नहीं
17:09नेक्स दिन
17:10क्या होगा मेरा
17:11एक मेरे फादर के एज का बंदा
17:14आके मुझसे आदमी आके मुझसे पुछता
17:16आप मिलेंगी
17:16और मैं कापना चालू कर दियो उस ताइम पर
17:19ये तो चलो मेरे पास रिकॉर्डिंग में है
17:21बट वाट इफ नहीं होता
17:23मैं सेफ हूँ मुझे पता है
17:25कितनों के साथ होता है
17:26कितनों के साथ कितनी बार मुझसाथ हो चुका है
17:30कोई रेट लगा रहा
17:46पर यह देख लिया है
17:47लेकिन वो आप
17:49चेंज तो तभी आएगा जब आप
17:51चेंज करने को तयार होंगे
17:52जैसे का आपका क्या पूरा experience रहा
17:55ये इस तरह की report के लिए
17:57पहली बार आप गई थी बाहर
17:58इस तरह की report के लिए इस तरह के social experiment के लिए
18:01मैं पहली बार गए ती बहर और मेरा भी काफी सिमिलर एक्सपीरियंस था घरल इशे भाकि लोगों का था
18:06मैं ज़लेज के पास आप �sidedक वेस्ट डेली में पारती � milestones के पाजुब इस diade बहा पे और वु
18:13सारी इलाके और हम लोग जब यह
18:15एक्सपेरिमेंट करे थे तो हम ये पाच से नौ बजे के बीच में ही कर रहे थे तो हम ने
18:18बहुत ज्यादा रात का समय भी नहीं चुना था क्योंकि आस्ता कुछ पाच शाम के पाच से नौ बजे तक
18:25ग्यारा बजे तक हम लोग थे बहार बट उस समय जब मेरे साथ हुआ तब
18:30उस समय कुछ नौ साड़े नौ बज़रे होंगे जब मैं उधर एक इलाके में वहाँ पर खड़ी थी और एक
18:35गाडी थी जो फॉलो करने लगी और पहले फिर हमें रियलाइज हुआ कि अच्छा यह फॉलो करी है तो मुझे
18:40लगा कि ठीके मैं खड़ी हो जाती हूँ शायद स
18:55खड़े होने ही आया है बट उसने फिर वह गाडी से बाहर निकला उसने अपनी सिग्रेट जलाई और वहाँ पर
19:01खड़े होके मुझे घूरते अपनी सिग्रेट पीने लगा और उस समय तो हाँ यह सब रिकॉर्ड हो रहा था तो
19:06मुझे पता था कि कोई है साथ में बट अग
19:20मैं उसको क्रॉस कर आगे निकलती है वह गाडी से बैठके निकल जाता है उसके लिए तो मतलब यह शायद
19:25रोज की बात होगी मैं आया मैंने देखा लड़की देखी और मैं आगे चला गया हमारे भी काफी नॉर्मल हो
19:32गया है कि आप कहीं भी जाते हो आपको लोग भूरते
19:37देख रहे है किते लोग आपके पास खड़े हो जाता है यह कामरा पे और भी हुआ था कि हम
19:41लोग भापे लास्ट में अपना PTC रिकॉर्ड कर रहे थे और उस समय कामरा और मेरे बीच में ही वो
19:46बंदा आके बहा से निकलता है और वो ऐसे चूने की कोशिश करता है और यह का
20:01किसे शिकायत करूं क्या बोलूंगी अब परिवार में तो मैं क्या ही बताओ किसको क्या बोलूं मतला कि कब से
20:08होता आ रहा है कितना नॉर्मल लगने लगा है अच्छी बात है कि अब हम इसके बारे में अवाज उठा
20:13रहे हैं बढ़ हम आपकी रेपोर्ट जेखते हैं जो इ
20:29इतनी छोटी सी बात दिल्ली के वो मर्द क्यों नहीं समझते जो अकेली लड़की को देखते ही उसे घूरने लगते
20:35हैं उसके करीब जाकर उसे असहज करते हैं कई बार तो जान बूझ कर छूने की कोशिश करते हुए निकल
20:41जाते हैं क्या यही मानसिक्ता आगे चलकर गैंगर
20:44जैसी वारदात की वज़े बनती है क्योंकि घूरना हो या फिर अकेली लड़की को देखकर उसे ड्रॉप करने का ओफर
20:51देना हो यह सारी हिम्मत लोगों में इसलिया आती है क्योंकि उन्हें इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता मतलब गलती
20:59तो तब मानेंगे जब लगेगा
21:00कुछ गलत कर रहे हैं खबरदार करने वाली बात यह है कि बस, मेट्रो, सड़क इन सभी जगों पर महिलाओं
21:08के साथ बज सलुकी करने वाले ज्यादतर पुरुशों की मानसिक्ता यही होती है वो इसे अपराद या गलती मानते ही
21:15नहीं है मतलब शुरुआत यही से करने की ज
21:34इस दौरान जेसी का गोयल के साथ वो सब कुछ हुआ जिसका सामना दिल्ली की हर लड़की गया
21:45जो अब इतना नॉर्मल हो चुका है कि किसी का ध्यान नहीं जाता सिवाए दिल्ली की पीठियों में जो ये
21:51सब सेहने को मजबूर है
21:53मतलब लड़की को देखकर पाई सवारों का रुखना अजनब्यों का घूर कर देखना पीछा करना
22:01कार से उतर कर इंतजार करना
22:13पटेल नगर और कीर्टी नगर में जेसिका को चलते फिर ते लोग बार बार बार बाईक और कार रोग कर
22:19बस भूरते हैं
22:23ये देखे राजाओरी गार्डन बस स्टॉप पर बिना किसी साफ वज़ा के बाईक वाले रुख जाते
22:28जनकपुरी में हैप्पी मॉडल स्कूल के पास एक कार कुछ दूर तक जेसिका का पीछा करती कैमरे में कैद बुख
22:35ये आदमी भले ही जेसिका के पास नहीं आ लेकिन गाड़ी से बाहर निकल कर देखता है
22:41सिगरेट जला कर पीता है बार बार आज तक समबादाता के करफ देखता है दिल्ली की एक चलती सलग पर
22:47आज तक समबादाता को अकेली लड़की देखकर एक टैप ड्रैवर रुखता है गाड़ी से बाहर निकलता है रिपोर्टर के आगे
22:54से होकर देखता हुआ जाता है
22:56सिगरेट सुलगा कर वापस लोटता है और फिर गारी के पास सिगरेट पीते हुए बार बार देखता है repon पर
23:01बात करता है यह सिलसला छे मिनट तक चलता है इस आदमी की हरकतों को देखते हुए जैसी का इस
23:07गारी से आगे जाकर खड़ी हो जाती
23:16इसके बाद भी ये वही रहता है और थोड़ी दिर बाद चला जाता है
23:23देखने में भले ही आम लग रहा हो
23:39ये दिल्ली का भार्टी कॉलिग यहां बता रहा हन्देरा महिला सुरक्षा के दावों और खराब लाइटों की हकीकत दिखाता है
23:49तिलक नगर की ये तस्वीर देखिए जिसमें एक आदमी जेसिका के बहुत करीब से गुजरता है
23:54मानोस का मकसद गुजरते हुए उसे च्छूने की कोशिश करना से रिपोर्टिंग करते हुए मुझे सबसे हैरान दायक चीज यही
24:04लगी कि बाकी जनता के लिए ये सब होना कितना आम था
24:07मेरे पास आके गाडिया रुकी मुझे गाडियों ने फॉलो किया बाइक वाले लोग मेरे पास आकर रुके और किसी ने
24:14कोई आवाज नहीं उठाए
24:15उन्हें लगा कि एक आम जिन्दगी की तरह मुझे इसमें चलते ही रहना चाहिए
24:20जब तक कुछ गंभीर नहीं हो जाता तब तक इसको शिकायत के लायक भी नहीं समझा जाता
24:24लेकिन एक औरत होने के नाते आप वो फरक समझते हैं
24:29हम समझ सकते हैं कि बदलाव एक जटके में नहीं आ सकता
24:32लेकिन बदलाव के शुरुआत कहीं पर तो होगी
24:34और हम ये भी नहीं कहते हैं कि सारे के सारे लड़के एक जैसे हैं
24:37नहीं इनमें ऐसे लोग भी हैं जो बचाते भी हैं
24:42रक्षा भी करते हैं, आखिरकार हम सब अपने भाईयों के हाथों में राखी बानते हैं, हम उमीद करते हैं कि
24:49वो बाकी लड़कियों को लेकर भी रिस्पेक्टफुल होंगे, हमारे घर में हमारे पिता हैं जिनको हम आइडलाइज करते हैं, तो
24:54ऐसा नहीं है, लेकिन सड़क �
24:57पर चलते हुए, आप जितनी संख्या में उन लड़कों को देख रहे हैं, उन लोगों को देख रहे हैं, उन
25:02आदमियों को देख रहे हैं, उसको देखकर सोचिये कि अगर कोई बिना किसी साथी के, कहीं पर जा रही हो,
25:11किसी के पास कोई साधन नहों, गाड़ी नहों, पैद
25:25कॉनर्स ऐसे थे जिसको लेकर कोई भी असहज हो जाएगा डा कॉनर्स थे और मुझे लगता है ये हमारी देश
25:33की राज़दानी दिली की एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि बहुत सारे आपको ऐसे इलाके मिलेंगे जो वैलिट नहीं होते
25:39हैं वहाँ पर किसी को खीचना कि
25:42करना किसी के सामने अर्चानक से आ जाना यहां तक की किसी को बहुश करना भी बहुत आसाल है नहीं
25:47एक रिजन जो हम वयल लिट इलाकों में गा इश्वेट था वह यह था कि अगर अप यह सोचिए घरिये
25:52वह रज़ी अगर उदेरी गली तो नहीं क्या-कः हो份 सकता है
25:57हमने कोशिश यह करी दिखाने की और हम सब जो हमने फेस किया वो यह कि अप्रोच तो सेकंड था
26:02वो जो गेज थी
26:02आप सोचिए आप मंदिर जा रहे हैं और जाधा तर लोगों की हमाई जो आस्ता होती है हम जब मंदिर
26:08की डेली इस पर पहुंचते हैं हम जुक कर उसको चूते हैं यह श्रया ने अपने कैमरे में कैप्चर किया
26:12कि वहाँ पर ऐसे लोग थे जो हमाँ बैटे ही इसलिए थे कि �
26:14अगर महिला है आएंगी वो जुकेंगी वो और वो सब क्याप्चर हुआ है तो आप इससे यह समझ सकती है
26:20कि मानसिक्ता क्या हो मुझे लगता है यह तो स्टेप वन है लास्ट स्टेप जो है वो ही नियस क्राइम
26:25होता है वो शुरूवात यहीं से होती है सभी बात है छोटी
26:44मंदिर गई और उस पूरी घटना क्योंकि एक बीट ऑफिसर से में बात कर रही थी उनने कहा कि वो
26:49जो आस्था कुंछ पार्क है वो ऐसे जगा पे स्थित है कि अगर आप चाहो तो आप कालकाजी मंदर का
26:54दर्शन करो आप आस्था कुंछ पार्क से होते हुए इसकॉन मंद
27:11सखते हैं तो अगर तो कहते हैं कि नहीं वो तो एक बोइफ्रेंट के साथ गई तो भी क्या उससे
27:18ये भी तो कहा था न उससे तुम अपने घर में बात कर रहा हो उससे कग हWork मरमें बता
27:21कराई हूं तो उसने क्यों नहीं ऐसा औड गाए तो इसकुग उपको आपको एक इम इ
27:41बिलाओ की ऐसे बाइटे आ रही थी,
27:42कि वो के रही हैं एसे कही सारी,
27:45जोसमें वो कह रही है कि भई शादी ही तो करने ले जा रहा है,
27:48तो मतलब ये जस्टिफाइ करने भी लगते हैं लोग उसके बाद,
27:51लेकिन काती की आप से इसलिए मैं ये पूछ रही हूं,
28:09नहीं, वो वहीं खड़े थे, घूम कर आ रहे थे,
28:13वो पीछे से आ रहे थे, वो आगे से आ रहे थे, वो वहीं खड़े थे,
28:15एक इंसान, I would, I don't know, वो एक आड़ोगेट थे,
28:19he was playing subtle, कि मतलब मैं ही जाओंगी उनसे पूछ होंगी,
28:22कि मैं ही अपना कुछ अप्रोच लेके जाओंगी,
28:25कि हाँ मैं call girl हूँ, टाइप, आप मुझसे पूछ हो, मैं लेक में चलूँगी,
28:30ऐसे काफी लोग थे, वो आदा घंटा खड़ा रहा,
28:32मैं एक घंटा थी माप, वो आदा घंटा खड़ा रहा,
28:34वहाँ बाहर खड़े हो, कि मुझसे, मुझसे देख रहा है,
28:36बात करने की कोशिश कर रहा है, किसी से फोन पे,
28:39एक और काप वाला है, काप तो मतलब और ही मुझसे स्केरी लगा,
28:43क्योंकि हम लड़कियां, पुब्लिक ट्रांसपोर्ट को,
28:45और ऐसे ट्रांसपोर्ट पे यकीन करती है,
28:47ट्रस्ट करती है, कि हम हमारे डेस्टिनेशन पे धंग से पहुचाएं,
28:51लेकिन वही सोर्स ओ फियर बन रहा है, हमाल जिया,
28:54वो क्या पवाला के रुक रहा है, मुझसे बूच रहा है, कि ड्रॉप कर दूँ,
28:57मैंने का आपके पास राइड है हमारी, आपके पास राइड है, मेरी तो ड्रॉप करने के बाद करिये,
29:01जब राइड है, आप दिखाएए, आप बोलते हैं, नहीं मैं तो उबर से हुना,
29:05तो आप उबर से हैं, तो क्या मतलब है इसका,
29:07आप जाके मैं जब लड़की खड़ी है, तो ड्रॉप कर दोगे कहीं पर जाके,
29:12मतलब घर पी नहीं जा पढ़ेंगा हम कर दो, अरे?
29:16आपने देखा कि कैसे हमारी एक समवादाता को एक गाड़ी सवार ने बार बार ड्रॉप करने का ओफर दिया,
29:22तो एक गाड़ी वाले को कई मिंटों तक रात के वक्त गाड़ी खड़ी करके हमारी रिपोर्टर को घूरता रहा,
29:28कई बाइक सवारों ने भी यही किया, कई लोग जान बूज कर रिपोर्टिंग के दोरान करीब से निकले,
29:34चिंदा की बात यह है कि यह हालाद दिल्ली के किसी एक इलाके के नहीं है,
29:39एम्स, लाजपत, नगर हर जगे यही होता मिला,
29:42सबसे खबरदार करने वाली बात पुलिस की गहर मौजूद की,
30:11करीब साथ मिनट के अंदर साथ से आठ गाडियां के पास रूगी,
30:32स्यादा तर ने उन्हें कहीं छोड़ने की पेशकर्ष भी की,
30:36कुछ हिचकिचाए, वहीं कई वापस आए, मना करने के बावजूद,
30:43और फिर ट्रॉप करने वाले में वो बात कहीं जिसका सामना दिल्ली की लड़कियां अक्सर करती,
31:13तो दिल्ली में एक लड़कियां अगर साथ पर अकेली खड़ी हैं,
31:16तो अजनवी के लिए ये मौका होता है,
31:20तभी तो घंटे भर में साथ से आठ गाड़ी वाले रुपते हैं,
31:23रिपोर्टर के मना करने के बाद भी दो से तीन गाड़ीयां वापस लौड़ें,
31:27दो तीन तो पूझ भी लेते हैं,
31:33मैं किसी की तरफ नहीं जा रही थी,
31:35मैं बस वहाँ खड़ी थी,
31:37मैं लिफ नहीं मांग रही थी,
31:39लेकिन लगबग एक घंटे के अंदर वहाँ पर कई गाड़ीयां आके रुख गई,
31:42कुछ ने मुझे कहीं छोड़ने की पेशकश की,
31:45कुछ ने मेरे मना करने के बावजूद वह वापस आये मुझसे पूछने के लिए,
31:50और कुछ मर्द तो ऐसे थे, जोनों ने मुझसे पूछा, आप मिलेंगी,
31:54एक वॉरत के लिए ये सुनना छोटी मोटी बाते लग सकती हैं,
31:58लेकिन जब ये बार-बार हो, तो हर मर्द, हर गाड़ी, हर मोड,
32:04आपको देखने वाला हर इंसान, आप उनका हिसाब किताब करने लगती हैं.
32:10तो पुलिस की मौजूदगी या गेर मौजूदगी,
32:13जैसिका, आपको पुलिस की एका प्रेजन्स दिख रहा था उन अरियास?
32:17नहीं, अच्छली, अब मैं सोच रही था हूँ, मुझे कहीं पे भी पुलिस आसपास नहीं दिखी,
32:22मैं जिस भी लाके में गई, मैं वेस्ट दिल्ली में थी, मैं वहाँ कॉलेज के पास गई,
32:25वो एडिया भी अच्छे से लिट नहीं था, वहाँ पे अच्छी लाइट भी नहीं थी,
32:29और एक हैपी स्कूल था जहां से मैं गई, मैं एक मेट्रो के पास भी गई,
32:32यहाँ पे हो सकते हैं, अंदर गार्ड होंगे, पर बाहर तो कोई पुलीस वैन नहीं थी,
32:37एक पुलीस वैन शायद बीच में गुजरी थी, और वो तब ही था जब आदमी वहाँ पे खड़ा था,
32:56इस्वरे आपको देख रहा है था पुलीस वैन खड़ी थी, नहीं,
33:00शुटा मैं तो, लसर के दो गेट है, एक में गेट है, एक बैक गेट है, उसके पीछे एक पार्क
33:06है,
33:06तो बैक गेट से निकलते ही जरूर वहाँ पे एक पुलीस वैन खड़ी थी, वहाँ पे,
33:10ज़े दो में गड़ी थी, वहाँ पे एक पुलीस के लिए वहाँ था, बढ़ था, बढ़ भी सड़क पे मुझे
33:15कोई भी पुलीस वैन दिखी न पुलीस वाल शे,
33:18मैं पहले जैसे का वाला कंटिनू कर एंगी, कि उसने जहां से रिपोर्ट फाइल किया भारती कॉलज,
33:23वहाँ से बीसीप वैस्ट का ओफिस इस टोन थोवे लेकिन वहाँ कभी भी लाइट नहीं है, वहाँ साही कह रही
33:28है, वहाँ इस ब्लैक सपोट,
33:29क्या ओवर कॉंफिडेंस में नहीं है, पता नहीं है, सच में DCP West Office मतलो अब चल के जा सकते
33:34हो, लेकिन वहाँ पलाइट नहीं है, और अगर नेरी बात करें, तो कुछ जगह है, जैसे माता सुंदरी College के
33:40बार मुझे ITVP के तैनाती दिखी,
33:41आइट बीप वाले वहाँ पे तैनाती थे कि भईया चेरकानी नहीं नहीं हो, और बाकी श्वेता आपको भी पता है
33:48कि हमें ना विजुल्स मिलते हैं, पुलिस गोडे पे सवार होके पेट्रॉलिंग कर रही है, तो यह ना दिखावा हो
33:53गया है, तो आप तो क्राइम भी कव
34:11में अपर-षाम सब्सक्राइब कर रही है, तो आप निकालते हैं तो यह सवाल करते करते हैं, ठझाइगे हर बार
34:19जब घटनाए होंगी लुषूल्स दिये जाएगे कि पुलिस की फीजारी हो रही है, फिर वापस से व शाम्त हो जाता
34:24है.
34:26दिल्ली में हमने अपनी इस पड़ताल के दौरान कई महलाओं से भी बात की है उनमें से ज्यादतर ने बताया
34:31कि वो जब छोटी थी तो उन्हें लगता था कि बड़े होने पर ठीक हो जाएगा सुरक्षित महसूस करेंगी लेकिन
34:37ऐसा कुछ नहीं हुआ बलकि असुरक्षा का
35:08दिल्ली का आवद जो अपनी वहन के बाहर जाने पर परिशान हो जाता है क्योंकि बाहौल बहुत खराब है
35:32दिल्ली में लाखों परिवाद रोज इसी डर से गुदरते हैं बेटी जब तक घर के बाहर रहती है उसकी सुरक्षा
35:38की चिंदा सताती रहती है
35:41भाई के तौर पर अवद भी परिशान रहते हैं लेकिन उससे ज़्यादा परिशानी वारी बात उन्हें लोगों का रवया लगता
35:48है
36:10भारत में छेरखानी को इतना सामाने मान लिया गया है कि अब ये परिशान करने दगा है
36:15मुखरजी नगर की घटना हमारे सामने है जहां दो छात्राओं को गारी में खीचने की कोशिश होती है
36:21और F.I.R. दर्च करने में पीडित को तीन पुलिस टेशन दोड़ना पड़ता है
36:25पुलिस के रवये के तो कहने ही क्या
36:28तो मैं आपको बतातू कि पहले तुम्हें मौरिसनगर पोलिस्टेशन गई विजनगर तो हम यहां आते हैं
36:38तो उन्होंने हमसे इतना भी नहीं पूछा कि वहां चले जाएगे
36:42मैं दो लड़किया थी मैं और मेरी दोस्ती हम दोनों वहां पर जाते हैं
36:45बोफस्ति हैं वहते पूछें कि होए और मेरी जाया आता है
37:04ऐसे ही दावे यह यकेन करने पर मजबूर कर देते हैं कि डिली में पुलिश से बहुत ज्यादा
37:09उ म्मीद लड़कियों को नहीं होती दो भागे कूंड बात यह है कि जब महिला हुद यह मानने लगती है
37:14कि कुछ नहीं होगा तो घटना केस बनने से पहरे ही हत्म हो जाती है
37:19इसका फाइदा वेटियों को सताने वाले उठाते हैं
37:23दिली में महिलाएं हर जगे असहज होती रखती है
37:29दिली के हौस-खास की ये तस्वीर देखिए
37:31जिसके विलिज के एंट्री गेट पर एक आदमी बहा से गुज़रने वाली बहिलाओं को देख रहा था
37:36फोल कुछ नहीं रहा नहीं घूम रहा है
37:39बस हर उस अगली महिला के आने का इंदजार कर रहा है जो उसके खरीद से गुज़रती है
37:47दिल्ली में घूरने की ये आदत किस कदर आम है उसे इस बाइक सवार से समझ ये
37:55जो गुज़रती दो महिलाओं को देखने के लिए अपता सिर लगभद 180 डिगरी खुमाता है
38:03अपनी इस हरकत को ना च्पाने की कोई कोशिश और नहीं देखे जाने का कोई डर
38:08यही दिल्ली की हकीकत है ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली में ये बरताव इतना आध हो गया है
38:14कि किसी को देखते हुए पकड़े जाने पर भी अब शर्मिन की पहसूस नहीं होती
38:21ये सब कुछ बंदिर के बाहर भी होता है
38:24आज तक संबादाता अश्रिया भनवार बंदिर गई जिसके प्रवेश्ट द्वार के बाद चार पांच आदमी बैठे थे
38:30इसी दोरान एक अधेर उम्र की महिला अंदर आती है वो प्रातना करती है
38:35जाने से पहले जैसे ही वो जुकती है एक आदमी की नदर इस महिला का पीछा करती है
38:41उसके चेहरे को नहीं बल्कि उसके शरीर को देखती है
38:45आज था महिला को जुकने के लिए कहती है लिकिन ये भी किसी और के लिए गूटने का मौपा बन
38:51जाता है
38:52आखिर क्यों?
38:56इसके बाद फिर से हमने कुछ और देखा जिसे सिर्फ देखना तो नहीं कहा जा सकता
39:01इस तरह एक पहिला साबोहिक मनुरंजन का विशे बन जाती है
39:06एक देखता है दूसरा ध्यान देता है पूरा सबुख देखता है
39:15मेरे लिए असहज कोई एक खास नजर नहीं था बलकि ये था कि कितना समानने हो गया है
39:21कुछ आदमियों का एक साथ बैठे रहना, एक महिला का गुजरना, एक कोनी से धक्का, एक आदमी का मुर्के देखना
39:29और किसी को भी ये नहीं लगता कि ये गलत है
39:32और शायद येही सबसे बड़ी असहज सवाल है
39:35कि एक महिला को uncomfortable feel करवाना इतना normal हो गया है
39:40कि किसी को अब इस पर ध्यान भी नहीं जाता
39:45नमबर वन किसी का ध्यान नहीं जाता, नमबर टू, onus of proof
39:50लड़की पर है, आप बताईए कि आप प्रूव किजे कि वो इसी वज़े से देख रहा था
39:55और अब हम ये दिखा रहे है, पेशकाष, श्वेता, आपको भी बता है, हम यही बात कर रहे थे, लोग
39:59बोलेंगा रहूते, ऐसे ही देख रहा था
40:18बदलना तो पड़ेगा ना, क्योंकि हम लगाता, सेम सवाल कह रहे है, जैसे 2012 में भी हमने सवाल उठाया, आप
40:24आदे कंजावला के समाई बे भी जब एक इंसिदेट वा था, हम तब भी रियालिटी चेक करने निकले, आज भी
40:29हम रियालिटी चेक करने निकले, कुछ नहीं �
40:31बदल रहा है, डर क्यों नहीं है, कोई डरता क्यों नहीं है, कि भाई कोई हमें देखते टोकेगा नहीं, कोई
40:37ये जो डर है, ये तो अंदर से आना पड़ेगा ना, उसमें तो आँखों की शर्म होगी, कि आ रहे,
40:42किसी ने देख लिया कि मैं इतनी देर से घूर रहा हूँ,
40:44पर ये डर ही नहीं है, इसका मतलब है कि आपको वही चीज़े के एकदम नॉमलाइज और एश्वरिया शुरू वहां
40:52से करना होगा, परलिमेंट के उतने डिवेट्स हो गए, आपके पास इतना एक बजट बन गया, निर्भया फंड, जिसमें कितना
41:00कहां खर्च हो रहा है, �
41:01वो भी समझ में आए, और उसके साथ साथ ये बदलाव, मुझे लगता है सबसे जादा शुईता जरुवत जो इस
41:08समय है, वो है पोलिटिकल विल की, बड़ा सवाल है, क्या किसी भी पार्टी में इतनी पोलिटिकल विल है, हमने
41:15तो देखिया है, हम देखा है कि हम भी पार्�
41:20नेता, या फिर कोई एक बड़ा कॉपरेट हाउस, कोई भी ये बोले के भाई ठीक है, इस आदे की जिम्मेदारी
41:25मैं लेता हूँ, हम कोई कॉपरेट हाउस बोले के भाई इतनी की जिम्मेदारी हम लेते हैं, हम मेक्शूर करें कि
41:29CCTV लगे, अच्छा मज़े की बात क्या है, क
41:44फॉर्चुनेटली मैं ही अकेली मैला होती हूँ, तो अब आप बैठे हैं, वहाँ पे जिस टाइप के जोक्स ख्राक होते
41:49हैं, वो डिमी नहीं होते हैं, बट आप कई बार कुछ बोल नहीं पाते हैं, खून का गूट पी के
41:52रहा जाते हूँ, आपको भी बता है, मैजॉरि�
42:11में जाते हैं, क्या हम कह सकते हैं कि किसी भी पॉलिटिकल पाटी के काडर ने हमें उनकमफोटबल नहीं फील
42:16करवाया है, क्या रैली में हमें सेफ लगता है, तो इसे सिर्फ एक मैनिफेस्टों में कह जाने वाली बात नहीं
42:22कीजिए, सच में ग्राउंड में इंप्लिमेंट
42:24करने के लिए जो करना है, वो करिए, खास कर जब एक भीड होती है, और वहाँ पर लोगों को
42:29लगता है, किसी को पता नहीं चलेगा, किस ने छू दिया, वहाँ पर जादा, इसलिए जो रैली की बात आप
42:34कर रहे हैं, अब हम ये भी नहीं कह रहे हैं, कि वो सारे हो सकता है, �
42:37प्लिटिकल वरकर उस टाइम हो वो सकता है उसमें लोग भी ऐसे घुसाए हो जो सोच रहे हों कि वहां
42:42मौके का फाइदा उठाया जाए यह सोच अब दिल्ली के जितने भी इलाकों से आपने लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा
42:49हमारा रियालिटी चेक देखा वो सारे भी
43:03पेटिया सुरक्षित है कि कर दोट प्लेस राजठानी का दिल है कि रॉक्ष्णी से भराक भीर फारवाल आम लोग से
43:18सुरक्षित कम से कम काग्ज़ों पर लेकिन ठ्यान से देखिए एक नज़र एक और नज़र
43:27लगातार घूरना लेकिन जैसे ही घूरने वाले पर ध्यान जाता है उसकी बॉटी लेंग्वेज बदल दी
43:35लड़कियों को घूरने की आदर महिलाओं की मानसिक शान्त और उनकी आजादी को छीनने वाली हरकत है
43:41जिसे विजवल हरस में यानि नजरों से की जाने वाली छेखानी कहा जाता है
43:45दिल्ली की सटकों, मेट्रो, बसों और बासदारों में लगभग हर लड़की को रोज़ाना इस असहच कर देने वाले अनुवफ से
43:53गुजरना पड़ता है
43:54ये कई घटनाओं का मिला जुलासर होता है
44:04देखना, रोकना, पीछा करना, पास आना, मना करना, लोटना और फिर से पूछना
44:24अलग अलग अलग जगें, अलग अलग कुरुश, अलग अलग पल
44:29लेकिन वहवार का मूल पैटर्न एक जैसा है
44:32और बेचियों को होने वाली पीडा के बारे में प्रियांशी से सुनिये
44:36अभी भी हमने old, के इसलिए आर्ट आप में नार्मलाई है बहुत जादा, इवबड़ी, इसलिए रिजाए और इसलिए, अलग बहुत
44:43जादा में प्रिया
44:43इन लेकिन वो ऊफ नार्मलाईस का रहता था था लिए जो लेकिन तो पूल रहे हैं जो
45:17तो महिलाओं का सीधा सा सवाल, महिलाओं पर पाबंदी की बात को होती, लेकिन मर्दों के बरताओं पर नतेल कैसे
45:23कसी?
45:34और शायद यही असल बात, क्योंकि अगर किसी लड़की पर कोई शारीरी खमला नहीं होता, तो अक्सतर मान लिया जाता
45:41है कि कोई समस्या ही नहीं है, लेकिन इसे नॉर्मल मान लेने की आदर, महिलाओं के आत्म सम्मान को हर
45:47रोज थोड़ा थोड़ा खाए जा रहे थी
45:49The man was just sitting in front of me, रिक्षा में, so he was just continuously gazing and it was
45:56थोड़ा सा uncomfortable for me, that's how
46:00So, अभी आप यहाँ पर ख़ड़े हो और नोबड़ी स्टरिंग अट रहे हो, नोबड़ी से भी आ रहे हो
46:03I think because I am living here from last past, I think 3.5 years and I have experienced a
46:10lot, I have, you know, learned to live in that way, you can say
46:16Soche, दिली केक पेटी इस महों में जीना सीख लेने को मजबूर है, क्योंकि तमाम दावों के बाप जो, कुछ
46:23नहीं बडलता
46:24I was traveling by metro, so it was really crowded and someone was trying to, you know, touch you inappropriately,
46:36like just to take advantage of the crowd
46:38But then I kind of moved away, went to the another coach, but I could feel it, that the bad
46:44touch, I could feel it, that someone was deliberately trying to touch me
46:46Going in the park just for running, I feel that someone is gonna follow me, so I am just keep,
46:52I just keep looking back, just to make sure that no one is following me home
46:55Following me back home, so yeah, it's like a constant fear for me and I think other girls as well,
47:00living in Delhi
47:11अगर मैं एक चीज़ आप से पूछू, कहां से शुरुआत करनी चाहिए, कातिकी
47:16मुझे सच में नहीं पता कहां से शुरुआत करनी चाहिए, यह mindset है, lack of education है, upbringing है
47:22कोई माबा बच्चे को यह तो नहीं सिखाएगा, जाके लड़कियां छेड़ो, मुझे नहीं समझ में आ रहा है, क्या दिक्कत
47:28है
47:29upbringing अच्छी लड़कों को भी चाहिए, लड़कियों को भी चाहिए
47:31और हम इस चीज को मानते हुए कह रहे है, लेकिन जो vulnerability है, उसकी वज़े से हम यह कह
47:37रहे है
47:37कि लड़कियों को सेफ रखना ज़रूरी है
47:39हाँ, बिल्कुल, मुझे लगता है बहुत छोटी basic चीजे भी, जैसे उस दिर मैं देख रहे थी
47:43कि किसी ने लिखा कि आपका जो नापी बदलने वाला, जो डाइपर बदलने वाला स्टेशन होता है
47:48वो हमें सिरफ women washroom में दिखता है, men's में नहीं दिखता है
47:52यह पिटरार्की के बहुत छोटे-छोटे साइंज है जो हमारी daily life में invisible हो गए
47:57अब हम notice ही नहीं करते हैं, अब हम इसको question ही नहीं करते हैं
47:59और कोई दूसरी बार इस पर question ही नहीं करते हैं, आख उठाके नहीं बोलते हैं
48:03अगर हम यह सारी चीजों को छोटी-छोटी चीजों को हम daily basis पर परखना शुरू करें
48:08तब हमें शायद जाके दिखेगा कि कहां से चेंज करना है
48:10जनेरेशन के साथ कई चीज़ें बदलती हैं, finally वो समय आ चुका है
48:13जब इस चीज़ को भी बदलना होगा, चाहे छोटा सा कदम ही सही, लेकिन कदम तो लेना ही होगा
48:20बहुत बहुत धन्यवाद आप चाहरों का हमारे साथ जुड़ने के लिए